व्यावसायिक भवनों पर सिर्फ एक बार लगना है प्रमोशनल सरचार्ज
प्रमोशनल सरचार्ज सिर्फ उन्हीं व्यावसायिक भवनों पर लगेगा, जो 300 वर्गमीटर या उससे अधिक क्षेत्रफल में बने हैं और उनमें रेन वॉटर हार्वेस्टिंग, पार्किंग और ग्रीनरी की व्यवस्था नहीं है। तीन सौ वर्गमीटर या उससे अधिक क्षेत्रफल वाले तकरीबन एक हजार व्यावसायिक भवनों को नगर निगम ने नोटिस भेजा है। अगर वहां इनकी व्यवस्था नहीं है तो वार्षिक मूल्यांकन पर दो प्रतिशत टैक्स ज्यादा देना होगा। इन तीनों में से कोई भी एक व्यवस्था है तो वार्षिक मूल्यांकन पर दो प्रतिशत छूट मिलेगी।
प्रमोशनल सरचार्ज पूरी तरह व्यावसायिक भवनों से एक बार ही वसूला जाना है, जिसे निगम नए वित्तीय वर्ष में लेगा लेकिन इस बीच ऐसे जिन व्यावसायिक भवनों के बिल जारी हो चुके हैं, उनके स्वामियों को गृहकर जमा करने आने पर आपत्ति फॉर्म दिए जाएंगे। उसे भरकर जमा करने पर प्रमोशनल सरचार्ज में 50 प्रतिशत की छूट भी दी जाएगी।
प्रमोशनल सरचार्ज को लेकर पार्षदों के दो गुटों के बीच पिछले कुछ दिनों से चल रही नूराकुश्ती और इसके विरोध और समर्थन में महापौर से लेकर कमिश्नर तक को दिए जा रहे ज्ञापन के बीच नगर आयुक्त देवेंद्र कुमार पांडेय ने बृहस्पतिवार को स्थिति स्पष्ट कर दी। संवाददाताओं से बातचीत में उन्होंने साफ किया कि जिन भवनों को प्रमोशनल सरचार्ज का नोटिस जारी किया है, उनमें से ज्यादातर में पार्किंग या वॉटर रिचार्ज की व्यवस्था है, ऐसे भवन आपत्ति फॉर्म भरने पर स्वत: ही प्रमोशनल सरचार्ज से बाहर हो जाएंगे। नगर निगम प्रशासन ने यह प्रक्रिया कर नियमावली, कार्यकारिणी और सदन के संकल्पों के तहत की है।
नगर आयुक्त ने शास्ति अधिरोपित किए जाने पर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि व्यावसायिक और आंशिक व्यावसायिक 18000 भवनों को सर्वे के बाद नोटिस भेजा था। इसकी सूची भी सभी 80 पार्षदों को उपलब्ध कराई गई थी ताकि यदि कोई आपत्ति, अन्य तथ्य संज्ञान में लाना हो तो ले आएं, लेकिन किसी भी पार्षद ने कोई भी आपत्ति प्रस्तुत नहीं की। आपत्ति दर्ज कराने के तीन अवसर भी दिए गए। इस बीच जिन लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई उसके निस्तारण के बाद ही बिल जारी किए गए। स्वत: कर निर्धारण के संबंध में आपत्ति दर्ज न कराने पर ही निगम प्रशासन ने शास्ति आधिरोपित किया। इसमें भी नगर आयुक्त को 50 फीसदी छूट देने का अधिकार है, जो भवन स्वामियों को दी जाएगी।
नगर आयु्क्त ने खर्च में कटौती और विभिन्न मदों में आय बढ़ोतरी पर भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने पिछले वर्ष मार्च से अब तक कम डीजल खपत में अधिक कूड़े का ट्रांसपोर्टशन, विज्ञापन से 1.28 करोड़, दुकानों के किराए से 29.69 लाख, लाइसेंस से 70 लाख, वधशाला से 58 लाख, रोड कटिंग से 1.25 करोड़ रुपये की आय के बारे में बताया। बताया कि रोड कटिंग मद में अभी चार करोड़ रुपये आय और होने की संभावना है।
राज्य वित्त आयोग से वेतन और पेंशन मद में सालाना मिलने वाले 138 करोड़ रुपये में कटौती कर दी। नगर आयुक्त ने बताया कि इस वित्तीय वर्ष में निगम को मात्र 84 करोड़ रुपये मिले, जबकि वेतन, पेंशन मद में सालाना 130 करोड़ रुपये व्यय होते हैं। कटौती के बावजूद वेतन का संकट नहीं उत्पन्न होने दिया। विभिन्न मदों में आय बढ़ाकर इस कमी को पूरा किया गया।