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अहंकार का नाश करती रामकथा
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 07 Nov 2015 01:58 AM IST
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। दिव्य प्रेम सेवा मिशन हरिद्वार के सेवा कार्यों को समर्पित श्रीराम कथा आयोजन समिति की ओर से सेवा समिति रामबाग में आयोजित राम कथा के छठे दिन शुक्रवार को संत विजय कौशल ने भरत, भारद्वाज मुनि से राम संवाद, चित्रकूट में सती अनुसूइया के आश्रम में राम का पहुंचना, निशाचरों को समाप्त करने का प्रण लेना।
गुरु अगस्त्य से मुलाकात, सीता हरण, जटायु का रावण से युद्ध करना, जटायु का अंतिम संस्कार, शबरी के आश्रम पहुंचना आदि प्रसंगों की कथा विस्तार से सुनाई। कहा, रामकथा अहंकार का नाश करने वाली है। भगवान राम की विनम्रता सबका मनमोहती है। वहीं भरत जैसा चरित्र अतुलनीय है। भरत धर्म का पर्याय और आदर्श स्वरूप हैं।
कथा का विस्तार देते हुए कहा कि राम ने शबरी के जूठे बेर प्रेम से खाए और कहा इतने सुंदर बेर उन्होंने अभी तक नहीं चखे थे। उन्होंने उपस्थित लोगों से आग्रह किया कि आन अपने घरों में प्रेम से भोजन ग्रहण करें और सराहना भी किया करेें ताकि गृहणी प्रसन्न रहे।
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आज की कथा के मुख्य यजमान रामगोपाल गोयल थे। संचालन जुगल किशोर तिवारी ने किया। इस अवसर पर स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, आचार्य शांतनु, परमेश्वर, महेश चंद्र चतुर्वेदी, प्रदीप तिवारी, शैलतनया, संत प्रसाद पांडेय आदि उपस्थित रहे।
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गुरु अगस्त्य से मुलाकात, सीता हरण, जटायु का रावण से युद्ध करना, जटायु का अंतिम संस्कार, शबरी के आश्रम पहुंचना आदि प्रसंगों की कथा विस्तार से सुनाई। कहा, रामकथा अहंकार का नाश करने वाली है। भगवान राम की विनम्रता सबका मनमोहती है। वहीं भरत जैसा चरित्र अतुलनीय है। भरत धर्म का पर्याय और आदर्श स्वरूप हैं।
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कथा का विस्तार देते हुए कहा कि राम ने शबरी के जूठे बेर प्रेम से खाए और कहा इतने सुंदर बेर उन्होंने अभी तक नहीं चखे थे। उन्होंने उपस्थित लोगों से आग्रह किया कि आन अपने घरों में प्रेम से भोजन ग्रहण करें और सराहना भी किया करेें ताकि गृहणी प्रसन्न रहे।
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आज की कथा के मुख्य यजमान रामगोपाल गोयल थे। संचालन जुगल किशोर तिवारी ने किया। इस अवसर पर स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, आचार्य शांतनु, परमेश्वर, महेश चंद्र चतुर्वेदी, प्रदीप तिवारी, शैलतनया, संत प्रसाद पांडेय आदि उपस्थित रहे।