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शिक्षामित्रों का सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 08 Sep 2017 01:34 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए शिक्षामित्र एक बार फिर आंदोलित हो गए हैं। बृहस्पतिवार को संयुक्त शिक्षामित्र संघर्ष समिति के नेतृत्व में शिक्षामित्रों ने ममफोर्डगंज स्थित सर्व शिक्षा अभियान कार्यालय पर धरना दिया। इसके बाद अर्द्धनग्न होकर जुलूस निकाला और डीएम कार्यालय पर प्रदर्शन किया। यहां मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया।
25 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट से समायोजन रदद् होने और उसके बाद सरकार द्वारा 10 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय का फैसला शिक्षामित्रों को रास नहीं आ रहा है। न्यायालय का आदेश आने केबाद से ही शिक्षामित्र विद्यालय नहीं जा रहे हैं। इसकी वजह से पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इस बीच 10 हजार रुपये मानदेय को अस्वीकार करते हुए शिक्षामित्र एक बार फिर आंदोलन की राह पर हैं। बृहस्पतिवार को सर्व शिक्षा अभियान कार्यालय पर बड़ी संख्या में शिक्षामित्र जुटे। इसमें महिलाएं भी शामिल हुईं और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।
इस मौके पर हुई सभा में कहा गया कि पिछले दिनों लखनऊ में प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया था कि शिक्षामित्रों के मांग पर ही विचार किया जाएगा, जिसमें समान कार्य समान वेतन की मांग प्रमुख थी। सीएम ने इस पर सहमति भी जताई थी किंतु सरकार ने बिना संगठनों से बातचीत किए 10 हजार रुपये मानदेय का प्रस्ताव पास कर दिया। यह सरकार की वादाखिलाफी है। धरने का नेतृत्व जिलाध्यक्ष अश्वनी त्रिपाठी एवं वसीम अहमद तथा संचालन जनार्दन पांडेय ने किया। धरने अरुण पटेल, अरुण कुमार सिंह, शारदा शुक्ला, मोहम्मद अख्तर, सुनील तिवारी, राजेश गौतम, विवेक मिश्र, कमलाकर सिंह, शिवपूजन सिंह, नागेंद्र मोहन, विनय सिंह, संतोष यादव, वंदना सरोज, सुनीता मिश्रा आदि शामिल थीं।
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25 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट से समायोजन रदद् होने और उसके बाद सरकार द्वारा 10 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय का फैसला शिक्षामित्रों को रास नहीं आ रहा है। न्यायालय का आदेश आने केबाद से ही शिक्षामित्र विद्यालय नहीं जा रहे हैं। इसकी वजह से पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इस बीच 10 हजार रुपये मानदेय को अस्वीकार करते हुए शिक्षामित्र एक बार फिर आंदोलन की राह पर हैं। बृहस्पतिवार को सर्व शिक्षा अभियान कार्यालय पर बड़ी संख्या में शिक्षामित्र जुटे। इसमें महिलाएं भी शामिल हुईं और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।
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इस मौके पर हुई सभा में कहा गया कि पिछले दिनों लखनऊ में प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया था कि शिक्षामित्रों के मांग पर ही विचार किया जाएगा, जिसमें समान कार्य समान वेतन की मांग प्रमुख थी। सीएम ने इस पर सहमति भी जताई थी किंतु सरकार ने बिना संगठनों से बातचीत किए 10 हजार रुपये मानदेय का प्रस्ताव पास कर दिया। यह सरकार की वादाखिलाफी है। धरने का नेतृत्व जिलाध्यक्ष अश्वनी त्रिपाठी एवं वसीम अहमद तथा संचालन जनार्दन पांडेय ने किया। धरने अरुण पटेल, अरुण कुमार सिंह, शारदा शुक्ला, मोहम्मद अख्तर, सुनील तिवारी, राजेश गौतम, विवेक मिश्र, कमलाकर सिंह, शिवपूजन सिंह, नागेंद्र मोहन, विनय सिंह, संतोष यादव, वंदना सरोज, सुनीता मिश्रा आदि शामिल थीं।
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