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खाद्य तेलों तक पहुंची मौसम की मार

Thu, 14 May 2015 02:49 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला इलाहाबाद
ब्यूरो/ अमर उजाला इलाहाबाद Updated Thu, 14 May 2015 02:49 AM IST
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इलाहाबाद। बेमौसम की बरसात ने सिर्फ गेहूं, चना और अरहर की फसल ही नहीं चौपट की। तिलहन फसलें भी खेतों में पसर गईं। यह नुकसान इलाहाबाद से लेकर बांदा, फतेहपुर, रीवा, सतना के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक बताया जा रहा है। मौसम साफ हुआ तो इसका असर घर-घर पहुंचने लगा है। तिलहनी फसलों को हुए नुकसान के कारण सरसों तेल की कीमतों ने तेजी का रुख पकड़ लिया है। अभी थोक में 100 रुपये प्रति किग्रा तक तेल के दाम पहुंच चुके हैं। आशंका है कि  बारिश और उसके बाद कीमतें ऐसी हो सकती हैं जिससे आम लोगों को सब्जी बनाना मुश्किल हो सकता है।
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होली के आसपास थोक बाजार में सरसों तेल के दाम 1200 से 1300 रुपये प्रति टिन (15 किग्रा) के आसपास थे। अब 1500 रुपये टिन तक दाम पहुंच गए हैं। पिछले 15 दिनों में 100 रुपये प्रति टिन की तेजी आई है। सोयाबीन रिफाइंड ऑयल के दाम में भी 60 रुपये प्रति टिन की बढ़ोतरी हुई है। फार्च्यून के सोयाबीन रिफाइंड 1160 रुपये तक पहुंच गए हैं। एक लीटर पाउच वाली पेटी (12 पाउच) की कीमतों में 80 रुपये तेजी है।
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वनस्पति में तेल जैसी तेजी नहीं है लेकिन 25 रुपये प्रति टिन दाम इसके भी बढ़े हैं। आढ़तियों को आशंका है कि जून तक प्रति टिन 50 रुपये की तेजी और भी आ सकती है। स्थानीय बाजार में इन दिनों आगरा, अलीगढ़, हाथरस, राजस्थान और मध्य प्रदेश से सरसों तेल की आवक हो रही है। गल्ला तिलहन व्यापार मंडल के अध्यक्ष सतीश केसरवानी का कहना है कि बेमौसम बारिश के कारण हुए नुकसान में पार्टियों का फोकस केवल गेहूं तक रहा लेकिन सरसों की फसल भी चौपट हो चुकी है।
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शहर के कीडगंज, मुट्ठीगंज, बहादुरगंज क्षेत्र में बड़ी संख्या में तेल मिलें हैं। इनके संचालक स्थानीय स्तर पर सरसों और अलसी की खरीदारी करते हैं। मिल मालिक कहते हैं कि बारिश के कारण फसलों को भारी नुकसान हुआ है। इससे कच्चा माल नहीं मिल रहा है। पश्चिमी यूपी से सरसों खरीदकर पेराई करने में नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसे में मिलों को बंद करना ही एकमात्र रास्ता बचा है।
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