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एडगर दान को हाईकोर्ट से राहत : बने रहेंगे बिशप, कोर्ट ने खारिज की पीटर बलदेव की याचिका

Fri, 17 May 2024 01:48 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 17 May 2024 01:48 PM IST
सार

चर्चेज ऑफ नार्थ इंडिया (सीएनआई) एवं बिशप मॉरिस एडगर दान के अधिवक्ता ओंकार नाथ मिश्र एवं अंबिकेश्वर मिश्र को सुनने के बाद सिविल जज ने कहा, ऐसे मामलों में सिविल न्यायालय से राहत नहीं प्राप्त की जा सकती, क्योंकि यह कानूनी रूप से प्रतिबंधित है।

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Edgar Dan gets relief from High Court: Will remain bishop, court rejects Peter Baldev's petition
अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पीटर बलदेव को बिशप पद से बर्खास्त किए जाने के विरुद्ध प्रस्तुत मुकदमे को अदालत ने खारिज कर दिया है। ऐसे में मॉरिस एडगर दान बिशप पद पर बने रहेंगे। पीटर बलदेव की बर्खास्ती के बाद मॉरिस एडगर दान को बिशप पद पर बहाल किया गया था।

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चर्चेज ऑफ नार्थ इंडिया (सीएनआई) एवं बिशप मॉरिस एडगर दान के अधिवक्ता ओंकार नाथ मिश्र एवं अंबिकेश्वर मिश्र को सुनने के बाद सिविल जज ने कहा, ऐसे मामलों में सिविल न्यायालय से राहत नहीं प्राप्त की जा सकती, क्योंकि यह कानूनी रूप से प्रतिबंधित है।
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बता दें, पीटर बलदेव को बिशप पद से बर्खास्त कर दिया गया था। इसके विरुद्ध उन्होंने सिविल जज के समक्ष मुकदमा दायर किया, जिसमें यथास्थिति बनाए रखने का आदेश हुआ। पीटर बलदेव पांच अगस्त 2015 को चर्चेज ऑफ नार्थ इंडिया के चुनाव में पूरे 20 मत पाकर बिशप चुने गए थे, लेकिन भ्रष्टाचार के मामले में वर्ष 2022 में उन्हें जेल जाना पड़ा था।
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हाईकोर्ट ने 20 फरवरी 2023 को पीटर बलदेव को जमानत दे दी थी। रिहा होने के दिन ही सीएनआई की ओर से सुनवाई का मौका दिए बगैर पीटर बलदेव को बिशप पद से बर्खास्त कर मॉरिस एडगर दान को बिशप बनाया गया। इस आदेश के विरुद्ध पीटर बलदेव ने सिविल जज वरिष्ठ श्रेणी के समक्ष वाद दाखिल किया था।


कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। इसके विरुद्ध विपक्षी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करके सिविल जज के स्टे आर्डर को निरस्त करने की याचना की। हाईकोर्ट के आदेश के विरुद्ध पीटर बलदेव ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने प्रार्थना पत्र निस्तारित किए जाने का आदेश दिया। इसी क्रम में सिविल न्यायालय ने पीटर बलदेव की ओर से दायर मुकदमे में दोनों पक्षों को सुनने के बाद मुकदमा खारिज कर दिया।

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