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बाजार में इको फ्रेंडली मूर्तियों की बहार
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Tue, 17 Oct 2017 01:33 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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दिवाली पर इस बार अधिकांश घरों में इको फ्रेंडली लक्ष्मी-गणेश ही पूजे जाएंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि डोकलाम विवाद के चलते चार महीने लगातार चीनी उत्पादों के बहिष्कार अभियान का असर बाजार तक पहुंच गया है। दिवाली के बाजार में इस बार जहां चाइनीज पटाखे गायब हो गए हैं तो वहीं बाजार में इको फ्रेंडली मूर्तियों की भी इस बार खासी मांग है। शहर के तमाम मोहल्लों में मूर्तियों की दुकानें सज चुकी है। ज्यादातर दुकानों में प्लास्टर ऑफ पेरिस की बजाय मिट्टी से बनी मूर्तियां ही दिखाई दे रही हैं। हालांकि पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार मूर्तियों के दाम में भी खासी वृद्धि देखने को मिली है।
अमूमन दिवाली का बाजार प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) की छोटी-बड़ी मूर्तियों से पटा रहता है। लंबे समय से जन जागरूकता अभियान भी चल रहा है कि पीओपी से निर्मित मूर्तियां पर्यावरण के अनुकूल नहीं है। बाजार कोलकाता, बिहार, वाराणसी आदि स्थानों से आई मिट्टी की मूर्तियों से महक रहा है। अधिकांश दुकानों में लक्ष्मी, गणेश, शिव, सरस्वती, कुबेर एवं हनुमान जी आदि की इको फ्रेंडली मूर्तियां ही उपलब्ध है। चौक, जीरोरोड, साउथ मलाका, बहादुरगंज, रामभवन, विवेकानंद मार्ग, कटरा, तेलियरगंज, अल्लापुर, राजरूपुपुर, मुट्टीगंज, कीडगंज, हिम्मतगंज, प्रीतम नगर, धूमनगंज, तुलारामबाग, गोविंदपुर, कटघर, बलुआघाट, मीरापुर आदि इलाकों में मूर्तियों की दुकानें भी सज गई है। अधिकांश दुकानों में चार से 18 इंच तक की मूर्तियां उपलब्ध है। इनके दाम सौ रुपये से लेकर दो हजार रुपये तक के हैं। हालांकि दुकानदारों ने पीओपी की भी मूर्तियां साथ में रखी है। उनका कहना है कि इसकी फिनिशिंग मिट्टी की मूर्तियों से बेहतर रहती है। राजरूपपुर में मूर्ति की दुकान लगाने वाले राजीव श्रीवास्तव ने बताया कि मांग के मुताबिक मिट्टी की मूर्तियों नहीं मिल सकी है। इसलिए मिट्टी की मूर्तियों के साथ पीओपी से निर्मित मूर्तियां भी रखनी पड़ी है।
चौक में मूर्ति विक्रेता मनोज प्रजापति ने बताया कि इस बार मूर्तियों के दाम बढ़ गए हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि सरकार ने मूर्तियों पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगा दिया है। इस बारे में कैट इलाहाबाद के महेंद्र गोयल का कहना है कि सरकार ने हैंड मेड आइटमों पर जीएसटी नहीं लगाया है। हालांकि अब अधिकांश मूर्तियां हैंडमेड नहीं है। इसी वजह से उसकी जीएसटी लगाया गया होगा।
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अमूमन दिवाली का बाजार प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) की छोटी-बड़ी मूर्तियों से पटा रहता है। लंबे समय से जन जागरूकता अभियान भी चल रहा है कि पीओपी से निर्मित मूर्तियां पर्यावरण के अनुकूल नहीं है। बाजार कोलकाता, बिहार, वाराणसी आदि स्थानों से आई मिट्टी की मूर्तियों से महक रहा है। अधिकांश दुकानों में लक्ष्मी, गणेश, शिव, सरस्वती, कुबेर एवं हनुमान जी आदि की इको फ्रेंडली मूर्तियां ही उपलब्ध है। चौक, जीरोरोड, साउथ मलाका, बहादुरगंज, रामभवन, विवेकानंद मार्ग, कटरा, तेलियरगंज, अल्लापुर, राजरूपुपुर, मुट्टीगंज, कीडगंज, हिम्मतगंज, प्रीतम नगर, धूमनगंज, तुलारामबाग, गोविंदपुर, कटघर, बलुआघाट, मीरापुर आदि इलाकों में मूर्तियों की दुकानें भी सज गई है। अधिकांश दुकानों में चार से 18 इंच तक की मूर्तियां उपलब्ध है। इनके दाम सौ रुपये से लेकर दो हजार रुपये तक के हैं। हालांकि दुकानदारों ने पीओपी की भी मूर्तियां साथ में रखी है। उनका कहना है कि इसकी फिनिशिंग मिट्टी की मूर्तियों से बेहतर रहती है। राजरूपपुर में मूर्ति की दुकान लगाने वाले राजीव श्रीवास्तव ने बताया कि मांग के मुताबिक मिट्टी की मूर्तियों नहीं मिल सकी है। इसलिए मिट्टी की मूर्तियों के साथ पीओपी से निर्मित मूर्तियां भी रखनी पड़ी है।
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चौक में मूर्ति विक्रेता मनोज प्रजापति ने बताया कि इस बार मूर्तियों के दाम बढ़ गए हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि सरकार ने मूर्तियों पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगा दिया है। इस बारे में कैट इलाहाबाद के महेंद्र गोयल का कहना है कि सरकार ने हैंड मेड आइटमों पर जीएसटी नहीं लगाया है। हालांकि अब अधिकांश मूर्तियां हैंडमेड नहीं है। इसी वजह से उसकी जीएसटी लगाया गया होगा।
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