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सोलह दिन बाद फिर डोली संगम नगरी

Wed, 13 May 2015 12:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद Updated Wed, 13 May 2015 12:16 AM IST
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earthquake in allahabad
एक माह भी नहीं बीता और संगम नगरी को एक बार फिर तगड़ा झटका लगा। दफ्तरों में कुर्सियां हिलने लगीं, किचेन में रखे बर्तन खड़खड़ाने लगे और पांव कांपने लगे। 16 दिन पहले का अनुभव था, सो समझने में देर नहीं लगी कि यह भूकंप के झटके हैं। मंगलवार दोपहर 12.35 बजे भूकंप के पहले झटके के साथ ही अफरातफरी मच गई। अपार्टमेंट में रहने वाले बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग बदहवास होकर बाहर भागे। कई जगह भगदड़ मच गई। इससे सात साल की एक बच्ची और एक महिला बेहोश हो गई। अस्पतालों में तीमारदार मरीजों को कंधे पर लादकर दौड़े।
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कुछ स्कूलों में कक्षाएं चल रहीं थीं। अफरातफरी में बच्चों को स्कूल के मैदान पर इकट्ठा किया गया। अभिभावक अपने बच्चों को लेने के लिए स्कूल की तरफ भागे। कई दफ्तरों में मीटिंग चल रही थी। अफसर-कर्मचारी दफ्तर छोड़कर भागे। सड़क पर इतनी भीड़ लग गई कि जाम जैसे हालात हो गए। पूरी संगम नगरी डोल गई और इतना कुछ महज 10 से 30 सेकेंड के भीतर हो गया। पंद्रह मिनट के भीतर दोबारा लगे हल्के झटकों ने दहशत और बढ़ा दी। बाजारों में भी दुकानें खाली पड़ी रहीं और दुकानदार घंटों सड़क पर खड़े रहे। सड़क पर भीड़ इकट्ठा होने से कई जगह जाम जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई।
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भूकंप के लगातार झटकों ने लोगों को झकझोर कर रख दिया। हमेशा से इलाहाबादी यही सुनते रहे हैं कि भूकंप के लिहाज से इलाहाबाद सुरक्षित है लेकिन पिछले 16 दिनों में जो कुछ हुआ, उसने शहरियों को सोचने पर मजबूर कर दिया। पिछले माह 25 और 26 अप्रैल को आए भूकंप को लोग भूले भी नहीं थे कि 12 मई को एक और तगड़ा झटका आ गया। दोपहर का वक्त था, सो ज्यादातर लोग किसी न किसी काम से घर से बाहर थे। बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग घर में थे। झटका लगते ही अपार्टमेंट, बहुमंजिला इमारतों में स्थित दफ्तरों, शोरूम, दुकानों से लोग बाहर भागने लगा। भगदड़ को रोकने के लिए पुलिस ने मोर्चां संभाला और सिविल लाइंस में स्थित तमाम मॉल से लोगों को बाहर सुरक्षित निकालकर मॉल बंद करा दिए। पीवीआर में फिल्म के शो रोक दिए गए। सिनेमाघरों में भी दर्शकों को बाहर कर दिया गया। झटकों की दहशत से लोग घर छोड़कर खुले स्थान की ओर भागे। ऐेसे में कंपनी बाग सहित शहर के कई पार्कों में काफी भीड़ इकट्ठा हो गई।
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उधर, रेलवे और रोडवेज के कर्मचारियों को भी अलर्ट जारी कर दिया गया। बहुमंजिला वाले अस्पतालों की ऊपरी मंजिला से मरीजों को शिफ्ट किया गया। बैंकों में भी अफरातफरी का माहौल रहा। तमाम लोग एटीएम मशीन में कार्ड छोड़कर बाहर भागे। कई ने काउंटर पर चेक छोड़ दिए और कुछ देर बाद याद आने पर काउंटर पर लौटकर चेक कैश कराया। हालांकि पंद्रह मिनट के भीतर ही भूकंप के झटके दोबारा लगे। ऐसे में दहशत और बढ़ गई। अपार्टमेंट, दफ्तर छोड़ सड़क पर इकट्ठा लोग घंटों वापस नहीं गए। दफ्तरों में कामकाज लगभग ठप रहा। इस बीच संचार नेटवर्क ने भी साथ छोड़ दिया और लोग अपनों को हाल जानने के लिए परेशान रहे। दोपहर बाद घर लौटने के बाद लोग खाना-पीना भूलकर टीवी सेटों के सामने जमे रहे और टेलीफोन नेटवर्क बहाल होने पर एक-दूसरे का हालचाल पूछने के साथ सिर्फ भूकंप के बारे में बात करते रहे।
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