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दशहरे की चौकियों के लिए बदला दुलदुल जुलूस का वक्त
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 07 Oct 2016 02:02 AM IST
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शहर में अमन-चैन कायम रखने के मकसद से अंजुमन गुंचए कासिमिया ने पहल करते हुए 180 बरस के कदीमी दुलदुल के जुलूस का वक्त बदल दिया है। दशहरा-दुर्गापूजा और मुहर्रम की तारीखें साथ-साथ पड़ने पर ऐसा फैसला किया गया। अब सात मुहर्रम रविवार को निकलने वाला दुलदुल जुलूस सुबह पांच बजे इमामबाड़े से उठेगा और कदीमी रास्तों पर गश्त करते हुए रात आठ बजे चक, जीटी रोड खाली करते हुए जीरो रोड स्थित इमामबाड़ा वजीर अली पर पहुंचेगा।
जुलूस के लिए दो दुलदुल सजाए जाएंगे। इसमें से पहला पान दरीबा और दूसरा रानीमंडी में सजेगा जो एक ही वक्त पर निकलकर कदीमी रास्तों पर गश्त करता हुआ घर-घर जाएगा। बता दें, वर्ष 1836 में शाहगंज, पानदरीबा स्थित इमामबाड़ा मिर्जा सफदर बेग से इसकी शुरुआत हुई थी। इमामबाड़ा के संस्थापक के पांचवें वंशज और दुलदुल जुलूस के संयोजक मोहम्मद अली बेग ‘बाबर’, इमाम मिर्जा इकबाल हुसैन और अन्य सदस्यों ने यह फैसला लेकर गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल कायम की।
वहीं रानीमंडी से मातमी दस्तों का जंजीरी जुलूस रात नौ बजे के स्थान पर तीन बजे निकलेगा। जुलूस रानीमंडी बच्चा जी धर्मशाला, कोतवाली, लोकनाथ चौराहा, बहादुगंज होते हुए चक स्थित इमामबाड़ा वजीर हसन पहुंचेगा। अंजुमन के प्रवक्ता सैयद मुहम्मद अस्करी ने कहा रविवार, सात मुहर्रम को दुलदुल का जुलूस और दशहरे की चौकियां साथ निकलने के कारण लिया गया इमामबाड़े केबाबर और हुमांयू का फैसला काबिलेतारीफ है।
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मोहम्मद अली पार्क स्थित इमामबाड़ा दिलावर हुसैन से 11 अक्तूबर को निकलने वाले जुलजुनाह के जुलूस का वक्त भी बदला गया है। अब यह जुलूस रात आठ बजे के स्थान पर शाम पांच बजे ही निकाला जाएगा। जुलूस जीटी रोड, कोतवाली, चड्ढा रोड होते हुए रानीमंडी स्थित इमामबाड़ा नवाब आगा महमूद पहुंचेगा। इससे पहले इमामबाड़े में मजलिस होगी। संयोजक रजी अस्करी के मुताबिक अंजुमन अब्बासिया, रानीमंडी जुलूस को नौहाख्वानी और सीनाजनी करते हुए रात आठ बजे से पहले कोतवाली के पीछे पहुंचाएगा। यहां से अंजुमन मोहाफिजे अजा जुड़ेगी। दोनों अंजुमनें गमगीन माहौल में नौहाख्वानी, सीनाजनी करते हुए जुलूस को इमामबाड़ा आगा महमूद पहुंचाएंगी।
गुलामाने पंजतन एकता कमेटी की ओर से मुहर्रम और दशहरे की तारीखें साथ-साथ पड़ने से अबकी करेली इमामबाड़े से मेहंदी का जुलूस नहीं निकाला जाएगा। मुख्य ताजिएदार मोहम्मद कमरुद्दीन ने इस आशय का प्रस्ताव पेश किया। अध्यक्ष जावेद अख्तर अंसारी ने कहा, मेहंदी को सजाकर इमामबाड़े पर रखा जाएगा ताकि अकीदतमंद जियारत करने के साथ ही फातिहा पढ़ सकें।
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जुलूस के लिए दो दुलदुल सजाए जाएंगे। इसमें से पहला पान दरीबा और दूसरा रानीमंडी में सजेगा जो एक ही वक्त पर निकलकर कदीमी रास्तों पर गश्त करता हुआ घर-घर जाएगा। बता दें, वर्ष 1836 में शाहगंज, पानदरीबा स्थित इमामबाड़ा मिर्जा सफदर बेग से इसकी शुरुआत हुई थी। इमामबाड़ा के संस्थापक के पांचवें वंशज और दुलदुल जुलूस के संयोजक मोहम्मद अली बेग ‘बाबर’, इमाम मिर्जा इकबाल हुसैन और अन्य सदस्यों ने यह फैसला लेकर गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल कायम की।
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वहीं रानीमंडी से मातमी दस्तों का जंजीरी जुलूस रात नौ बजे के स्थान पर तीन बजे निकलेगा। जुलूस रानीमंडी बच्चा जी धर्मशाला, कोतवाली, लोकनाथ चौराहा, बहादुगंज होते हुए चक स्थित इमामबाड़ा वजीर हसन पहुंचेगा। अंजुमन के प्रवक्ता सैयद मुहम्मद अस्करी ने कहा रविवार, सात मुहर्रम को दुलदुल का जुलूस और दशहरे की चौकियां साथ निकलने के कारण लिया गया इमामबाड़े केबाबर और हुमांयू का फैसला काबिलेतारीफ है।
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मोहम्मद अली पार्क स्थित इमामबाड़ा दिलावर हुसैन से 11 अक्तूबर को निकलने वाले जुलजुनाह के जुलूस का वक्त भी बदला गया है। अब यह जुलूस रात आठ बजे के स्थान पर शाम पांच बजे ही निकाला जाएगा। जुलूस जीटी रोड, कोतवाली, चड्ढा रोड होते हुए रानीमंडी स्थित इमामबाड़ा नवाब आगा महमूद पहुंचेगा। इससे पहले इमामबाड़े में मजलिस होगी। संयोजक रजी अस्करी के मुताबिक अंजुमन अब्बासिया, रानीमंडी जुलूस को नौहाख्वानी और सीनाजनी करते हुए रात आठ बजे से पहले कोतवाली के पीछे पहुंचाएगा। यहां से अंजुमन मोहाफिजे अजा जुड़ेगी। दोनों अंजुमनें गमगीन माहौल में नौहाख्वानी, सीनाजनी करते हुए जुलूस को इमामबाड़ा आगा महमूद पहुंचाएंगी।
गुलामाने पंजतन एकता कमेटी की ओर से मुहर्रम और दशहरे की तारीखें साथ-साथ पड़ने से अबकी करेली इमामबाड़े से मेहंदी का जुलूस नहीं निकाला जाएगा। मुख्य ताजिएदार मोहम्मद कमरुद्दीन ने इस आशय का प्रस्ताव पेश किया। अध्यक्ष जावेद अख्तर अंसारी ने कहा, मेहंदी को सजाकर इमामबाड़े पर रखा जाएगा ताकि अकीदतमंद जियारत करने के साथ ही फातिहा पढ़ सकें।