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पानी के लिए जाना पड़ा जेल, लौटने पर दलित की सदमे से मौत

Tue, 23 May 2017 01:54 AM IST
इलाहाबाद
इलाहाबाद Updated Tue, 23 May 2017 01:54 AM IST
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Due to the death of the dalit, the death to go to water
allahabad
आजादी के 70 साल बाद जब सरकारें विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही हैं तब शहर से मात्र 50 किलोमीटर दूर डेराबारी गांव के दलित कुंजन लाल (50) को पानी के लिए जेल जाना पड़ता है। उसका कसूर सिर्फ इतना था कि उसने वन विभाग के खदान (गड्ढों) से पानी ले लिया था। ऐसा करना सरकारी अफसरों को नागवार गुजरा और उस पर दर्ज करा दिया लकड़ी चोरी का मुकदमा। कुंजन जेल चला गया और लौटा तो सदमे में प्राण त्याग दिए।
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कुंदन के बेटे सुभाष चंद्र ने बताया कि उनके पिता कुंजनलाल और पुरुषोत्तम यादव के खिलाफ तीन महीने पहले वन विभाग ने मुकदमा दर्ज कराकर गैर जमानती वारंट जारी करा दिया था। यह जानकारी पिछले सप्ताह थाना लालापुर से आए दीवान ने दी। कहा कि वह अदालत से जमानत करा लें। 16 मई को कुंजनलाल गांव के ही पुरुषोत्तम यादव के साथ इलाहाबाद में न्यायिक मजिस्ट्रेट के यहां हाजिर हुए। गैर जमानती वारंट होने के कारण अदालत ने उन्हें जेल भेज दिया। अगले दिन जमानत पर दोनों गांव आएं। जेल जाने से कुंजन गहरे सदमे में थे। उनकी हालत बिगड़ी और अस्पताल ले जाते समय रास्ते में उनकी मौत हो गई।
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करीब दो हजार की आबादी वाले इस गांव में जल स्तर गिरने के कारण सरकारी हैंडपंप बेदम हो गए हैं। करीब आधा दर्जन लोगों ने अपने निजी हैंडपंप लगा लिए हैं। गरीब और पिछड़े तबके के लोगों को यहां पानी नहीं भरने दिया जाता। कई साल से यहां के करीब तीन सौ परिवार पीने के पानी के लिए दर-दर भटकते हैं। ये परिवार आसपास की नहर और वन विभाग के खदान (गड्ढों ) में भरे हुए पानी पर ही आश्रित रहते हैं। जरूरत के अनुसार इस पानी को उबालकर पी रहे हैं।
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सरकारी तौर पर खदानों से पानी लेने पर वन विभाग की ओर से कोई रोक नहीं है लेकिन वन कर्मी उनको पानी भरने नहीं देते। ग्रामीणों का आरोप है कि इस पानी की एवज में वह महीनेदारी मांगते हैं। उन्हें हर महीने पानी के बदले कुछ रुपये न दें तो लकड़ी चोरी की रिपोर्ट दर्ज करा दी जाती है। तीन महीने पहले गांव के पुरुषोत्तम यादव और कुंजन के साथ भी ऐसा ही हुआ।

अफसरों का आश्वासन भी नहीं आया काम
23 फरवरी को पीने के पानी की मांग और वन विभाग के उत्पीड़न के खिलाफ ग्रामीणों ने विधानसभा चुनाव में मतदान का बहिष्कार भी किया था। उस दिन करीब तीन घंटे बाद एसडीएम, बीडीओ तथा अन्य अधिकारी ग्रामीणों के पास आए और मांग पूरी करने का आश्वासन दिया था। उसी के बाद वहां के लोगों ने मतदान किया। लेकिन तीन महीने बाद भी उनकी समस्या जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों का उत्पीड़न हो रहा है और आज  कुंजन लाल की सदमे से मौत हो गई।

 
‘वन विभाग की ओर से खदान से पानी लेने पर कोई रोक नहीं है। कुंजनलाल और पुरुषोत्तम यादव के खिलाफ कब वारंट जारी हुआ, यह संज्ञान में नहीं है। क्षेत्रीय वन अधिकारी से इस बारे में जानकारी की जा रही है।’ मनोज खरे, जिला वन अधिकारी, इलाहाबाद
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