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दुआ है मौत को दांव दे दें दूधनाथ
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 06 Jan 2018 01:53 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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जिस तरह अमर पक्षी ‘फीनिक्स’ अपने ही राख से पुनर्जन्म ले लेता है, उसी जिजीविषा से फिर उठ खड़े होने की उम्मीद के साथ वरिष्ठ कथाकार दूधनाथ सिंह को उनके पुत्रवत शिष्य सुधीर सिंह ने बृहस्पतिवार की रात कर्नलगंज स्थित ‘फीनिक्स’ अस्पताल में भर्ती कराया लेकिन शुक्रवार को भी उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। पहले बृहस्पतिवार को उनकी डायलिसिस की गई और फिर शुक्रवार की रात में भी डायलिसिस हुई। तीसरी बार शनिवार को भी डायलिसिस होगी। उनका इलाज कर रहे डॉ.अरविंद गुप्ता का कहना है कि हर डायलिसिस से तकरीबन तीन एमजी तक सुधार होता है, ऐसे में तीन बार डायलिसिस के बाद रविवार को दोबारा किडनी की जांच कराई जाएगी। शुक्रवार को उनका हीमोग्लोबीन घटकर सात तक पहुंच गया तो एसएफआई के प्रदेश सचिव विकास स्वरूप ने एक यूनिट रक्तदान किया।
बीते तकरीबन एक वर्ष पहले जब वह प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित हुए तो उनकी सक्रियता धीरे-धीरे कम होती गई। दरअसल पत्नी निर्मला ठाकुर के 20 नवंबर 2014 को इस दुनिया से विदा होने के बाद वह काफी अकेले हो गए थे। आकाशवाणी में सहायक केंद्र निदेशक पद से रिटायर निर्मला जी की किडनी ने भी काम करना बंद कर दिया था। एक दशक से वह आर्थराइटिस से भी पीड़ित थीं। उनके जाने के बाद से दूधनाथ जी कभी बेटी, कभी बेटे के पास कुछ-कुछ दिनों तक रुके, रहे लेकिन उनकी मन इलाहाबाद में ही अटका रहा। लिहाजा वह अपने झूंसी स्थित आवास पर आकर रहने और रचने लगे। तकरीबन तीन महीने पहले तक वह पूरी तरह से सक्रिय थे। अपनी जिदंादिली के साथ वह शहर के विभिन्न साहित्यिक समारोहों में शिद्दत के साथ उपस्थिति दर्ज कराते रहे लेकिन तकलीफ बढ़ी तो धीरे-धीरे अपने में सिमटते गए। तमाम मुसीबतों को उन्होंने मात दी है। विराट हिन्दी परिवार की शुभकामनाएं अब भी उनके साथ हैं। उनके तमाम शुभचिंतकों, करीबियों ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है।
दूधनाथ जी की स्थिति की खबर पाकर लखनऊ से बेटी अनुपमा ठाकुर बृहस्पतिवार को झूंसी स्थित घर पर उन्हें देखने आई थीं। तकरीबन तीन घंटे रुकने के बाद वह लखनऊ लौट गईं। शुक्रवार को कई कंपनियों के तकनीकी सलाहकार बड़े बेटे अनिमेष ठाकुर और दयाल सिंह कॉलेज में रीडर छोटे बेटे अंशुमान सिंह राजधानी से इलाहाबाद पहुंचे। इसके अतिरिक्त सुधीर सिंह, उनके भतीजे विवेक सिंह सहित कई अन्य शिष्य उनकी देखभाल में रातदिन जुटे हैं।
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प्रोस्टेट कैंसर की परेशानी पर जब उन्होंने लखनऊ जाकर जांच कराई तो डॉ.वीकेएस पंवार ने उनकी बॉयोप्सी की। तकरीबन नौ महीने उनका इलाज चला लेकिन मूत्ररोग की परेशानी में कोई खास सुधार नहीं हुआ। उन्होंने मेदांता में जाकर जांच कराई। तकरीबन पौने दो लाख खर्च करके तरह-तरह की जांच के बाद डॉक्टरों ने सलाह ऑपरेशन की सलाह दी। संशय और काफी खर्चीला ऑपरेशन होने पर उन्होंने मना कर दिया। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में जाकर जांच कराई। वहां डॉक्टरों ने ऑपरेशन के लिए तो साफ तौर पर मना किया लेकिन बढ़ते हार्मोन पर लगाम लगाने के लिए हार्मोनोलॉजी शुरू की, जहां बीस दिसंबर तक इलाज चला। उन्होंने एकदम खाना पीना बंद कर दिया। बीते चालीस दिनों के इलाज के बाद भी कोई सुधार नहीं हुआ। बल्कि तरह-तरह की दवाइयों का विपरीत असर हुआ। उनकी किडनी प्रभावित हुई।
लगातार आ रही मेडिकल रिपोर्टस से उनका मन खिन्न हुआ तो उन्होंने घर जाने की इच्छा व्यक्त की। बडे़ बेटे अनिमेष ठाकुर फ्लाइट से उन्हें लेकर इलाहाबाद आ गए। सुधीर सिंह हवाईअड्डे से उन दोनों को गाड़ी से लेकर झूंसी स्थित आवास ले आए। अगली सुबह अनिमेष गुड़गांव लौट गए। स्थिति लगातार बिगड़ती ही गई और बुधवार को वह कोमा में चले गए तो सुधीर और उनके भतीजे ने पड़ोस के ही डॉक्टर वरिष्ठ सर्जन डॉ.जेपी पांडेय से संपर्क किया। उन्होंने घर पर आकर ही ड्रिप लगाई। समय-समय पर ड्रिप बदलने और उन्हें देखने आते रहे। सुबह तक स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ तो डॉक्टर ने किडनी फंक्शनिंग टेस्ट (केएफटी) कराया जिसमें यह 14.5 के स्तर पर पाया गया। पैथलैब ने एक एसएमएस भेजकर फौरन डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी, जिस पर उन्हें आनन-फानन में रात तकरीबन नौ बजे फीनिक्स अस्पताल में लाकर आईसीयू में भर्ती कराया गया।
जीवन से जूझ रहे वरिष्ठ कथाकार दूधनाथ सिंह की स्थिति को लेकर देश भर के हिन्दी प्रेमी विशेषकर उनके अतिरिक्त साठोत्तरी के बाकी दोनों यार काशीनाथ सिंह और ज्ञानरंजन चिंतित हैं। रोज की तरह काशीनाथ सिंह ने शुक्रवार को भी उनका हालचाल पूछा। सुधीर से बोले, भइया (नामवर सिंह) मुझसे पूछते हैं कि दूधनाथ का क्या हालचाल है तो मैं तुमसे पूछता हूं। इसी तरह वरिष्ठ कथाकार ज्ञानरंजन, शेखर जोशी, राजेंद्र दानी आदि ने भी फोन से उनका हाल चाल पूछा। वहीं विभूति मिश्र, प्रो.अनीता गोपेश, हरीशचंद्र पांडे, डॉ.धनंजय चोपड़ा, अविनाश मिश्र, विवेक निराला सहित तमाम शिष्यों, करीबियों ने अस्पताल जाकर उनका हालचाल पूछा।
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बीते तकरीबन एक वर्ष पहले जब वह प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित हुए तो उनकी सक्रियता धीरे-धीरे कम होती गई। दरअसल पत्नी निर्मला ठाकुर के 20 नवंबर 2014 को इस दुनिया से विदा होने के बाद वह काफी अकेले हो गए थे। आकाशवाणी में सहायक केंद्र निदेशक पद से रिटायर निर्मला जी की किडनी ने भी काम करना बंद कर दिया था। एक दशक से वह आर्थराइटिस से भी पीड़ित थीं। उनके जाने के बाद से दूधनाथ जी कभी बेटी, कभी बेटे के पास कुछ-कुछ दिनों तक रुके, रहे लेकिन उनकी मन इलाहाबाद में ही अटका रहा। लिहाजा वह अपने झूंसी स्थित आवास पर आकर रहने और रचने लगे। तकरीबन तीन महीने पहले तक वह पूरी तरह से सक्रिय थे। अपनी जिदंादिली के साथ वह शहर के विभिन्न साहित्यिक समारोहों में शिद्दत के साथ उपस्थिति दर्ज कराते रहे लेकिन तकलीफ बढ़ी तो धीरे-धीरे अपने में सिमटते गए। तमाम मुसीबतों को उन्होंने मात दी है। विराट हिन्दी परिवार की शुभकामनाएं अब भी उनके साथ हैं। उनके तमाम शुभचिंतकों, करीबियों ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है।
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दूधनाथ जी की स्थिति की खबर पाकर लखनऊ से बेटी अनुपमा ठाकुर बृहस्पतिवार को झूंसी स्थित घर पर उन्हें देखने आई थीं। तकरीबन तीन घंटे रुकने के बाद वह लखनऊ लौट गईं। शुक्रवार को कई कंपनियों के तकनीकी सलाहकार बड़े बेटे अनिमेष ठाकुर और दयाल सिंह कॉलेज में रीडर छोटे बेटे अंशुमान सिंह राजधानी से इलाहाबाद पहुंचे। इसके अतिरिक्त सुधीर सिंह, उनके भतीजे विवेक सिंह सहित कई अन्य शिष्य उनकी देखभाल में रातदिन जुटे हैं।
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प्रोस्टेट कैंसर की परेशानी पर जब उन्होंने लखनऊ जाकर जांच कराई तो डॉ.वीकेएस पंवार ने उनकी बॉयोप्सी की। तकरीबन नौ महीने उनका इलाज चला लेकिन मूत्ररोग की परेशानी में कोई खास सुधार नहीं हुआ। उन्होंने मेदांता में जाकर जांच कराई। तकरीबन पौने दो लाख खर्च करके तरह-तरह की जांच के बाद डॉक्टरों ने सलाह ऑपरेशन की सलाह दी। संशय और काफी खर्चीला ऑपरेशन होने पर उन्होंने मना कर दिया। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में जाकर जांच कराई। वहां डॉक्टरों ने ऑपरेशन के लिए तो साफ तौर पर मना किया लेकिन बढ़ते हार्मोन पर लगाम लगाने के लिए हार्मोनोलॉजी शुरू की, जहां बीस दिसंबर तक इलाज चला। उन्होंने एकदम खाना पीना बंद कर दिया। बीते चालीस दिनों के इलाज के बाद भी कोई सुधार नहीं हुआ। बल्कि तरह-तरह की दवाइयों का विपरीत असर हुआ। उनकी किडनी प्रभावित हुई।
लगातार आ रही मेडिकल रिपोर्टस से उनका मन खिन्न हुआ तो उन्होंने घर जाने की इच्छा व्यक्त की। बडे़ बेटे अनिमेष ठाकुर फ्लाइट से उन्हें लेकर इलाहाबाद आ गए। सुधीर सिंह हवाईअड्डे से उन दोनों को गाड़ी से लेकर झूंसी स्थित आवास ले आए। अगली सुबह अनिमेष गुड़गांव लौट गए। स्थिति लगातार बिगड़ती ही गई और बुधवार को वह कोमा में चले गए तो सुधीर और उनके भतीजे ने पड़ोस के ही डॉक्टर वरिष्ठ सर्जन डॉ.जेपी पांडेय से संपर्क किया। उन्होंने घर पर आकर ही ड्रिप लगाई। समय-समय पर ड्रिप बदलने और उन्हें देखने आते रहे। सुबह तक स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ तो डॉक्टर ने किडनी फंक्शनिंग टेस्ट (केएफटी) कराया जिसमें यह 14.5 के स्तर पर पाया गया। पैथलैब ने एक एसएमएस भेजकर फौरन डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी, जिस पर उन्हें आनन-फानन में रात तकरीबन नौ बजे फीनिक्स अस्पताल में लाकर आईसीयू में भर्ती कराया गया।
जीवन से जूझ रहे वरिष्ठ कथाकार दूधनाथ सिंह की स्थिति को लेकर देश भर के हिन्दी प्रेमी विशेषकर उनके अतिरिक्त साठोत्तरी के बाकी दोनों यार काशीनाथ सिंह और ज्ञानरंजन चिंतित हैं। रोज की तरह काशीनाथ सिंह ने शुक्रवार को भी उनका हालचाल पूछा। सुधीर से बोले, भइया (नामवर सिंह) मुझसे पूछते हैं कि दूधनाथ का क्या हालचाल है तो मैं तुमसे पूछता हूं। इसी तरह वरिष्ठ कथाकार ज्ञानरंजन, शेखर जोशी, राजेंद्र दानी आदि ने भी फोन से उनका हाल चाल पूछा। वहीं विभूति मिश्र, प्रो.अनीता गोपेश, हरीशचंद्र पांडे, डॉ.धनंजय चोपड़ा, अविनाश मिश्र, विवेक निराला सहित तमाम शिष्यों, करीबियों ने अस्पताल जाकर उनका हालचाल पूछा।