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वेद शिक्षा ठीक, कर्मकांड नहीं कर सकते डॉ. फिरोज
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Dr. Firoj appointment in BHU
- फोटो : CITY DESK
अरुंधती वशिष्ठ अनुसंधान पीठ के निदेशक मानते हैं कि कर्मकांड के लिए बनना पड़ेगा हिंदू
प्रयागराज। बीएचयू के संस्कृत विभाग के डॉ. फिरोज खान की नियुक्ति पर उपजे विवाद पर अरुंधती वशिष्ठ अनुसंधान पीठ के निदेशक डॉ. चंद्रप्रकाश का नजरिया कुछ और ही है। उनका कहना है कि डॉ. फिरोज को वहां शिक्षा देने से कोई नहीं रोक सकता है। वह वहां संस्कृत पढ़ा सकते हैं। लेकिन, धर्म विज्ञान संकाय में शिक्षा देने के साथ तमाम कर्मकांड भी होते हैं। उसमें कोई मुस्लिम कैसे भाग ले सकता है?
विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष रहे स्व. अशोक सिंहल के आवास पर चल रहे अरुंधती वशिष्ठ अनुसंधान पीठ के निदेशक डॉ. चंद्र प्रकाश बताते हैं कि संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान में हर वर्ष श्रावणी उपक्रम होता है। इसमें सिर्फ हिंदू खासतौर से ब्राह्मण ही सम्मिलित हो सकते हैं। ऐसे में वहां मुस्लिम शिक्षक कैसे स्वीकार्य हो। कहा कि संबंधित विभाग में तीर्थ पुरोहित कैसे तैयार किए जाते हैं। उसके बारे में शिक्षा दी जाती है। इस दौरान तमाम तरह के कर्मकांड आदि भी करने पड़ते हैं। यह कार्य सिर्फ हिंदू ही कर सकते हैं। डॉ. फिरोज वहां सिर्फ छात्रों को पढ़ा सकते हैं। देश के तमाम ऐसे संस्थान हैं, जहां मुस्लिम संस्कृत तो हिंदू उर्दू पढ़ा रहे हैं। इसमें कहीं किसी को कोई ऐतराज नहीं है।
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प्रयागराज। बीएचयू के संस्कृत विभाग के डॉ. फिरोज खान की नियुक्ति पर उपजे विवाद पर अरुंधती वशिष्ठ अनुसंधान पीठ के निदेशक डॉ. चंद्रप्रकाश का नजरिया कुछ और ही है। उनका कहना है कि डॉ. फिरोज को वहां शिक्षा देने से कोई नहीं रोक सकता है। वह वहां संस्कृत पढ़ा सकते हैं। लेकिन, धर्म विज्ञान संकाय में शिक्षा देने के साथ तमाम कर्मकांड भी होते हैं। उसमें कोई मुस्लिम कैसे भाग ले सकता है?
विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष रहे स्व. अशोक सिंहल के आवास पर चल रहे अरुंधती वशिष्ठ अनुसंधान पीठ के निदेशक डॉ. चंद्र प्रकाश बताते हैं कि संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान में हर वर्ष श्रावणी उपक्रम होता है। इसमें सिर्फ हिंदू खासतौर से ब्राह्मण ही सम्मिलित हो सकते हैं। ऐसे में वहां मुस्लिम शिक्षक कैसे स्वीकार्य हो। कहा कि संबंधित विभाग में तीर्थ पुरोहित कैसे तैयार किए जाते हैं। उसके बारे में शिक्षा दी जाती है। इस दौरान तमाम तरह के कर्मकांड आदि भी करने पड़ते हैं। यह कार्य सिर्फ हिंदू ही कर सकते हैं। डॉ. फिरोज वहां सिर्फ छात्रों को पढ़ा सकते हैं। देश के तमाम ऐसे संस्थान हैं, जहां मुस्लिम संस्कृत तो हिंदू उर्दू पढ़ा रहे हैं। इसमें कहीं किसी को कोई ऐतराज नहीं है।
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