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धान में कंडवा रोग ओर खरीउद

Tue, 10 Dec 2019 02:21 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 10 Dec 2019 02:21 AM IST
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Double hit on farmers, Kandwa disease in paddy
प्रयागराज। धान की पैदावार में कंडवा रोग लगने से किसानों की मुसीबत बढ़ गई है। इससे फसल को तो भारी नुकसान हुआ ही, सरकारी क्रय केंद्रों पर अब ऐसे धान की खरीद भी नहीं हो रही है। इससे किसानों है दोहरी मार पड़ रही और वे बिचौलियों को धान बेचने के लिए मजबूर हैं।
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सरकारी क्रय केंद्रों पर बिक्री के लिए जरूरी है कि एक क्ंिवटल धान में न्यूनतम 67 किग्रा चावल मिले। इसके विपरीत हाइब्रिड धान में काफी कम चावल मिलता है। किसानों की तरफ से लगातार मुद्दा उठाए जाने के बाद सरकार ने हाइब्रिड धान पर तीन फीसदी की छूट दी है। यानी, एक क्ंिवटल धान में 64 किग्रा चावल मिलना चाहिए। हाइब्रिड धान में इतना चावल भी नहीं मिलता। ऐसे में कंडवा रोग की वजह से किसानाें की परेशानी और बढ़ गई है। कोरांव के रामसुख का कहना है कि इस बीमारी की वजह से धान की पैदावार पीली पड़ गई है, जिसे क्रय केंद्रों पर नहीं लिया जा रहा। नाराबारी के विजय सरन का कहना है कि इस विषय पर तहसील और ब्लाक में अफसरों से वार्ता की गई लेकिन कोई राहत नहीं मिली।
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40 फीसदी फसल बीमारी की चपेट में
अधिक बारिश और बाढ़ की वजह से इस बार धान की फसल में कंडवा रोग का प्रकोप रहा। इसकी वजह से धान की पैदावार पीली हो गई और उत्पादन पर बुरा असर पड़ा है। करीब 40 फीसदी धान का नुकसान हुआ है।
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मात्र 25 फीसदी हो पाई धान की खरीद
इस बार धान खरीद का लक्ष्य पूरा होता नहीं दिख रहा। जिले में दो लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए एक नवंबर से खरीद शुरू की गई लेकिन अभी तक मात्र 25 फीसदी ही लक्ष्य पूरा हुआ है। इसकी मुख्य वजह धान में कंडवा बीमारी का लगना है। बीमारी से ग्रस्त धान को क्रय केंद्रों पर नहीं लिया जा रहा है। इस बाबत किसानों के साथ खाद्य विभाग के अफसरों ने भी शासन को अवगत कराया है। उन्होंने कंडवा रोग से ग्रस्त धान की खरीद को लेकन भी मानक में छूट दिए जाने की मांग की है।

आसाम भेजी गई चावल
यहां से चावल अब दूसरे राज्यों और जनपद में भी भेजी जाएगी। इसकी शुरुआत भी हो चुकी है। भारतीय खाद्य निगम की ओर से दो रैक चावल (प्रति रैक करीब25 हजार क्ंिवटल) आसाम भेजी जा चुकी है। इसके अलावा दो रैक चावल बांदा भेजी गई है। इससे सरकार के स्तर पर धान खरीद लक्ष्य बढ़ने की उम्मीद है, साथ ही भंडारण की समस्या भी दूर होगी।
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