फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Double entry under the guise of " double game " , trapped officer

डबल इंट्री की आड़ में ‘डबल गेम’, फंसे अफसर

Fri, 18 Sep 2015 01:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Fri, 18 Sep 2015 01:47 AM IST
विज्ञापन
इलाहाबाद(ब्यूरो)। जमीन के विवाद में आम लोगों को अपने दफ्तर का चक्कर लगवाने और ऐसे ही विवाद की आड़ में प्रभावशाली लोगों को फायदा पहुंचाने वाले अफसर इस बार फंस गए हैं। लखनऊ में हुई आश्वासन समिति की बैठक में ऐसे अफसरों पर तथ्यों सहित जमकर निशाना साधा गया। इलाहाबाद के दो बड़े भूमि विवाद इस बैठक में छाये रहे। डीएम से लेकर प्रमुख सचिव आवास तक को इन विवादों पर जवाब देना पड़ा। हालांकि दोनों ही विवाद एक पूर्व डीएम की ओर से किए गए फैसले के कारण पैदा हुए। समिति के सभापति ने इन मामलों में अपना निर्णय सुरक्षित कर लिया है।
विज्ञापन


शहर के तेलियरगंज इलाके में स्थित फर्रुखाबाद कोल्ड स्टोरेज की जमीन पर चल रहे एक स्कूल को लेकर कई दशकों से विवाद चला आ रहा है। दरअसल, जमीन अधिग्रहीत कर कोल्ड स्टोरेज चलाने के लिए दी गई थी। बाद में राजकीय आस्थान की इस जमीन पर स्कूल का निर्माण करा लिया गया, जिसे सरकारी अभिलेखों में अवैध माना गया। इस जमीन को डबल इंट्री के तहत नजूल के अभिलेखों में भी दर्ज कर लिया गया। इस साल पूर्व डीएम भवनाथ सिंह ने एक आदेश के तहत इस जमीन को संक्रमणीय भूमिधर घोषित कर दिया और जमीन स्कूल के नाम दर्ज हो गई। जमीन सरकार की तरफ से उपलब्ध कराई गई थी।
विज्ञापन


तत्कालीन गवर्नर की ओर से जारी नोटिफिकेशन के तहत इसे आवंटित किया गया था। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि सरकारी जमीन को संक्रमणीय भूमिधरी घोषित कर स्कूल को उसे मुफ्त में उपलब्ध कराए जाने से सरकार को भूमि के मूल्य का जो नुकसान हुआ, वह किसके खाते में जाएगा। इसी तरह कटरा में माधव कुंज ग्रुप हाउसिंग की जमीन को भी प्रमुख सचिव आवास पंधारी यादव की ओर से जारी एक आदेश के तहत पूर्व डीएम भवनाथ सिंह ने डबल इंट्री के तहत नजूल के अभिलेख में दर्ज करने का आदेश जारी कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसी आदेश की आड़ में माधव कुंज ग्रुप हाउसिंगका नक्शा स्वीकृत कराने के लिए एडीए में आवेदन किया गया और एडीए ने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए डिमांड नोट भी काट दिया जबकि आश्वासन समिति ने स्पष्ट निर्देश दे रखे थे कि डबल इंट्री के मामलों में समिति जब तक कोई निर्णय नहीं लेती है, तब तक डबल इंट्री की जमीन पर न तो कोई निर्माण होगा और न ही नक्शा पास किया जाएगा। यहां तक कि ऐसी जमीन की खरीद-फरोख्त भी नहीं होगी। पूर्व डीएम के ये दो आदेश प्रशासन के गले की फांस बन गए हैं।


सूत्रोें के मुताबिक लखनऊ में हुई आश्वासन समिति की बैठक में समिति के सदस्य अनुग्रह नारायण सिंह और अन्य सदस्यों ने इन दोनों मामलों में प्रशासन एवं शासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए नाराजगी जताई। डीएम से लेकर प्रमुख सचिव आवास तक से मामले में सवाल-जवाब किया गया। सदस्यों ने कहा कि एक तरफ गरीबों को सिर छिपाने के लिए जगह नहीं मिल रही है, वहीं दूसरी ओर प्रभावशाली लोगों को सरकारी जमीन मुफ्त में उपलब्ध कराई जा रही है। बैठक में शामिल हुए डीएम कौशल राज शर्मा का कहना है कि समिति के सभापति ने आश्वासनों पर अपना निर्णय सुरक्षित कर लिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed