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Doctor Death Case : फॉरेंसिक एक्सपर्ट के पैनल की जगह आर्थो व प्लेन एमबीबीएस से करा दिया पोस्टमार्टम

Thu, 10 Oct 2024 12:57 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 10 Oct 2024 12:57 PM IST
सार

पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने मामला उलझा दिया। इसमें मौत का कारण ‘दम घुटना’ आया है। इसी आधार पर बहन अदिति ने हत्या का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया। सूत्रों का कहना है कि फिलहाल अब तक कि जांच में पुलिस के हाथ कोई ऐसा साक्ष्य नहीं लगा है, जिसके आधार पर कोई निष्कर्ष निकाला जा सके।

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Doctor Death Case: Post mortem was done by Ortho and Plain MBBS instead of forensic expert panel.
डॉ. कार्तिकेय श्रीवास्तव। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टर कार्तिकेय श्रीवास्तव की संदिग्ध हाल में मौत के मामले में बड़ी लापरवाही सामने आई है। कहा जा रहा है कि इतने गंभीर प्रकरण में पोस्टमार्टम फॉरेंसिक एक्सपर्ट के पैनल से कराया जाना चाहिए। इसकी जगह आर्थो व प्लेन एमबीबीएस से पोस्टमार्टम करा दिया गया। उधर, सीएमओ ने लापरवाही के आरोप को गलत बताया। दरअसल, मौके पर डॉक्टर की गाड़ी से मिले वैक्यूरियम ब्रोमाइड दवा के इंजेक्शन से प्रथमदृष्टया यही अनुमान लगाया गया था कि उन्होंने खुदकुशी की। परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस अफसरों ने यह आशंका जताई थी।

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हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने मामला उलझा दिया। इसमें मौत का कारण ‘दम घुटना’ आया है। इसी आधार पर बहन अदिति ने हत्या का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया। सूत्रों का कहना है कि फिलहाल अब तक कि जांच में पुलिस के हाथ कोई ऐसा साक्ष्य नहीं लगा है, जिसके आधार पर कोई निष्कर्ष निकाला जा सके। उधर डॉक्टरों के बीच इस बात की भी चर्चा है कि पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के दौरान लापरवाही बरती गई।
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दरअसल, पूर्व में एम्स के एक डॉक्टर द्वारा वैक्यूरियम दवा के इंजेक्शन लगाकर खुदकुशी करने की बात सामने आ चुकी है। डॉक्टर कार्तिकेय के मामले में यह भी कहा जा रहा है कि चौकी प्रभारी ने शव मोर्चरी भेजते समय फोरेंसिक एक्सपर्ट के पैनल से पोस्टमार्टम कराए जाने का सुझाव दिया था।
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इसका ध्यान नहीं रखा गया और जिस पैनल से पोस्टमार्टम कराया गया, उसमें सिर्फ एक फॉरेंसिक एक्सपर्ट रखा गया, जो मोर्चरी में रूटीन में रहता है और वहां का नोडल भी है।यही नहीं पैनल में एक आर्थो का डॉक्टर व दूसरा प्लेन एमबीबीएस शामिल किया गया था। एक चर्चा यह भी है कि जिन चोटों को मौत से पहले का बताया जा रहा है, वह सारी सीपीआर देने की प्रक्रिया के दौरान की हैं। ऐसा लग रहा है कि विशेषज्ञ चिकित्सकों के पैनल में न होने से विराेधाभासी रिपोर्ट तैयार हुई।

मेडिको लीगल सेल को भेजी जाएगी रिपोर्ट

उधर, परिस्थितिजन्य साक्ष्य व पोस्टमार्टम रिपोर्ट में विरोधाभास को देखते हुए अब पुलिस भी इस मामले में मेडिकोलीगल एक्सपर्ट से राय लेने की तैयारी में है। पुख्ता सूत्रों का कहना है कि जल्द ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट व पीएम की प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग स्टेट मेडिकोलीगल सेल लखनऊ भेजी जाएगी। वहां एक्सपर्ट्स की टीम पीएम रिपोर्ट व वीडियो रिकॉर्डिंग का विश्लेषण कर अपनी राय देगी। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।


पोस्टमार्टम वाले दिन पैनल के एमबीबीएस डॉक्टर ही मौजूद थे। वहीं, फॉरेंसिक एक्सपर्ट की देखरेख में पोस्टमार्टम हुआ है। लापरवाही का आरोप पूरी तरह गलत है। - आशु पांडेय, सीएमओ

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