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शराब, सिगरेट को हाथ न लगाएं, कभी नहींं होगी पेट की बीमारी
Sun, 09 Feb 2020 09:52 AM IST
इलाहाबाद ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 09 Feb 2020 09:52 AM IST
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सिगरेट
यदि आप निरोगी रहना चाहते हैं, तो सबसे पहले आपको धूम्रपान, शराब से दूर रहना होगा, क्योंकि इनके सेवन से ही उदर की बीमारी होती है। इसके अलावा दिनचर्या सुधार कर व नियमित रूप से व्यायाम करके उदर की बीमारियों से बचा जा सकता है। यह सलाह देशभर से आए उदर रोग विशेषज्ञों ने सिविल लाइंस स्थित एक होटल में शनिवार को आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी के पहले दिन दी। संगोष्ठी का आयोजन मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के उदर एवं यकृत रोग विभाग एवं इलाहाबाद गैस्ट्रो क्लब के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था।
प्रो. नायक की स्मृति में व्याख्यान देते हुए डॉ. घोषाल ने कहा कि आईबीएस और कालरा जैसी बीमारियाें का उपचार अब आसान हो गया है। संगोष्ठी का उद्घाटन मुख्य अतिथि डॉ. डीकेनिगम ने किया। उद्घाटन सत्र के बाद चले वैज्ञानिक सत्र में अग्नाशय शोध पर डॉ. अरुण खंडूरी, डॉ. प्रवीर राय, डॉ. अनूप सराया, हैदराबाद के डॉ. संदीप लखटकिया, डॉ. अजय चौधरी व डॉ. सौरभ केडिया ने विचार रखे।
संयोजक प्रो. मनीषा द्विवेदी ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि संगोष्ठी का संचालन डॉ. शांति चौधरी ने और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. आलोक मिश्र ने दिया। डॉ. वंदना मिढा, डॉ. समीर महेंद्रा, डॉ. रोहित गुप्ता, डॉ. निलिख गुप्ता, डॉ. कुलदीप सिंह, डॉ. राहुल पुरी, डॉ. प्रबल नियोगी, डॉ. अनुभा श्रीवास्तव, डॉ. मदनानी, डॉ. विनीत अग्रवाल, डॉ. संतोष सक्सेना सहित बड़ी संख्या चिकित्सक मौजूद रहे।
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खाना नहीं निगल पा रहे तो सर्जरी कराना जरूरी नहीं : डॉ. विक्रम आईएलबीएस के प्रो. विक्रम भाटिया ने बताया कि खाने की नली में परेशानी हो और खाना नहीं निगल पा रहे हों तो इसके लिए अब सर्जरी कराने की जरूरत नहीं है। गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट पोयम (पेरोरल एंडोस्कोपिक माइटॉमी) मेथड से इसका आसानी से उपचार कर सकते हैं। मरीज उपचार कराकर एक दिन में घर जा सकता है। इसमें खर्चा भी कम आएगा।
देश के हर चौथे व्यक्ति का लिवर संक्रमित : प्रो. गोविंद
ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइसेंस के गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी एंड ह्यूमन न्यूट्रिशियन विभाग के प्रो. गोविंद के मखारिया ने कहा कि आज देश के हर चौथे व्यक्ति का लिवर किसी न किसी वजह से संक्रमित है, जिसकी वजह बदलती दिनचर्या व खराब खानपान है। प्रो. मखारिया ने कहा कि यदि सही समय पर उपचार शुरू हो जाए तो हेपेटाइटिस सी की बीमारी 12 हफ्ते में दवा से ठीक हो जाती है।
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प्रो. नायक की स्मृति में व्याख्यान देते हुए डॉ. घोषाल ने कहा कि आईबीएस और कालरा जैसी बीमारियाें का उपचार अब आसान हो गया है। संगोष्ठी का उद्घाटन मुख्य अतिथि डॉ. डीकेनिगम ने किया। उद्घाटन सत्र के बाद चले वैज्ञानिक सत्र में अग्नाशय शोध पर डॉ. अरुण खंडूरी, डॉ. प्रवीर राय, डॉ. अनूप सराया, हैदराबाद के डॉ. संदीप लखटकिया, डॉ. अजय चौधरी व डॉ. सौरभ केडिया ने विचार रखे।
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संयोजक प्रो. मनीषा द्विवेदी ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि संगोष्ठी का संचालन डॉ. शांति चौधरी ने और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. आलोक मिश्र ने दिया। डॉ. वंदना मिढा, डॉ. समीर महेंद्रा, डॉ. रोहित गुप्ता, डॉ. निलिख गुप्ता, डॉ. कुलदीप सिंह, डॉ. राहुल पुरी, डॉ. प्रबल नियोगी, डॉ. अनुभा श्रीवास्तव, डॉ. मदनानी, डॉ. विनीत अग्रवाल, डॉ. संतोष सक्सेना सहित बड़ी संख्या चिकित्सक मौजूद रहे।
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खाना नहीं निगल पा रहे तो सर्जरी कराना जरूरी नहीं : डॉ. विक्रम आईएलबीएस के प्रो. विक्रम भाटिया ने बताया कि खाने की नली में परेशानी हो और खाना नहीं निगल पा रहे हों तो इसके लिए अब सर्जरी कराने की जरूरत नहीं है। गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट पोयम (पेरोरल एंडोस्कोपिक माइटॉमी) मेथड से इसका आसानी से उपचार कर सकते हैं। मरीज उपचार कराकर एक दिन में घर जा सकता है। इसमें खर्चा भी कम आएगा।
देश के हर चौथे व्यक्ति का लिवर संक्रमित : प्रो. गोविंद
ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइसेंस के गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी एंड ह्यूमन न्यूट्रिशियन विभाग के प्रो. गोविंद के मखारिया ने कहा कि आज देश के हर चौथे व्यक्ति का लिवर किसी न किसी वजह से संक्रमित है, जिसकी वजह बदलती दिनचर्या व खराब खानपान है। प्रो. मखारिया ने कहा कि यदि सही समय पर उपचार शुरू हो जाए तो हेपेटाइटिस सी की बीमारी 12 हफ्ते में दवा से ठीक हो जाती है।