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न्याय पाने के लिए कम हो दूरी : योगी
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 03 Apr 2017 01:29 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार संगमनगरी पहुंचे योगी आदित्यनाथ ने न सिर्फ न्याय-व्यवस्था के प्रति अपने नजरिए से प्रदेश की जनता को परिचित कराया बल्कि यह भी बता गए कि समाज में आखिरी कतार में खड़े व्यक्ति की भी उनको चिंता है। मुख्यमंत्री ने हाईकोर्ट में लंबित नौ लाख और प्रदेश की निचली अदालतों में लंबित मुकदमों की भारी संख्या पर चिंता जताई। कहा, उत्तर प्रदेश बहुत बड़ा राज्य है। दूरदराज के इलाकों में रहने वाले आम आदमी को न्याय के लिए कोने-कोने से आना पड़ता है। वह इस दिशा में प्रयास करेंगे। सभी संबंधित पक्षों से बात कर मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रस्ताव रखेंगे, जिससे दूरदराज के लोगों को भी न्याय प्राप्त करने में सहूलियत हो।
सीएम योगी ने शासन चलाने में कानून को सबसे महत्वपूर्ण बताया। बोले, किसी भी सभ्य समाज की आत्मा है रूल ऑफ लॉ। यह शासकों का भी शासक होता है। न्याय देना उच्चतम धर्म है। उन्होंने मौजूदा न्यायप्रणाली को प्राचीन भारत की न्याय व्यवस्था से जोड़ते हुए कहा, आज की न्याय प्रणाली हमारे मनीषियों, संतों द्वारा विकसित व्यवस्था की ही देन है। योगी ने कहा कि आने वाले समय में जेलों में बंदियों की संख्या में कमी आएगी। मूलभूत ढांचे का विकास होगा।
बताया कि विचाराधीन बंदियों, ई-कोर्ट प्रोजेक्ट पर योजनाओं को लागू किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने सभी मुख्यमंत्रियों को नौ हजार 748 करोड़ रुपये देने का वादा किया है। इसमें से 915 करोड़ रुपये उत्तर प्रदेश को मिलेंगे। इसमें से 488 करोड़ रुपये फास्ट ट्रैक कोर्ट, महिलाओें और बच्चों को न्याय दिलाने पर खर्च किए जाएंगे।
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केंद्रीय कानून मंत्री ने कहा कि देश में इस समय 2.5 लाख कॉल सेंटर हैं, जो पासपोर्ट, आधार कार्ड आदि बनाने का काम कर रहे हैं। प्री लिटिगेशन मामलों में विधिक सलाह के लिए उत्तर प्रदेश और बिहार में 200-200 कॉल सेंटर स्थापित किए जाएंगे। प्री लिटिगेशन और दूसरे मुकदमों का हम एक डाटा बेस बना रहे हैं। यूएन ट्रीटी में भी हमें इसमें सहयोग का भरोसा मिला है। गरीबों को न्याय दिलाने और विधिक सहायता के लिए फेसलेटेशन ऑफीसर की नियुक्ति की जाएगी। बताया कि गरीबों के मुकदमों का फास्ट ट्रैक कोर्ट में निस्तारण किया जाएगा। भाजपा सरकार ने 126 हाईकोर्ट जजों की नियुक्ति की है। तीन चीफ जस्टिस और नौ सुप्रीमकोर्ट जज भी नियुक्त किए गए हैं।
सुप्रीमकोर्ट के सीनियर जज जस्टिस दीपक मिश्र ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने न्याय के मूल्यों को बनाए रखा। हमें वैकल्पिक न्याय प्रणाली के जरिए मुकदमों को कम करना चाहिए। हर अधिवक्ता की जिम्मेदारी है कि मुकदमे कम करने में सहयोग करे।
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सीएम योगी ने शासन चलाने में कानून को सबसे महत्वपूर्ण बताया। बोले, किसी भी सभ्य समाज की आत्मा है रूल ऑफ लॉ। यह शासकों का भी शासक होता है। न्याय देना उच्चतम धर्म है। उन्होंने मौजूदा न्यायप्रणाली को प्राचीन भारत की न्याय व्यवस्था से जोड़ते हुए कहा, आज की न्याय प्रणाली हमारे मनीषियों, संतों द्वारा विकसित व्यवस्था की ही देन है। योगी ने कहा कि आने वाले समय में जेलों में बंदियों की संख्या में कमी आएगी। मूलभूत ढांचे का विकास होगा।
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बताया कि विचाराधीन बंदियों, ई-कोर्ट प्रोजेक्ट पर योजनाओं को लागू किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने सभी मुख्यमंत्रियों को नौ हजार 748 करोड़ रुपये देने का वादा किया है। इसमें से 915 करोड़ रुपये उत्तर प्रदेश को मिलेंगे। इसमें से 488 करोड़ रुपये फास्ट ट्रैक कोर्ट, महिलाओें और बच्चों को न्याय दिलाने पर खर्च किए जाएंगे।
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केंद्रीय कानून मंत्री ने कहा कि देश में इस समय 2.5 लाख कॉल सेंटर हैं, जो पासपोर्ट, आधार कार्ड आदि बनाने का काम कर रहे हैं। प्री लिटिगेशन मामलों में विधिक सलाह के लिए उत्तर प्रदेश और बिहार में 200-200 कॉल सेंटर स्थापित किए जाएंगे। प्री लिटिगेशन और दूसरे मुकदमों का हम एक डाटा बेस बना रहे हैं। यूएन ट्रीटी में भी हमें इसमें सहयोग का भरोसा मिला है। गरीबों को न्याय दिलाने और विधिक सहायता के लिए फेसलेटेशन ऑफीसर की नियुक्ति की जाएगी। बताया कि गरीबों के मुकदमों का फास्ट ट्रैक कोर्ट में निस्तारण किया जाएगा। भाजपा सरकार ने 126 हाईकोर्ट जजों की नियुक्ति की है। तीन चीफ जस्टिस और नौ सुप्रीमकोर्ट जज भी नियुक्त किए गए हैं।
सुप्रीमकोर्ट के सीनियर जज जस्टिस दीपक मिश्र ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने न्याय के मूल्यों को बनाए रखा। हमें वैकल्पिक न्याय प्रणाली के जरिए मुकदमों को कम करना चाहिए। हर अधिवक्ता की जिम्मेदारी है कि मुकदमे कम करने में सहयोग करे।