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Prayagraj News: बर्खास्त रेलवे कर्मी को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत
Tue, 20 Feb 2024 03:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
Updated Tue, 20 Feb 2024 03:25 AM IST
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रेलवे में हेल्पर/खलासी के अनाधिकृत रूप से बार-बार लंबी छुट्टी पर रहने पर विभाग ने उसे बर्खास्त कर दिया था। उसने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण, इलाहाबाद में अपील की, लेकिन वहां से उसे राहत नहीं मिली। फिर उसने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। न्यायमूर्ति विवेक कुमार बिड़ला और न्यायमूर्ति डोनाडी रमेश की कोर्ट ने भी याचिका खारिज कर दी।
याची मोहम्मद साबिर रेलवे में हेल्पर/खलासी पद पर कार्यरत था। उसकी पत्नी बिहार में हिस्टीरिया से पीड़ित थी। इस दौरान वह बार-बार अनाधिकृत रूप से लंबी छुट्टी पर रहा। विभाग की ओर से बर्खास्त किए जाने पर याची ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण, इलाहाबाद के समक्ष मूल आवेदन प्रस्तुत किया।
न्यायाधिकरण के आदेश के अनुसार आवेदक ने यह स्वीकार किया है कि वह बिना छुट्टी लिए स्टेशन से चला गया था। उसने अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने की आदत को भी स्वीकार किया। याची ने इस बात को भी स्वीकार किया है कि उसने अपनी पत्नी के इलाज के लिए रेलवे अस्पताल के किसी डॉक्टर से सलाह लेने का कोई प्रयास नहीं किया। इस तरह से न्यायाधिकरण से उसे राहत नहीं मिली। हाईकोर्ट ने न्यायाधिकरण की ओर से पारित आदेश में हस्तक्षेप का कोई अच्छा आधार न मिलने पर याचिका खारिज कर दी।
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याची मोहम्मद साबिर रेलवे में हेल्पर/खलासी पद पर कार्यरत था। उसकी पत्नी बिहार में हिस्टीरिया से पीड़ित थी। इस दौरान वह बार-बार अनाधिकृत रूप से लंबी छुट्टी पर रहा। विभाग की ओर से बर्खास्त किए जाने पर याची ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण, इलाहाबाद के समक्ष मूल आवेदन प्रस्तुत किया।
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न्यायाधिकरण के आदेश के अनुसार आवेदक ने यह स्वीकार किया है कि वह बिना छुट्टी लिए स्टेशन से चला गया था। उसने अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने की आदत को भी स्वीकार किया। याची ने इस बात को भी स्वीकार किया है कि उसने अपनी पत्नी के इलाज के लिए रेलवे अस्पताल के किसी डॉक्टर से सलाह लेने का कोई प्रयास नहीं किया। इस तरह से न्यायाधिकरण से उसे राहत नहीं मिली। हाईकोर्ट ने न्यायाधिकरण की ओर से पारित आदेश में हस्तक्षेप का कोई अच्छा आधार न मिलने पर याचिका खारिज कर दी।
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