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High Court : परिवीक्षाधीन शिक्षक की बर्खास्तगी रद्द, बहाली का आदेश, बकाए वेतन का भुगतान करे सरकार

Sat, 31 May 2025 05:06 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 31 May 2025 05:06 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पी.टी. शिक्षक संजय कुमार सेंगर की बर्खास्तगी को अवैध बता पुनर्बहाली का फैसला सुनाया है। साथ ही शिक्षक को पांच लाख रुपये बकाया वेतन अदा करने का आदेश दिया है।

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Dismissal of probationary teacher cancelled, reinstatement ordered, government should pay outstanding salary
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पी.टी. शिक्षक संजय कुमार सेंगर की बर्खास्तगी को अवैध बता पुनर्बहाली का फैसला सुनाया है। साथ ही शिक्षक को पांच लाख रुपये बकाया वेतन अदा करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि बकाए वेतन की धनराशि राज्य सरकार प्रबंधन समिति से वसूल सकती है।

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यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति पीके गिरी की अदालत ने हाथरस के एक विद्यालय में तैनात प्रोबेशनरी पीटी शिक्षक संजय की ओर से एकल पीठ के आदेश को चुनौती देने वाली स्पेशल अपील पर दिया है। संजय सेंगर को दो जनवरी 2006 को प्रोबेशनरी पी.टी. शिक्षक के रूप में नियुक्त किया गया था। उनकी एक वर्षीय परिवीक्षा अवधि तीन जनवरी 2007 को समाप्त होनी थी, लेकिन प्रबंधन समिति ने बिना प्रक्रिया पूरी किए, मनमाने ढंग से उनकी सेवाओं की पुष्टि न कर परिवीक्षा बढ़ा दी। जिला विद्यालय निरीक्षक, हाथरस ने इस निर्णय को अस्वीकार करते हुए इसे अवैध व उत्पीड़न की मंशा वाला बताया और सेवाओं की पुष्टि के निर्देश दिए।
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इसके बावजूद, प्रबंधन ने सेंगर पर कदाचार का आरोप लगाकर आरोप पत्र जारी किया और बिना सुनवाई के एकतरफा जांच कर 26 नवंबर 2007 को उनकी सेवाएं समाप्त कर दीं। इस आदेश को बर्खास्त शिक्षक ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। अदालत ने पाया कि आरोप पत्र का जवाब देने के बावजूद संजय को रिपोर्ट नहीं दी गई और उन्हें अपनी सफाई का अवसर नहीं मिला, जो प्राकृतिक न्याय के मूल सिद्धांतों के विपरीत है। कोर्ट ने कहा जहां कर्मचारी की बर्खास्तगी विशिष्ट आरोपों पर आधारित होती है, वहां उचित जांच आवश्यक होती है, भले ही कर्मचारी परिवीक्षा पर हो।
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अदालत ने एकल न्यायाधीश के इस निष्कर्ष से असहमति व्यक्त की कि यह संतोषजनक कार्य न होने के कारण परिवीक्षाधीन की सेवाओं को समाप्त करने का मामला था। कोर्ट ने माना कि यह कदाचार का मामला था और प्रबंधन का इरादा किसी भी तरह से अपीलकर्ता की सेवाओं को समाप्त करना था, जबकि आरोप गंभीर नहीं थे।


वलीउज्जमां खान की नियुक्ति का मामला

कोर्ट ने एक अन्य याची वलीउज्जमां खान की नियुक्ति के मामले को संयुक्त शिक्षा निदेशक, अलीगढ़ जोन को पुनर्विचार के लिए वापस भेज दिया। संयुक्त शिक्षा निदेशक ने 29 जून, 2010 के अपने आदेश में इस आधार पर नियुक्ति को अस्वीकृत कर दिया था कि यह एल.टी. ग्रेड अंग्रेजी शिक्षक के पद के पर की गई थी, जबकि वलीउज्जमां खान एक पी.टी. शिक्षक थे।

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