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डिजिटल अरेस्ट कुछ नहीं, सिर्फ मन का डर : डीआईजी
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‘डिजिटल अरेस्ट वह शब्द है जो आजकल बेहद चर्चित है। लगातार ऐसी खबरें सुनने को मिलती हैं कि डिजिटल अरेस्ट कर लाखों की ठगी की गई। इससे बचना है तो समझ लीजिए कि डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई चीज नहीं है और यह सिर्फ मन का डर है, जिसका फायदा साइबर अपराधी उठाते हैं। कोई भी अनजान व्यक्ति फोन कर डराए, धमकाए ताे घबराएं नहीं। उसकी कॉल तुरंत डिसकनेक्ट कर दें और अगर ठगी हुई हो तो 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।’
अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित ‘पुलिस की पाठशाला’ में डीआईजी रेलवे आईपीएस राहुल राज ने यह बातें कहीं। बुधवार को जगत तारन गर्ल्स इंटर कॉलेज में हुए इस आयोजन में उन्होंने साइबर अपराध से बचाव के तरीकों पर विस्तार से चर्चा की। छात्राओं से कहा कि कोशिश यही करें कि अंजान नंबर से आने वाली वॉइस व वीडियो काॅल्स को रिसीव न किया जाए।
अगर कॉल रिसीव हो गई हो और काेई डरा-धमकाकर पैसों की मांग करे तो उसकी बात कतई न मानें। कॉल डिसकनेक्ट करें और घर के बड़ों को जानकारी दें। गलती से पैसे दे दिए हों तो तत्काल 1930 या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।
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कोई परेशान करे तो हेल्पलाइन पर करें शिकायत
उन्होंने महिला सुरक्षा के संबंध में भी जानकारी दी। कहा कि कोई परेशान करे तो चुप न रहें। माता-पिता, शिक्षक को बताएं और वीमेन पाॅवरलाइन 1090 पर कॉल करें। बाल अपराध की स्थिति में 1098 पर शिकायत दर्ज कराएं। प्रत्येक थाने में महिला हेल्पडेस्क है और वहां भी जाकर अपनी समस्या बता सकती हैं। सोशल मीडिया अकाउंट जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप या एक्स प्रोफाइल के सेफ्टी फीचर का अवश्य इस्तेमाल करें। जैसे फेसबुक प्रोफाइल लॉक और इंस्टाग्राम अकाउंट प्राइवेट सेटिंग पर ही रखें।
खुद के साथ ही औरों को भी करें जागरूक
प्रधानाचार्य डॉ. नंदिनी तिवारी ने मुख्य अतिथि का आभार जताते हुए छात्राओं से कहा कि उन्हें कार्यक्रम में जो भी जानकारी मिली, उससे वह खुद तो जागरूक हों ही, अपने परिवार व आसपास के लोगों को भी जागरूक करें। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ प्रवक्ता उमा सिन्हा ने किया। इस दौरान शिक्षिका सोमा चटर्जी, अंजू, सुचंद्रा बनर्जी, स्तुति व विजय सिंह भी उपस्थित रहे।
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अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित ‘पुलिस की पाठशाला’ में डीआईजी रेलवे आईपीएस राहुल राज ने यह बातें कहीं। बुधवार को जगत तारन गर्ल्स इंटर कॉलेज में हुए इस आयोजन में उन्होंने साइबर अपराध से बचाव के तरीकों पर विस्तार से चर्चा की। छात्राओं से कहा कि कोशिश यही करें कि अंजान नंबर से आने वाली वॉइस व वीडियो काॅल्स को रिसीव न किया जाए।
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अगर कॉल रिसीव हो गई हो और काेई डरा-धमकाकर पैसों की मांग करे तो उसकी बात कतई न मानें। कॉल डिसकनेक्ट करें और घर के बड़ों को जानकारी दें। गलती से पैसे दे दिए हों तो तत्काल 1930 या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।
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कोई परेशान करे तो हेल्पलाइन पर करें शिकायत
उन्होंने महिला सुरक्षा के संबंध में भी जानकारी दी। कहा कि कोई परेशान करे तो चुप न रहें। माता-पिता, शिक्षक को बताएं और वीमेन पाॅवरलाइन 1090 पर कॉल करें। बाल अपराध की स्थिति में 1098 पर शिकायत दर्ज कराएं। प्रत्येक थाने में महिला हेल्पडेस्क है और वहां भी जाकर अपनी समस्या बता सकती हैं। सोशल मीडिया अकाउंट जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप या एक्स प्रोफाइल के सेफ्टी फीचर का अवश्य इस्तेमाल करें। जैसे फेसबुक प्रोफाइल लॉक और इंस्टाग्राम अकाउंट प्राइवेट सेटिंग पर ही रखें।
खुद के साथ ही औरों को भी करें जागरूक
प्रधानाचार्य डॉ. नंदिनी तिवारी ने मुख्य अतिथि का आभार जताते हुए छात्राओं से कहा कि उन्हें कार्यक्रम में जो भी जानकारी मिली, उससे वह खुद तो जागरूक हों ही, अपने परिवार व आसपास के लोगों को भी जागरूक करें। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ प्रवक्ता उमा सिन्हा ने किया। इस दौरान शिक्षिका सोमा चटर्जी, अंजू, सुचंद्रा बनर्जी, स्तुति व विजय सिंह भी उपस्थित रहे।