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प्रयागराज में गंगा-यमुना उफान पर होने से किनारे रहने वालों की बढ़ी मुश्किलें

Wed, 24 Jun 2020 10:44 PM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 24 Jun 2020 10:44 PM IST
सार

खतरे का बिंदु- 84.737 मीटर (जलस्तर)
  1. गंगा
  • फाफामऊ- 77.73 मीटर
  • छतनाक- 7258 मीटर
  1. यमुना
  • नैनी- 73.18 मीटर

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Difficulties of people living on the banks of Ganga-Yamuna in Prayagraj
prayagraj news - फोटो : prayagraj

विस्तार

गंगा-यमुना का जलस्तर उफान पर है। उत्तराखंड में हो रही बारिश और अन्य वर्षों की अपेक्षा बांधों से ज्यादा पानी छोड़े जाने के कारण दोनों नदियों के जलस्तर में तेजी से वृद्धि हो रही है। गंगा में हो रहा कटान भी चौंकाने वाला है। जल वृद्धि से परेशान तीर्थपुरोहितों ने बुधवार को सामान समेटकर सुरक्षित स्थानों का रुख किया है। वहीं बाढ़ के खतरे को देखते हुए कछारी इलाकों में रहने वालों की भी धड़कनें बढ़ गईं हैं।

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Difficulties of people living on the banks of Ganga-Yamuna in Prayagraj
prayagraj news - फोटो : prayagraj

सिंचाई विभाग के अफसरों का मानना है कि अन्य वर्षों की अपेक्षा इस बार गंगा में इस समय जितना पानी आ रहा है, वह पहले कभी नहीं रहा। पिछले 24 घंटों में वाटर डिस्चार्ज बढ़ा है। इस कारण गंगा की धारा तो तेज हुई ही जलस्तर भी बढ़ गया। हालांकि, यमुना का जल धीमी गति से बढ़ रहा है। दोनों नदियां खतरे के निशान से अभी काफी दूर हैं।

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Difficulties of people living on the banks of Ganga-Yamuna in Prayagraj
prayagraj news - फोटो : prayagraj

दोनों नदियों का जलस्तर तीन सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है।  गंगा-यमुना का उफान देखकर गंगा किनारे डेरा जमाए तीर्थपुरोहितों ने ने मंगलवार रात से ही तख्त आदि हटाने की व्यवस्था की। रात में ही जलस्तर उनके डेरे तक पहुंच गया था। दूसरी तरफ गंगा की तेज धारा से कटान खतरनाक हो गया है। पुरोहितों ने स्नानार्थियों के लिए बालू काटकर सीढ़ियां तो बनाईं, लेकिन तीन घंटे में कटान से सीढ़ियां भी खत्म हो गईं। 

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prayagraj news - फोटो : prayagraj

वहीं गंगा-यमुना के कछारी इलाकों में रहने वालों की दिक्कतें भी बढ़ने वाली हैं। लोगों ने सुरक्षित ठिकाने तक सामान पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बुधवार को लोग ट्रालियों से सामान ले जाते दिखे। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता दिनेश त्रिपाठी के मुताबिक उत्तराखंड में बारिश का असर यहां दिख रहा है। नरौरा और कानपुर की ओर से वाटर डिस्चार्ज इस बार ज्यादा है। यमुना के जलस्तर में वृद्धि की गति अभी धीमी है। 

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