जिंदा थे तो इलाज नहीं मिला, मौत के बाद अंतिम संस्कार का सम्मान तक नहीं पा सकेः प्रियंका गांधी
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प्रियंका गांधी ने रेत में दफनाए गए शवों से रामनामी हटाने वाले वीडियो पर ट्वीट कर सरकार को घेरा
गंगा के घाटों पर रेत में दफनाए गए शवों से रामनामी चादर हटाने वाले वीडियो को लेकर सियासी घमासान मच गया है। अंतिम संस्कार पर आम आदमी पार्टी के सवाल उठाने के बाद अब कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने जिले में गंगा किनारे रेत में दफनाए गए शवों से रामनामी हटाने को पाप और मानवता के प्रति अपराध करार दिया है। उन्होंने ट्विटर पर इसका एक वीडियो साझा कर यूपी सरकार को कठघरे में खड़ा किया है।
कुछ दिनों पहले रेत में दबे शवों से रामनामी चादर हटाने वाली तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इस मुद्दे को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। प्रियंका गांधी में ट्विटर पर जिस वीडियो को साझा किया है, वह किस जगह का है इसका उल्लेख नहीं किया है। लेकिन इस वीडियो को लेकर उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है कि जब जिंदा थे तो इलाज नहीं मिला, मर गए तो शवों के अंतिम संस्कार का सम्मान भी मयस्सर नहीं हो सका। उन्होंने लिखा है कि कितनों को सम्मान से अंतिम संस्कार नहीं मिला। सरकारी आंकड़ों में जगह नहीं मिली। अब रेत में दफन शवों से रामनामी भी छीनी जा रही है।
कांग्रेस महासचिव ने तंज कसा है कि छवि चमकाने की चिंता में दुबली होती सरकार पाप करने पर उतारू है। उन्होंने सवाल खड़ा किया है कि आखिर ये कौन सा सफाई अभियान है? प्रियंका ने इस मुद्दे पर एक फेसबुक पोस्ट के जरिये जिम्मेदार कौन अभियान शुरू करने का भी एलान किया है। उन्होंने कहा है कि केंद्र सरकार से सवाल पूछना उनका दायित्व है। अनगिनत जानें सरकार की लापरवाही से गई हैं। ऐसे में वे जनता की तरफ से सरकार से सवाल पूछेंगी।
प्रियंका गांधी ने फेसबुक पोस्ट में लिखा है कि जब कोरोना की दूसरी लहर ने देश में तबाही मचानी शुरू की और देश के नागरिक बेड, ऑक्सीजन, वैक्सीन और दवा के लिए संघर्ष कर रहे थे, उस समय देश की सरकार से लोगों को उम्मीद थी कि वो इस भयावह स्थिति से निपटने के लिए पहले की तैयारियों एवं देश में उपलब्ध संसाधनों का पूरा इस्तेमाल लोगों की जान बचाने के लिए करेगी।लेकिन सरकार पूरी तरह से मूकदर्शक मोड में चली गई और पूरे देश में एक पीड़ादायक स्थिति पैदा हुई।