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कोरोना से जीते डीएफओ वाईपी शुक्ला हारे जिंदगी की जंग, एसआरएन में ली अंतिम सांस
Tue, 04 May 2021 01:30 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 04 May 2021 01:30 AM IST
सार
- 24 अप्रैल को कराए गए थे भर्ती, दो दिन पहले कोविड रिपोर्ट आई थी निगेटिव
- बेहतर इलाज के लिए डॉक्टरों की सलाह पर रुके थे, सोमवार सुबह निधन, रसूलाबाद घाट पर अंतेष्टि
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prayagraj news : डीएफओ वाईपी शुक्ला (फाइल फोटो)।
- फोटो : prayagraj
विस्तार
कोरोना संक्रमण को मात देने वाले डीएफओ वाईपी शुक्ला जिंदगी की जंग हार गए। सोमवार सुबह उपचार के दौरान उनका एसआरएन अस्पताल में निधन हो गया। दो दिन पहले उनकी कोविड रिपोर्ट निगेटिव आई थी। अन्य दिक्कतों के कारण चिकित्सकों ने उन्हें बेहतर उपचार करने के लिए डिस्चार्ज नहीं किया था।
कर्त्तव्यनिष्ठ, मिलनसार प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी वन प्रभाग (डीएफओ) के पद पर उन्होंने वृक्षारोपण, एक दिन का पौधरोपण का विश्व रिकार्ड ही नहीं बनवाया बल्कि स्वच्छ गंगा मिशन के कार्यक्रमों में उनकी सहभागिता सराही गई। बीेते 31 मार्च को उन्होंने मिंटो पार्क में नदियों की कथा कार्यक्रम आयोजित कराया था। वन, वन संपदा, वृक्षारोपण के जानकार वाईपी शुक्ला शासन की नीतियों के क्रियान्वयन के साथ सामाजिक गतिविधियों में बढ़चढ़कर शामिल होते रहे।
विभागीय अफसरों के मुताबिक देवरिया के मूल निवासी वाईपी शुक्ला प्रयागराज में तैनाती के बाद राजापुर में सरकुलर रोड पर सपरिवार रहते थे। घर में पत्नी, दो बेटे हैं। एक बेटा यहां साथ रहता था जबकि दूसरा लखनऊ में था। डीएफओ के कोरोना संक्रमित हुए तो उन्हें 24 अप्रैल को एसआरएन अस्पताल के कोविड वार्ड में भर्ती कराया गया था। विभागीय लोगों के मुताबिक दो दिन पहले उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई थी, लेकिन कुछ दिक्कत थी। उन्हें चिकित्सकों की सलाह पर डिस्चार्ज नहीं किया गया था। सोमवार सुबह अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। तमाम प्रयासों के बाद भी उन्हें नहीं बचाया जा सका। यह खबर घर पहुंची तो कोहराम मच गया। पत्नी, बच्चे रोने बिलखने लगे। मातहत कर्मचारी और अन्य अफसर भी गमगीन हो गए। बताया गया कि रसूलाबाद घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया।
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कर्त्तव्यनिष्ठ, मिलनसार प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी वन प्रभाग (डीएफओ) के पद पर उन्होंने वृक्षारोपण, एक दिन का पौधरोपण का विश्व रिकार्ड ही नहीं बनवाया बल्कि स्वच्छ गंगा मिशन के कार्यक्रमों में उनकी सहभागिता सराही गई। बीेते 31 मार्च को उन्होंने मिंटो पार्क में नदियों की कथा कार्यक्रम आयोजित कराया था। वन, वन संपदा, वृक्षारोपण के जानकार वाईपी शुक्ला शासन की नीतियों के क्रियान्वयन के साथ सामाजिक गतिविधियों में बढ़चढ़कर शामिल होते रहे।
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विभागीय अफसरों के मुताबिक देवरिया के मूल निवासी वाईपी शुक्ला प्रयागराज में तैनाती के बाद राजापुर में सरकुलर रोड पर सपरिवार रहते थे। घर में पत्नी, दो बेटे हैं। एक बेटा यहां साथ रहता था जबकि दूसरा लखनऊ में था। डीएफओ के कोरोना संक्रमित हुए तो उन्हें 24 अप्रैल को एसआरएन अस्पताल के कोविड वार्ड में भर्ती कराया गया था। विभागीय लोगों के मुताबिक दो दिन पहले उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई थी, लेकिन कुछ दिक्कत थी। उन्हें चिकित्सकों की सलाह पर डिस्चार्ज नहीं किया गया था। सोमवार सुबह अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। तमाम प्रयासों के बाद भी उन्हें नहीं बचाया जा सका। यह खबर घर पहुंची तो कोहराम मच गया। पत्नी, बच्चे रोने बिलखने लगे। मातहत कर्मचारी और अन्य अफसर भी गमगीन हो गए। बताया गया कि रसूलाबाद घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया।
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