देवशयनी एकादशी: चार माह के लिए क्षीरसागर में सोए भगवान, मांगलिक कार्यों पर रोक
देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु शयन में चले गए और चातुर्मास व्रत आरंभ हो गया। मान्यता के अनुसार देवशयनी एकादशी से कार्तिक की देवोत्थान एकादशी तक चार महीने भगवान जब तक क्षीर सागर में शयन करेंगे, तबतक मांगलिक कार्य स्थगित रहेंगे।
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भगवान विष्णु रविवार को चार महीने के लिए क्षीरसागर में सो गए। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी पर रविवार को हजारों श्रद्धालुओं ने संगम में पुण्य की डुबकी लगाई। संगम तट पर भक्तों ने स्नान के बाद भगवान विष्णु की पूजा की और दीपदान किया। पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु अब कार्तिक में देवोत्थान एकादशी के दिन जगत के कल्याण के लिए भक्तों के मास पर्यंत पूजा-आरती और कीर्तन से प्रसन्न होकर जागेंगे। भगवान के शयन के साथ ही अब शुभ कार्यों पर रोक लग गई है और साधु-संतों का चातुर्मास व्रत आरंभ हो गया है।
देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु शयन में चले गए और चातुर्मास व्रत आरंभ हो गया। मान्यता के अनुसार देवशयनी एकादशी से कार्तिक की देवोत्थान एकादशी तक चार महीने भगवान जब तक क्षीर सागर में शयन करेंगे, तबतक मांगलिक कार्य स्थगित रहेंगे। देवोत्थान एकादशी पर व्रत रखने वाले भक्तों के संगम पर पहुंचने का सिलसिला भोर में ही आरंभ हो गया। संगम के अलावा किलाघाट, रामघाट, दशाश्वमेध घाट पर देवशयनी एकादशी पर पुण्य की डुबकी लगने लगी।
श्रद्धालु स्नान के बाद अन्न, वस्त्र का दान भी करते रहे। कहीं गंगा पूजन तो कहीं आहुतियां दी जाती रहीं। तीर्थपुरोहितों की चौकियों पर संकल्प दिलाए जा रहे थे। देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु की गंगा तटों पर सविधि पूजा की गई। मंदिरों में भी नारायण की झांकियां सजाई गईं। व्रतियों ने भगवान विष्णु को प्रिय पीली वस्तुओं के साथ आम और केले का दान किया। संगम की रेती पर जगह-जगह दीपदान कर मंगल कामनाएं की गईं।
पुराणों के अनुसार पालनकर्ता भगवान विष्णु चार मास तक क्षीरसागर की शैय्या पर विश्राम करते हैं। इसलिए इस अवधि में कोई मांगलिक कार्य नहीं किए जाएंगे। भगवान के शयनकाल के इन चार महीनों में विवाह संस्कार, गृह प्रवेश समेत अन्य मंगल कार्य नहीं होंगे। इसी के साथ शादी -विवाह संस्कार फिर स्थगित हो गए। इसी दिन से चातुर्मास व्रत भी आरंभ हो गया। अब संन्यासी और तपस्वी चार महीने तक चातुर्मास व्रत करेंगे। इसके बाद कार्तिक में देवोत्थान एकादशी से फिर मांगलिक कार्य आरंभ होंगे।
देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं। इसलिए इस मास को चतुर्मास भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन से भगवान शिव संसार का संचालन करते हैं। इस दिन से सभी मांगलिक कार्य करना वर्जित हो जाता है। - ज्योतिषाचार्य पं ब्रजेंद्र मिश्र।
संतों का चातुर्मास व्रत आरंभ
देवोत्थान एकादशी के साथ ही चातुर्मास व्रत भी आरंभ हो गया। संतों ने सविधि पूजा-आरती के साथ चातुर्मास व्रत का संकल्प लिया। जैन मुनि विपुल सागर ससंघ चातुर्मास के लिए प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव की जन्मस्थली अंदावा पहुंचे। वहां सविधि चातुर्मास आरंभ हुआ।