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न गंगा जैसी मां न माधव के समान कोई देवता: देवकी नंदन
Mon, 21 Jan 2019 05:58 PM IST
shubham
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: shubham
Updated Mon, 21 Jan 2019 05:58 PM IST
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महाराज देवकी नंदन ठाकुर
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विश्वशांति सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वाधान में सेक्टर में तेरह के शांति सेवा शिविर पंडाल में भागवत कथा की रसधारा तीसरे दिन बही। तीसरे दिन महाराज देवकी नंदन ठाकुर ने कहा कि माधव के समान कोई देवता नहीं है। गंगा के समान कोई दूसरी नदी नहीं है और त्रिवेणी के समान सदृश कोई दूसरा क्षेत्र नहीं है।
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यहां भगवान माधव के दर्शन होते हैं। अक्षयवट के दर्शन होते हैं। इस अक्षयवट के बहुत वर्षो से पहले से सनातन धर्म प्रेमी दर्शन नहीं कर सकते हैं। सबके लिए दर्शन नहीं होते थे। लेकिन यूपी सरकार के चलते अक्षयवट के दर्शन आम लोगों के लिए आसान हो गया। अक्षयवट की महिमा और महत्व पर वर्णन करते हुए महाराज जी ने कहा कि अक्षयवट साधारण नहीं है।
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आप लोगों को इसके महत्व को समझना चाहिए। जब मुगलों ने आक्रमण किया तो हमारे देश पर हमला किया था तब इसका नाम प्रयाराज ही रहा। ये अक्षयवट की देन है। प्रलयकालीन समय पर भी जो कभी मिटे ही न वही अक्षयवट है। जो मिट वह अक्षय कैसे हो सकता है। अक्षय कभी क्षय नहीं हो सकता है। उन्होंने कथा का वृतांत सुनाते हुए कहा कि राजा परीक्षित को जब श्राप लगा कि इनकी मृत्यु सर्पदंश से 7वें दिन हो जाएगी।
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जिसे यह पता चल जाए कि क्या करेगा क्या सोचेगा। यह जानकर राजा परीक्षित ने अपना महल छोड़ दिया और अपना सर्वस्य त्याग कर मुक्ति मार्ग की खोज पर निकल पड़े। गंगा तट पर पहुंचकर संतों पूछा कि जिस व्यक्ति मृत्यु सातवें दिन हो जाएगी, उसे क्या करना चाहिए? किसी ने कहा गंगा स्नान करो, किसी ने कहा गंगा तट पर आ गए हो तो अच्छा ही होगा।
इसी समय भगवान शुकदेव पधारे। जिसे राजा परीििक्षत ने शाष्टांग प्रणाम किया और अपनी व्यथा बताई। इसके लिए मुझे क्या करना चाहिए? इस पर भगवान शुकदेव मुस्कराते हुए कहा कि हे राजन प्रश्र आपके कल्याण का नहीं है बल्कि संसार के कल्याण का प्रश्र है। आपकी मृत्यु सातवें दिन हो जाएगी इसके लिए भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए।
जो सात दिन श्रीमदभागवत कथा का पाठ करेगा उसे मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। इस हांथ जोड़ भगवान शुकदेव से कहा कि प्रभु मेरा मार्ग प्रशस्त करिए। भगवान जन्म देने से पहले कहते हैं कि ऐसा कर्म करना चाहिए जिससे दोबारा जन्म नहीं लेना पड़े। महाराज जी ने कहा कि भागवत कथा को सुनने वालों का भगवान सदैव कल्याण करते हैं। राजा परीक्षित के चलते भागवत कथा पृथ्वी के लोगों को सुनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।