चुनावी मोड में आने के साथ ही बढ़ी डिप्टी सीएम केशव मौर्य की सक्रियता
- संघ की मंशा पर पिछड़ों की गोलबंदी में लगातार जुटे रहे केशव
- विधानसभा चुनाव की तैयारियों का रोडमैप तैयार करने की भी मिली अहम भूमिका
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पूर्व केंद्रीय मंत्री डा. मुरली मनोहर जोशी, पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी के बाद भारतीय जनता पार्टी का प्रयागराज में अगर कोई बड़ा चेहरा माना जाता है तो वह डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ही है। पार्टी में भी केशव मौर्य का कद भी लगातार बढ़ता जा रहा है। मिशन 2022 विजय के लिए भाजपा के चुनावी मोड में आने के साथ ही केशव मौर्य की भी इन दिनों सक्रियता बढ़ गई है। चर्चा है कि प्रदेश संगठन ने सीएम योगी के साथ केशव मौर्य को विधानसभा चुनाव की तैयारियों का रोडमैप तैयार करने की अहम भूमिका दे दी है।
पिछले कुछ दिनों से सियासी गलियारों में डिप्टी सीएम केशव मौर्य को लेकर तमाम तरह की बातें सामने आई। खबर यह भी आई कि उनके और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है, लेकिन इन तमाम अटकलों पर मंगलवार 22 जून को विराम लग गया। डिप्टी सीएम के लखनऊ स्थित सरकारी आवास पर सीएम योगी, डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा, संघ के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, सह सर कार्यवाह कृष्ण गोपाल और क्षेत्र प्रचारक अनिल के आगमन ने पार्टी में एकजुटता का संदेश देने का काम कर दिया।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी ने केशव को अहम भूमिका दे दी है। इसकी मुख्य वजह केशव मौर्य का पिछड़ी जाति का एक बड़ा नेता होना है। यूं तो भाजपा में पिछड़ी जाति के कुछ अन्य नेता भी है, जिसमें कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह आदि के नाम प्रमुख रूप से शामिल हैं। लेकिन केशव के मुकाबले इन नेताओं का जनाधार अभी कम ही है। संघ और विहिप में भी उनकी अच्छी पैठ है। शायद इसी वजह से केशव मौर्य पिछले कुछ दिनों से पिछड़ों की गोलबंदी में लगातार जुटे हुए हैं।