{"_id":"60b12954e3ff345c1c78ce71","slug":"demand-to-consider-agriculture-department-employees-as-front-line-workers","type":"story","status":"publish","title_hn":"कृषि विभाग कर्मचारियों को फ्रंट लाइन वर्कर मानने की मांग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कृषि विभाग कर्मचारियों को फ्रंट लाइन वर्कर मानने की मांग
Fri, 28 May 2021 11:03 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 28 May 2021 11:03 PM IST
सार
- कोरोना मामले की जनहित याचिका में मेरठ के छात्र ने दाखिल की अर्जी
विज्ञापन
demo pic
- फोटो : Twitter
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कृषि विभाग में कार्यरत कर्मचारियों को भी कोरोना वॉयरियर्स की तरह फ्रंट लाइन वर्कर मानने की मांग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की गई है। मेरठ के छात्र रजत ऐरन ने न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति अजीत कुमार की खंडपीठ के समक्ष ईमेल के माध्यम से भेजे पत्र के माध्यम से प्रदेश में कृषि उत्पादन एवं कृषक कल्याण कार्यों में लगे कृषि विभाग के फील्ड कर्मचारियों को फ्रंटलाइन वर्कर घोषित करके प्राथमिकता के आधार पर टीकाकरण की मांग की है।
याचिका की सुनवाई के दौरान मेरठ से वीडियो लिंक से जुड़े रजत ऐरन ने खंडपीठ को बताया कि गत वर्ष से लॉकडाउन के बावजूद कृषि विभाग के कर्मचारी किसानों के खेतों तक जाकर केंद्र एवं राज्य की कृषि योजनाओं का लाभ पहुंचा रहे हैं। पंचायत चुनाव के पश्चात गांव में पैर पसार रही महामारी का सामना करते हुए कृषि विभाग के कर्मचारी किसानों को उन्नत बीज, खाद, कीटाणु नाशक, खरपतवार नाशक , किसान क्रेडिट कार्ड आदि उपलब्ध करवा रहे हैं एवं कृषि की उन्नत तकनीकों से उनका परिचय भी करवा रहे हैं।
जिस कारण प्रदेश अन्न का भंडार बना हुआ है एवं खाद्यान्न एवं दलहन की कोई कमी नहीं है। इसके बावजूद प्रदेश सरकार ने कृषि कर्मचारियों को फ्रंटलाइन वर्कर का दर्जा नहीं दिया है, जिस कारण उन्हें टीकाकरण हेतु भटकना पड़ रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए खंडपीठ ने सात जून को अगली सुनवाई पर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
याचिका की सुनवाई के दौरान मेरठ से वीडियो लिंक से जुड़े रजत ऐरन ने खंडपीठ को बताया कि गत वर्ष से लॉकडाउन के बावजूद कृषि विभाग के कर्मचारी किसानों के खेतों तक जाकर केंद्र एवं राज्य की कृषि योजनाओं का लाभ पहुंचा रहे हैं। पंचायत चुनाव के पश्चात गांव में पैर पसार रही महामारी का सामना करते हुए कृषि विभाग के कर्मचारी किसानों को उन्नत बीज, खाद, कीटाणु नाशक, खरपतवार नाशक , किसान क्रेडिट कार्ड आदि उपलब्ध करवा रहे हैं एवं कृषि की उन्नत तकनीकों से उनका परिचय भी करवा रहे हैं।
विज्ञापन
जिस कारण प्रदेश अन्न का भंडार बना हुआ है एवं खाद्यान्न एवं दलहन की कोई कमी नहीं है। इसके बावजूद प्रदेश सरकार ने कृषि कर्मचारियों को फ्रंटलाइन वर्कर का दर्जा नहीं दिया है, जिस कारण उन्हें टीकाकरण हेतु भटकना पड़ रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए खंडपीठ ने सात जून को अगली सुनवाई पर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है।
विज्ञापन