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Prayagraj News: सोलर पैनल संग शंकरगढ़ के सिलिका सैंड की बढ़ी मांग

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 02 Mar 2024 01:52 AM IST
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Demand for silica sand of Shankargarh increased with solar panels
शंकरगढ़ की बंजर व पथरीली भूमि सरकार संग किसानों के लिए भी लाभकारी साबित होने जा रही है। सोलर पैनल संग क्षेत्र के सिलिका सैंड की तेजी से मांग बढ़ी है। इसकी वजह से पट्टे की तीन गुना से भी अधिक राशि पर नीलामी की गई।
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सौर ऊर्जा की मांग तेजी से बढ़ी है। सरकार की ओर सोलर लाइट लगाने समेत कई काम कराए जा रहे हैं। सरकारी कार्यालयों, बैंक शाखाओं आदि को सौर ऊर्जा से लैस किया जा रहा है। इसके अलावा घरों में सौर ऊर्जा के उपयोग को लेकर लोगों में खासा उत्साह है। इन वजहों से सोलर पैनल संग सिलिका सैंड की भी तेजी से मांग बढ़ी है।
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खास बात है कि केंद्र सरकार की ओर से रूफटॉप सोलर एनर्जी योजना से देश के एक करोड़ घरों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। ऐसे में सोलर पैनल संग सिलिका सैंड की मांग में भी जबरदस्त उछाल की संभावना है। इसे देख शंकरगढ़ में सिलिका सैंड के खनन की मांग तेजी से बढ़ी है। साथ ही बड़ी-बड़ी कंपनियां आगे आ रही हैं।
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इसका नतीजा रहा कि पट्टे की नीलामी में भी अधिक बोली लगी। बृहस्पतिवार को सिलिका सैंड के छह पट्टों की नीलामी हुई। सरकार की ओर से न्यूनतम 150 रुपये प्रति घनमीटर कीमत तय की गई थी। इसके विपरीत अधिकतम बोली 750 रुपये प्रति घनमीटर की लगी और इसी बोली पर सभी छह पट्टे नीलाम हो गए। इन पट्टों को दो कंपनियों ने लिया है। वरिष्ठ खान अधिकारी अजय का कहना है कि अभी तक अधिकतम 200 से 250 रुपये प्रति घनमीटर तक बोली लगती रही है।
प्रदेश में सिर्फ शंकरगढ़ में पाया जाता है सिलिका सैंड
पूरे प्रदेश में सिर्फ शंकरगढ़ में सिलिका सैंड पाया जाता है। जिले में अभी सात पट्टे संचालित हो रहे हैं, लेकिन जल्द इनकी संख्या 21 हो जाएगी। वरिष्ठ खान अधिकारी ने बताया कि आठ पट्टे जारी हो चुके हैं। पर्यावरण आदि विभागों से अनापत्तिपत्र लिए जाने की प्रक्रिया पूरी करने के बाद ये भी चालू हो जाएंगे। इनके अलावा बृहस्पतिवार को छह नए पट्टों की नीलामी हुई। इसके बाद कुल 21 पट्टे चालू हो जाएंगे। इन 21 से हर माह एक लाख घनमीटर सिलिका सैंड निकलेगा।
शंकरगढ़ में लगी है फैक्टरी
मांग को देख शंकरगढ़ में एक फैक्टरी भी लगाई गई है, जहां सिलिका सैंड की धुलाई करके शीशा बनाने के रॉ मैटेरियल के रूप में परिवर्तित किया जाता है। यह फैक्टरी आधुनिकतम तकनीक से लैस है और इसमें उच्च गुणवत्ता का रॉ मैटेरियल तैयार किया जाता है।
सिलिका सैंड से तैयार होता है पैनल
सिलिका सैंड एक प्रकार की बालू है। इसका उपयोग सोलर पैनल बनाने में किया जाता है। इसे पहाड़ को चूरकर करके बनाया बनाया जाता है। सिलिका की पहाड़ियों को तोड़कर पहले उसे वासिंग प्लांट में धोया जाता है। यह सफेद रंग का होता है। इसके बाद बोरियों में पैक कर शीशा फैक्टरियों में भेजा जाता है।

काश्तकार भी पट्टे पर दे सकते हैं जमीन
सिलिका सैंड खनन के लिए काश्तकार भी अपनी जमीन दे सकते हैं। इसके लिए उन्हें खनन विभाग में हलफनामा देना होगा और विभाग के माध्यम से ही उनको जमीन पट्टे पर दी जा सकेगी। वरिष्ठ खान अधिकारी ने बताया कि पांच किसानों ने इसके लिए आवेदन भी किया है।
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