फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Demand for lease rent without possession certificate is illegal; Court cancels demand for ₹168 crore in lease

High Court : कब्जा प्रमाणपत्र के बिना लीज रेंट की मांग अवैध; कोर्ट ने 168 करोड़ रुपये लीज रेंट की मांग की रद्द

Fri, 26 Dec 2025 08:00 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 26 Dec 2025 08:00 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट से विजन टाउन प्लानर्स प्राइवेट लिमिटेड को बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने कहा कि नोएडा विकास प्राधिकरण की ओर से आवंटित भूखंड का कब्जा प्रमाणपत्र जब तक जारी नहीं किया जाता है, तब तक लीज रेंट वसूला नहीं जा सकता।

विज्ञापन
Demand for lease rent without possession certificate is illegal; Court cancels demand for ₹168 crore in lease
अदालत। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट से विजन टाउन प्लानर्स प्राइवेट लिमिटेड को बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने कहा कि नोएडा विकास प्राधिकरण की ओर से आवंटित भूखंड का कब्जा प्रमाणपत्र जब तक जारी नहीं किया जाता है, तब तक लीज रेंट वसूला नहीं जा सकता। यह टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने लगभग 168 करोड़ रुपये लीज रेंट की मांग रद्द कर दी। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की पीठ ने दिया है।

विज्ञापन

यह मामला नोएडा के सेक्टर 94 में स्थित एक वाणिज्यिक भूखंड से संबंधित है। मूल रूप से यह भूखंड मेसर्स बीपीटीपी इंटरनेशनल ट्रेड सेंटर लिमिटेड को आवंटित किया गया था। बाद में उप-विभाजित कर प्लॉट संख्या 2ए याची कंपनी को हस्तांतरित किया गया था। नोएडा प्राधिकरण ने लगभग 168 करोड़ रुपये लीज रेंट लगाया, जिसे याची विजन टाउन प्लानर्स ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।

विज्ञापन

कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि नोएडा प्राधिकरण ने 16 फरवरी 2010 को भूखंड के उप-विभाजन की अनुमति दी। ऐसे में नियमानुसार दोनों भूखंडों के लिए पृथक साइट प्लान, उप-पट्टा विलेख और कब्जा प्रमाणपत्र प्राप्त करना अनिवार्य था। कोर्ट ने पाया कि प्राधिकरण ने याचिकाकर्ता को स्वतंत्र कब्जा प्रमाणपत्र जारी नहीं किया था। कोर्ट ने दिल्ली और इलाहाबाद हाईकोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जब तक वास्तविक भौतिक कब्जा नहीं सौंपा जाता, तब तक लीज रेंट की मांग करना अन्यायपूर्ण है। कोर्ट ने लगभग 168 करोड़ रुपये के लीज रेंट की मांग को रद्द कर दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने सीआईसी शुल्क की वसूली को भी अवैध ठहराते हुए पूरी राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ वापस करने का आदेश दिया है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed