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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Delay in release after bail is not tolerated, it is unconstitutional, BOMS system should be strictly implement

High Court : जमानत के बाद रिहाई में देरी बर्दाश्त नहीं, यह असंवैधानिक, बीओएमएस प्रणाली सख्ती से करें लागू

Wed, 05 Nov 2025 03:32 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 05 Nov 2025 03:32 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि जमानत के बाद रिहाई में देरी बर्दाश्त नहीं की जा सकती। सरकारी तंत्र की शिथिलता के कारण कैदियों की रिहाई में देरी असंवैधानिक है।

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Delay in release after bail is not tolerated, it is unconstitutional, BOMS system should be strictly implement
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि जमानत के बाद रिहाई में देरी बर्दाश्त नहीं की जा सकती। सरकारी तंत्र की शिथिलता के कारण कैदियों की रिहाई में देरी असंवैधानिक है। लिहाजा, सरकार एक दिसंबर से पूरे राज्य में बेल ऑर्डर मैनेजमेंट सिस्टम (बीओएमएस) प्रणाली सख्ती से लागू करे, ताकि जमानत आदेश ई-प्रिजन पोर्टल के जरिए सीधे जेल अधीक्षक तक पहुंचे।

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कौशाम्बी से लड़की भगाने के आरोपी सोहराब उर्फ सोराब अली की जमानत अर्जी मंजूर करने के साथ ही न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की अदालत ने उक्त टिप्पणी की है। मामले में पीड़िता ने बयान दिया है कि वह अपनी मर्जी से घर छोड़कर गई थी। इस आधार पर कोर्ट ने आरोपी की सशर्त जमानत मंजूर कर ली। साथ ही पूरे राज्य के लिए बड़ा सुधारात्मक निर्देश भी जारी किया है।
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निर्देश 1

कोर्ट ने हाईकोर्ट की सीपीसी शाखा और एनआईसी (नई दिल्ली) को निर्देशित किया कि यह सुनिश्चित करें कि जमानत आदेश तुरंत ई-प्रिजन पोर्टल के माध्यम से संबंधित जेल को भेजे जाएं। साथ ही, हाईकोर्ट के बेल और आपराधिक अपील अनुभाग को निर्देश दिया कि वे हर कैदी के जेल स्थान का रिकॉर्ड रखें।

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निर्देश 2

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पॉलिसी स्ट्रैटजी ग्रांट ऑफ बेल मामले का हवाला देते हुए कहा कि प्रतिभूति (बॉन्ड) का इलेक्ट्रॉनिक सत्यापन अदालत में ही किया जाए, क्योंकि राजस्व और पुलिस विभागों में इस प्रक्रिया के दौरान व्याप्त भ्रष्टाचार कैदियों की रिहाई में अनुचित देरी का कारण बनता है।

निर्देश 3

हाईकोर्ट ने महानिदेशक कारागार को आदेश दिया कि सभी जेलों में बेल ऑर्डर मैनेजमेंट सिस्टम (बीओएमएस) प्रणाली के तहत यह व्यवस्था लागू करें कि जैसे ही जमानत आदेश पहुंचे, कैदी को तत्काल सूचना दी जाए।

क्या है बीओएमएस प्रणाली

बीओएमएस के माध्यम से अदालत से जारी जमानत आदेश सीधे जेल प्रशासन तक ऑनलाइन पहुंचता है ताकि जमानत मिलने के बाद कैदी की रिहाई में देरी न हो। अदालत से आदेश जेल तक पहुंचने में कई दिन लग जाते हैं, जिससे कैदी अनावश्यक रूप से बंद रहता है। अब बीओएमएस से आदेश रीयल टाइम (तुरंत) जेल अधीक्षक तक पहुंचेगा।

कैसे काम करेगी बीओएमएस प्रणाली

1. अधिवक्ता हर जमानत अर्जी में स्पष्ट रूप से लिखें कि कैदी किस जेल में बंद है।
2.अदालत में जैसे ही जमानत मंजूर होगी, आदेश बीओएमएस पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।
3. यह आदेश ई-प्रिजन पोर्टल से जुड़ा रहेगा, जिससे संबंधित जेल को तुरंत सूचना मिलेगी।
4. जेल अधीक्षक उस आदेश की सत्यता ऑनलाइन देख सकेंगे।
5.आदेश मिलते ही कैदी की रिहाई की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

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