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प्रयागराज माघ मेले की तरह हरिद्वार कुंभ को बसाने का निर्णय, अखाड़ा परिषद की बैठक में पास हुआ प्रस्ताव
Sat, 02 Jan 2021 12:30 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 02 Jan 2021 12:30 AM IST
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prayagraj news : अखाड़ा परिषद की बैठक में मौजूद सा
- फोटो : prayagraj
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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने शुक्रवार को घंटों मंथन के बाद प्रयागराज माघ मेले की तर्ज पर हरिद्वार महाकुंभ को दिव्यता-भव्यता के साथ बसाने का प्रस्ताव पारित किया। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से आग्रह किया कि कोरोना कॉल में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने संगम की रेती पर दिव्यता-भव्यता के साथ माघ मेले के आयोजन के लिए अनुमति दी है और मेला बसाया जा रहा है।
परंपरा बचाने के लिए यूपी सरकार से सीख लेते हुए हरिद्वार कुंभ का आयोजन किया जाना चाहिए। यह निर्णय बाघंबरी गद्दी मठ में परिषद की हुई बैठक में तेरहों अखाड़ों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में लिया गया। इसके बाद परिषद के पदाधिकारियों ने संगम पर त्रिवेणी पूजन कर निर्विघ्न मेले के लिए प्रार्थना की।
परिषद की बैठक में कोरोना संक्रमण से उत्पन्न हालात में हरिद्वार महाकुंभ की परंपरा बचाने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई। कहा गया कि एक फरवरी से वैष्णव संप्रदाय के तीनों अनी अखाड़ों समेत सभी अखाड़ों को हरिद्वार कुंभ के लिए भूमि का आवंटन आरंभ किया जाए। परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि फरवरी 2021 तक सभी तैयारियां हरिद्वार महाकुंभ की पूरी कर ली जानी चाहिए।
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उन्होंने कहा वर्ष 2010 केकुंभ की तर्ज पर ही 2021 के हरिद्वार महाकुंभ का आयोजन होना चाहिए। इस मौके पर अखाड़ा परिषद के पदाधिकारियों ने कोरोना काल में प्रयागराज के माघ मेले को हरिद्वार में मॉडल के तौर पर प्रस्तुत करने का सुझाव दिया। इस मौके पर महंत धर्मदास महाराज, महंत प्रेम गिरि महाराज, महंत उमाशंकर भारती, महंत राजेंद्र दास समेत सभी अखाड़ों केमहंत और पीठाधीश्वर उपस्थित थे।
महाराष्ट्र में संतों की लगातार हो रही हत्याओं को लेकर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने शुक्रवार को उद्धव ठाकरे सरकार को बर्खास्त करने की मांग की। परिषद के पदाधिकारियों ने हाल में ही वहां एक और संत की हत्या पर गहरी नाराजगी जताई। परिषद के अध्यक्ष ने राष्ट्रपति से महाराष्ट्र सरकार बर्खास्त कर वहां दोबारा चुनाव कराने की मांग की। कहा कि महाराष्ट्र सरकार साधु संतों की सुरक्षा करने में पूरी तरह से नाकाम रही है। ऐसे में उद्धव ठाकरे की सरकार का महाराष्ट्र में बने रहने का कोई औचित्य नहीं है। महंत नरेंद्र गिरि ने बताया कि अखाड़ा परिषद की अगली बैठक जल्द ही हरिद्वार में होगी।
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परंपरा बचाने के लिए यूपी सरकार से सीख लेते हुए हरिद्वार कुंभ का आयोजन किया जाना चाहिए। यह निर्णय बाघंबरी गद्दी मठ में परिषद की हुई बैठक में तेरहों अखाड़ों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में लिया गया। इसके बाद परिषद के पदाधिकारियों ने संगम पर त्रिवेणी पूजन कर निर्विघ्न मेले के लिए प्रार्थना की।
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परिषद की बैठक में कोरोना संक्रमण से उत्पन्न हालात में हरिद्वार महाकुंभ की परंपरा बचाने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई। कहा गया कि एक फरवरी से वैष्णव संप्रदाय के तीनों अनी अखाड़ों समेत सभी अखाड़ों को हरिद्वार कुंभ के लिए भूमि का आवंटन आरंभ किया जाए। परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि फरवरी 2021 तक सभी तैयारियां हरिद्वार महाकुंभ की पूरी कर ली जानी चाहिए।
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उन्होंने कहा वर्ष 2010 केकुंभ की तर्ज पर ही 2021 के हरिद्वार महाकुंभ का आयोजन होना चाहिए। इस मौके पर अखाड़ा परिषद के पदाधिकारियों ने कोरोना काल में प्रयागराज के माघ मेले को हरिद्वार में मॉडल के तौर पर प्रस्तुत करने का सुझाव दिया। इस मौके पर महंत धर्मदास महाराज, महंत प्रेम गिरि महाराज, महंत उमाशंकर भारती, महंत राजेंद्र दास समेत सभी अखाड़ों केमहंत और पीठाधीश्वर उपस्थित थे।
- हरिद्वार कुंभ पूरी दिव्यता और भव्यता के साथ होगा। इसके लिए माघ मेले की तैयारियों से संबंधित वीडियो क्लिप व भूमि आवंटन संबंधी जानकारियों के अलावा परिषद की बैठक में लिए गए निर्णयों से उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत को अवगत करा दिया गया है। कुंभ मेला हर हाल में बसाया जाएगा। - महंत नरेंद्र गिरि, अध्यक्ष अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद।