प्रयागराज : फाफामऊ घाट पर दफनाए गए शवों का होगा अंतिम संस्कार, अपर नगर आयुक्त के नेतृत्व में चार टीम गठित
फाफामऊ गंगा घाट पर दफनाए गए शवों का अंतिम संस्कार कराया जाएगा। इसको लेकर नगर निगम के अपर नगर आयुक्त के नेतृत्व में चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। घाट पर बड़ी संख्या में शव दफन किए गए हैं। कटान के चलते शव बाहर आ गए हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
फाफामऊ घट पर रेत में दफन किए गए शवों का सम्मानजनक तरीके से अंतिम संस्कार कराया जाएगा। गंगा में कटान की वजह से रेत में दबे शवों के बाहर दिखने और कुत्तों के नोचने की आशंका के बाद ऐसे शवों के अंतिम संस्कार के लिए नगर निगम ने दो पालियों में 10 कर्मचारी नियुक्त कर दिए गए हैं।
मुक्तिदायनी के तट पर महीने भर के दौरान 50 से अधिक शव दफनाए जा चुके हैं। रोक के बावजूद गंगा तट पर शवों को रेत समाधि दिए जाने के मुद्दे को अमर उजाला ने अभियान के रूप में प्रमुखता से उठाया था। इस पर जहां जिलाधिकारी संजय कुमार खत्री ने रेत समाधि पर सख्ती से रोक लगा दी थी, वहीं अब नगर निगम वहां दफनाए गए शवों का सम्मानजनक तरीके से अंतिम संस्कार कराने के लिए आगे आया है।
नगर आयुक्त चंद्रमोहन गर्ग ने श्मशान घाट का निरीक्षण करने के बाद वहां दफनाए गए शवों के अंतिम संस्कार के लिए कमेटी गठित कर दी है।अपर नगर आयुक्त अरविंद कुमार राय के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम लगाई गई है। इनमें श्मशान घाट के पर्यवेक्षण अधिकारी के तौर पर जोनल अधिकारी नीरज कुमार सिंह, सह प्रयवेक्षण अधिकारी कर्नल आरबी सिंह और व्यवस्थाधिकारी के तौर पर एक्सईएन अनिल कुमार मौर्य की तैनाती की गई है।
इनके अलावा अवर अभियंता जगवीर सिंह समेत तीन अन्य कर्मचारी लगाए गए हैं। अंतिम संस्कार के लिए दो पालियों में कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। कहा जा रहा है कि इस बार शवों के अंतिम संस्कार को लेकर नगर निगम समय से जागा है।
नगर आयुक्त की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि बारिश के समय गंगा के जलस्तर में वृद्धि की वजह से रेत में दफनाए गए शवों के बाहर दिखाई पड़ने और कुत्तों व अन्य शिकारी जानवरों के नोच कर क्षत विक्षत कर प्रदूषण फैलाने की आशंका बनी रहती है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए वहां दफनाए गए शवों का अंतिम संस्कार कराया जाएगा। कोरोना काल में शवों के गंगा में बहने को लेकर देश भर में शोर मचा था। इसके बाद नगर निगम की ओर से छह सौ से अधिक शवों का अंतिम संस्कार कराया गया था। नगर निगम की ओर से एक शव के अंतिम संस्कार के लिए 43 सौ रुपये दिए जाने की व्यवस्था रही है।
फाफामऊ घाट पर रेत समाधि के बाद शव दिखाई न देने पाएं और नए शव न दफनाए जाएं, इसे सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे शवों से प्रदूषण न फैलने पाए इसके लिए बाहर दिखने वाले शवों के अंतिम संस्कार की व्यवस्था की गई है। गणेश केसरवानी, महापौर।
फाफामऊ घाट पर दफनाए गए शवों को गंगा में किसी भी दशा में बहने नहीं दिया जाएगा। ऐसे शवों के अंतिम संस्कार के लिए समय रहते कर्मचारियों की ड्यूटी लगा दी गई है। जो भी शव दिखाई देंगे, उनका अंतिम संस्कार कराया जाएगा। - चंद्रमोहन गर्ग, नगर आयुक्त।