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Allahabad High Court : डीसीपी ने डीएनए परीक्षण नहीं कराने की बात स्वीकारी, हाईकोर्ट ने आरोपी को दी जामानत
Sat, 16 May 2026 05:24 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 16 May 2026 05:24 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर बृहस्पतिवार को डीसीपी गंगानगर कुलदीप सिंह गुनावत अदालत में उपस्थित हुए। उन्होंने स्वीकार किया कि आरोपी का डीएनए नमूना मिलान के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला नहीं भेजा गया था।
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अदालत का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर बृहस्पतिवार को डीसीपी गंगानगर कुलदीप सिंह गुनावत अदालत में उपस्थित हुए। उन्होंने स्वीकार किया कि आरोपी का डीएनए नमूना मिलान के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला नहीं भेजा गया था। जांच में लापरवाही को देखते हुए और वैज्ञानिक साक्ष्यों के अभाव में न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ ने आरोपी देभी खरवार को सशर्त जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है।
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प्रयागराज के नवाबगंज थाना क्षेत्र में 2021 में एक महिला की सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी। मामले में आरोपी देभी खरवार मई 2022 से जेल में बंद था। उसने जमानत के हाईकोर्ट में अर्जी दायर की। याची के अधिवता ने दलील दी कि दलील दी कि पुलिस ने मृतका के शरीर व कपड़ों पर मिले सीमेन से आरोपी के डीएनए का मिलान नहीं कराया। कोर्ट ने इस पर एसीपी को तलब कर जवाब मांगा था।
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कोर्ट के आदेश पर डीसीपी कोर्ट में उपस्थित हुए और बताया कि पीड़िता के शरीर से मिले सीमेन से आरोपी के डीएनए का मिलान नहीं कराया गया। डीसीपी ने कोर्ट को आश्वस्त किया है कि इस मामले में आगे की जांच के लिए संबंधित अदालत में आवेदन दे दिया गया है। लापरवाही के लिए जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
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कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि आरोपी को अपराध से जोड़ने के लिए कोई ठोस साक्ष्य रिकॉर्ड पर नहीं है। इसी मामले के अन्य सह-आरोपी पहले ही जमानत पा चुके थे। इस पर कोर्ट ने आरोपी को सशर्त जमानत दे दी।