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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Daughters not to go marginalized

बेटियां न चली जाएं हाशिए पर

Mon, 25 Jan 2016 01:39 AM IST
योगेंद्र पांडेय, अमर उजाला ब्यूरो/इलाहाबाद
योगेंद्र पांडेय, अमर उजाला ब्यूरो/इलाहाबाद Updated Mon, 25 Jan 2016 01:39 AM IST
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इलाहाबाद। महिलाओं की संख्या में इन दिनों भले ही इजाफा हुआ हो लेकिन जनगणना के आंकड़े बता रहे हैं कि छह वर्ष तक के बच्चों में लड़कियों की संख्या काफी कम है। कुछ वर्षों में अल्ट्रासाउंड केंद्रों की संख्या दो गुना से ज्यादा हो गई है और इनमें से कुछ  केंद्रों में भ्रूण लिंग परीक्षण भी खुलेआम जारी है। ऐसे में इस आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता कि विकास के क्षेत्र में तेजी से  कदम आगे बढ़ाने वाली संगम नगरी सामाजिक तौर पर अब भी पिछड़ती जा रही है।

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दस साल की तुलना करें तो पुरुषों की संख्या में पांच लाख छह हजार 973 का इजाफा हुआ है जबकि महिलाओं की संख्या पांच लाख 16 हजार 662। पहली नजर में आंकड़े कम से कम इस मामले में संतोषजनक हैं कि दस वर्षों में पुरुषों और महिलाओं के बीच का अनुपात कम हुआ है। पहले जहां एक हजार पुरुषों के मुकाबले 879 महिलाएं थीं, वहीं अब महिलाओं की संख्या 902 पहुंच गई है लेकिन छह वर्ष से कम उम्र वालों की जनसंख्या पर नजर डालें तो आंकड़े चौंकाते हैं।

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प्रशासन की ओर से जारी जनगणना के अंतिम आंकड़े बता रहे हैं कि जिले में छह वर्ष तक की उम्र वाले बच्चों की संख्या आठ लाख 32 हजार 870 है। इनमें बेटों की संख्या चार लाख 37 हजार 809 और बेटियों की संख्या तीन लाख 95 हजार 43 है। यानी बेटों की संख्या बेटियों के मुकाबले 42 हजार 766 अधिक है। अब सवाल यह कि दस वर्षों में कुल आबादी की तुलना करने पर पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की संख्या में ज्यादा वृद्धि होने के बावजूद छह वर्ष तक की उम्र वाले बच्चों में बेटियों की संख्या बेटों के मुकाबले कैसे कम हो गई? 

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आंकड़े यही संकेत दे रहे हैं कि अब भी कहीं न कहीं लड़कियों को बोझ समझा जा रहा है। इस मानसिकता के लोग अवैध रूप से अल्ट्रासाउंड केंद्रों की मदद भी ले रहे हैं। शहरी क्षेत्र की स्थिति और भी खराब है। यहां एक हजार बेटों के मुकाबले बेटियों की संख्या महज 874 है जो दस साल पहले की स्थिति से भी बदतर है। हालांकि ग्रामीण इलाकों में यह अनुपात काफी कम हो गया है। वहां छह वर्ष की तक आयु वालों में एक हजार बेटों के मुकाबले बेटियों की संख्या 906 पहुंच गई है, जो पूरे जिले में औसत से ज्यादा है और संतोषजनक भी। 

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