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भारतीय संस्कृति का दर्शन आत्मशक्ति के विकास की यात्रा: सोनल मानसिंह
Sat, 13 Jun 2020 09:41 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 13 Jun 2020 09:41 PM IST
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sonal mansingh
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प्रख्यात ओडिशी नृत्यांगना पद्मविभूषण सोनल मानसिंह ने शनिवार को ऑनलाइन संवाद में कहा कि अब हमें स्वधर्म के माध्यम से संस्कृति और परंपरा की जड़ों को मजबूत करना होगा। एनसीजेडसीसी की ओर से आयोजित ‘संस्कृति में दर्शन’ विषयक संवाद में उन्होंने कहा कि इस दौर में मानवता सबसे बड़ा धर्म है।
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हमारा अतीत और इतिहास इस बात का साक्षी है कि धर्म, सिद्धांत के साथ मानवता की रक्षा के लिए हमारे नायक कभी भी पीछे नहीं रहे हैं। नृत्यांगना सोनल मानसिंह ने उपनिषदों के सूत्र वाक्य शरीर माध्यम खलुधर्म साधनम्... की याद दिलाते हुए कहा कि अपने शरीर को निरोग रखते हुए ही संपूर्ण विश्व को एक परिवार की तरह देखने-समझने की भारतीय संस्कृति की परंपरा रही है।
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हम नमस्ते करते हैं, इसका सीधा संबंध हमारी संस्कृति और जीवन दर्शन से है। हम नमन करेंगे तभी हमारा प्रणाम स्वीकार होगा। ‘नमस्ते’ उस परम तत्व को प्रणाम है, जो निर्गुण-निराकार है। लेकिन, उसमें शिव शक्ति उर्जा समाहित है। भारतीय संस्कृति में दर्शन की परंपरा वेदों से चली आ रही है। यह अत्यंत प्राचीन,सनातन है।
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उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति का दर्शन दिखावा नहीं है। यह हमारी आत्मशक्ति के विकास की एक ऐसी यात्रा है, जिसकी बुनियाद आस्था व भावना की वैज्ञानिक पृष्ठभूमि पर आधारित है। हम गंगा में स्नान इसलिए करते हैं क्योंकि हमारे लिए वह मां रूप में पूजित है। केंद्र निदेशक इंद्रजीत सिंह ग्रोवर ने आभार जताया।