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बिजली विभाग में ओवरहेडेड लाइन के निर्माण में करोड़ों का खेल
Mon, 27 May 2019 01:20 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 27 May 2019 01:20 AM IST
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फाइल फोटो
विद्युत माध्यमिक कार्य खंड में 33केवी क्षमता की ओवरहेडेड लाइन के निर्माण में करोड़ों रुपये का गोलमाल सामने आया है। अधिशासी अभियंता बीके शर्मा की जांच में पता चला है कि 18 किमी लंबी लाइन के प्रोजेक्ट में दो किमी काम कागज पर ही दिखाया गया। रेलवे लाइन क्रास कराकर मऊ आइमा उपकेंद्र को जोड़ने की बजाए पांच किमी लंबी लाइन बिना किसी प्रयोजन के रेलवे लाइन के किनारे-किनारे ले जाई गई, जिसका कोई औचित्य नहीं था। वाराणसी की फैब्रीकेटर इंडिया कंपनी को दिए गए इस ठेके में तत्कालीन एक्सईएन, एई, जेई ने फर्जी बिलों पर ही भुगतान करा दिया है। इस मामले का खुलासा होने के बाद महकमे में हड़कंप मच गया है। इसमें कई अभियंताओं पर गाज गिरने के संकेत मिले हैं।
33केवी क्षमता वाले मऊ आइमा उपकेंद्र को सोरांव से जोड़ने की 1.43 करोड़ रुपये की योजना का ठेका अधीक्षण अभियंता एसके पाठक ने वर्ष 2015-16 में फ्रैब्रीकेटर इंडिया को दिया था। फिलहाल एसई पाठक का इस मंडल से विद्युत कार्य मंडल में स्थानांतरित कर दिए गए हैं। इस परियोजना पर काम शुरू कराया तत्कालीन एक्सईएन राम दुलारेसोनकर ने। मौजूदा एक्सईएन शर्मा के मुताबिक 132 केवी सोरांव बिजली घर से सीधे रेलवे लाइन क्रास कराकर 33 केवी मऊआइमा बिजली घर तक ओवरहेडेड विद्युत लाइन बनाई जानी चाहिए थी, लेकिन जान बूझकर सोरांव बिजली घर से निकलने के बाद लाइन रेलवे लाइन क्रास न कराकर, रेलवे लाइन के समानांतर सरपताई नहर से प्रयागराज -लखनऊ राजमार्ग की ओर मोड़ कर राजमार्ग क्रास कराया गया।
इतना ही नहीं, राजमार्ग के समानांतर करीब 2.5 किमी आगे मऊआइमा थाने से वापस दोबारा लाइन राजमार्ग क्रास कराई गई। इसके बाद सघन बस्ती से होकर फिर रेलवे लाइन क्रास कराई गई। जांच में पता चला है कि यह कार्यक्षेत्र जेई महेंद्र कुमार का नहीं था, लेकिन तत्कालीन अधिशासी अभियंता उनको नापजोख की जिम्मेदारी दे रखी थी। जांच में यह भी तथ्य सामने आया कि रेलवे लाइन क्रास करने पर सिर्फ तीन से पांच लाख रुपये ही रेलवे को भुगतान करना पड़ता, लेकिन बस्ती से रेलवे लाइन क्रास कराने के लिए विभाग की ओर से रेलवे को 58 लाख रुपये देने पड़े।
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अधिशासी अभियंता फाफामऊ ने राजमार्ग पर बनी लाइन को बिना कार्य खंड से अनुमति प्राप्त किए अपने स्तर से प्राक्कलन रिपोर्ट बनवाकर शिफ्ट करा दिया गया। इस परियोजना के लिए जेई महेंद्र कुमार को एक्सईएन की ओर से नियमों को ताक पर रखकर दो मापन पुस्तिकाओं के स्थान पर 13 मापन पुस्तिकाएं जारी की गई थीं। फिलहाल जेई महेंद्र कुंभ मंडल में तैनात हैं।
चोरी की रिपोर्ट तक दर्ज नहीं हुई
नवनिर्मित मऊआइमा बिजली घर का ताला तोड़कर उपकरण और उनमें लगे तांबे के सामान चोरी कर लिए गए हैं। इस चोरी की घटना के बाद ही जब पड़ताल शुरू हुआ तो यह बड़ी गड़बड़ी सामने आई। शिकायत के बाद भी अभी तक इस मामले में पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की है।
जेई से फर्जी एमबी कराकर और सहायक अभियंता से बिल सत्यापित कराकर फर्जी हस्ताक्षर से तत्कालीन अधिशासी अभियंता ने कई बड़े भुगतान किए हैं। इसमें करोड़ों रुपये का गोलमाल हुआ है। बिलों का मिलान किया जा रहा है। इस उपकेंद्र के निर्माण में घोर अनियमितताएं पाई गईं हैं। बीके शर्मा, एक्सईएन।
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33केवी क्षमता वाले मऊ आइमा उपकेंद्र को सोरांव से जोड़ने की 1.43 करोड़ रुपये की योजना का ठेका अधीक्षण अभियंता एसके पाठक ने वर्ष 2015-16 में फ्रैब्रीकेटर इंडिया को दिया था। फिलहाल एसई पाठक का इस मंडल से विद्युत कार्य मंडल में स्थानांतरित कर दिए गए हैं। इस परियोजना पर काम शुरू कराया तत्कालीन एक्सईएन राम दुलारेसोनकर ने। मौजूदा एक्सईएन शर्मा के मुताबिक 132 केवी सोरांव बिजली घर से सीधे रेलवे लाइन क्रास कराकर 33 केवी मऊआइमा बिजली घर तक ओवरहेडेड विद्युत लाइन बनाई जानी चाहिए थी, लेकिन जान बूझकर सोरांव बिजली घर से निकलने के बाद लाइन रेलवे लाइन क्रास न कराकर, रेलवे लाइन के समानांतर सरपताई नहर से प्रयागराज -लखनऊ राजमार्ग की ओर मोड़ कर राजमार्ग क्रास कराया गया।
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इतना ही नहीं, राजमार्ग के समानांतर करीब 2.5 किमी आगे मऊआइमा थाने से वापस दोबारा लाइन राजमार्ग क्रास कराई गई। इसके बाद सघन बस्ती से होकर फिर रेलवे लाइन क्रास कराई गई। जांच में पता चला है कि यह कार्यक्षेत्र जेई महेंद्र कुमार का नहीं था, लेकिन तत्कालीन अधिशासी अभियंता उनको नापजोख की जिम्मेदारी दे रखी थी। जांच में यह भी तथ्य सामने आया कि रेलवे लाइन क्रास करने पर सिर्फ तीन से पांच लाख रुपये ही रेलवे को भुगतान करना पड़ता, लेकिन बस्ती से रेलवे लाइन क्रास कराने के लिए विभाग की ओर से रेलवे को 58 लाख रुपये देने पड़े।
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अधिशासी अभियंता फाफामऊ ने राजमार्ग पर बनी लाइन को बिना कार्य खंड से अनुमति प्राप्त किए अपने स्तर से प्राक्कलन रिपोर्ट बनवाकर शिफ्ट करा दिया गया। इस परियोजना के लिए जेई महेंद्र कुमार को एक्सईएन की ओर से नियमों को ताक पर रखकर दो मापन पुस्तिकाओं के स्थान पर 13 मापन पुस्तिकाएं जारी की गई थीं। फिलहाल जेई महेंद्र कुंभ मंडल में तैनात हैं।
चोरी की रिपोर्ट तक दर्ज नहीं हुई
नवनिर्मित मऊआइमा बिजली घर का ताला तोड़कर उपकरण और उनमें लगे तांबे के सामान चोरी कर लिए गए हैं। इस चोरी की घटना के बाद ही जब पड़ताल शुरू हुआ तो यह बड़ी गड़बड़ी सामने आई। शिकायत के बाद भी अभी तक इस मामले में पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की है।
जेई से फर्जी एमबी कराकर और सहायक अभियंता से बिल सत्यापित कराकर फर्जी हस्ताक्षर से तत्कालीन अधिशासी अभियंता ने कई बड़े भुगतान किए हैं। इसमें करोड़ों रुपये का गोलमाल हुआ है। बिलों का मिलान किया जा रहा है। इस उपकेंद्र के निर्माण में घोर अनियमितताएं पाई गईं हैं। बीके शर्मा, एक्सईएन।