{"_id":"5f319f0e8ebc3e4ad61098de","slug":"criminal-law-cannot-be-filed-for-violation-of-barren-land","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाईकोर्ट ने कहा, बंजर जमीन के अतिक्रमण पर दर्ज नहीं हो सकता आपराधिक मुकदमा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाईकोर्ट ने कहा, बंजर जमीन के अतिक्रमण पर दर्ज नहीं हो सकता आपराधिक मुकदमा
Tue, 11 Aug 2020 12:55 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Tue, 11 Aug 2020 12:55 AM IST
विज्ञापन
इलाहाबाद हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि गांव सभा की बंजर भूमि पर अतिक्रमण के मामले में आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं किया जा सकता। ऐसा करना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। इसके लिए राजस्व संहिता में दिए गए प्रावधानों के तहत ही कार्यवाही की जा सकती है। यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल ने शाहजहांपुर, बांदा थाना क्षेत्र के गांव ड्यूहाना के निवासी दो भाइयों मुंशीलाल व किशोरी सिंह के खिलाफ कायम आपराधिक मुकदमे को रद्द करते हुए दिया है। दोनों ने मुकदमे को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी।
विज्ञापन
दोनों के खिलाफ 20 जनवरी 2018 को सरकारी जमीन पर अतिक्रमण, लोक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में पुलिस ने याचियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। जिस पर कोर्ट ने सम्मन भी जारी कर दिया। इसकी वैधता को याचिका मे चुनौती दी गई थी। याची का कहना है कि विवादित भूमि राजस्व अभिलेख में उसकी पैतृक संपत्ति के रूप मे दर्ज है।
विज्ञापन
यदि बंजर भूमि पर अतिक्रमण किया गया है तो राजस्व संहिता के तहत कार्रवाई की जा सकती है। बंजर भूमि सार्वजनिक उपयोग की भूमि नहीं है। जिसका कानूनी प्रक्रिया से नियमितीकरण किया जा सकता है। इस मामले में लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई नहीं की जा सकती। राजस्व अदालत से अतिक्रमण साबित नहीं हुआ है। ऐसे में याची के खिलाफ कोई भी आपराधिक मुकदमा नहीं बनता है।
विज्ञापन
कोर्ट ने कहा कि राजस्व संहिता की धारा 67 में ऐसे मामलों में कार्यवाही की प्रक्रिया विस्तार से दी गई है। एसडीएम को लेखपाल या भूमि प्रबंधक समिति की शिकायत पर कार्रवाई करने का अधिकार है। ऐसे मामले लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
इस कानून के तहत दंगे या प्रदर्शन के दौरान लोक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर ही कार्रवाई की जा सकती है। कोर्ट ने कहा है कि अतिक्रमण मामले में सक्षम कोर्ट से दोष सिद्ध होने के बाद ही आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है। गांव सभा की भूमि से अतिक्रमण हटाने की कानूनी प्रक्रिया तय है। इसमें एफआईआर नहीं दर्ज की जा सकती।