फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   UP Police ' Hppu Singh from Bejar , a glut of laggards

यूपी पुलिस ‘हप्पू सिंह’ से बेजार, फिसड्डियों की भरमार

Sat, 04 Jun 2016 01:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sat, 04 Jun 2016 01:45 AM IST
विज्ञापन
UP Police ' Hppu Singh from Bejar , a glut of laggards
फ‌िटनेस - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
मथुरा में जो कुछ हुआ, वह नया नहीं है। हां इतना जरूर है कि इस बार घटना का दायरा बड़ा है, वरना इन खामियों के कारण खाकी के पिटने के यहां भी कई उदाहरण हैं। अगर आप एक टीवी चैनल पर प्रसारित होने वाले बहुचर्चित सीरियल ‘भाभी जी घर पर हैं’ देखते हैं तो बेहद रोचक किरदार ‘हप्पू सिंह’ भी याद होगा। सीरियल में यूपी पुलिस के हप्पू सिंह नाम के दरोगा की इंट्री होते ही दर्शकों को हंसी आने लगती है। हालांकि हास्य-व्यंग्य से जुड़ा यह किरदार सीरियल में ही अच्छा लगता है।
विज्ञापन


आम आदमी नहीं चाहता कि उसकी सुरक्षा में तैनात पुलिस कर्मी ‘हप्पू सिंह’ जैसे हों लेकिन यूपी पुलिस में इस किरदार के कई सिपाही, दरोगा और अफसर नजर आ जाएंगे। मुंह में पान, निकली हुई तोंद, अस्त-व्यस्त वर्दी, स्वभाव से आलसी, बिना न्योछावर लिए कोई काम न करना, हाथ में सिर्फ एक डंडा या चलन से बाहर हो चुके असलहों को लेकर घूमना और ऐसी गाड़ी रखना जिसे स्टार्ट करना भी बड़ी चुनौती हो। ऐसे में विपरीत परिस्थितियों में मोर्चा लेना पड़े तो मुकाबले में डटे रह पाना मुश्किल ही है। 
विज्ञापन


माह भर पहले की बात है कि बदमाशों ने प्रतापगढ़ में थाने में घुसकर होमगार्ड की हत्या कर दी थी। प्रतापगढ़ में ही होटल के बाहर बीच-बचाव करने पहुंचे एक इंस्पेक्टर की गोली मारकर हत्या कर दी गई। पिछले साल सलोरी में हुए उपद्रव के दौरान छात्रों से हुई झड़प में सीओ समेत कई पुलिस कर्मी पिट गए। इलाहाबाद में पिछले दिनों एक चर्चित मामला तब सामने आया, जब हत्यारोपी गोदऊ पासी खुल्दाबाद थाने के सामने पुलिस कर्मियों के सामने भाग निकला। कुछ पुलिस कर्मियों ने उसे दौड़ाया लेकिन यहां भी उनकी फिटनेस आड़े आ गई। अपराधी के पीछे भागते पुलिस कर्मी मुंह के बल गिरे और गोदऊ मोटरसाइकिल पर बैठकर निकल गया।

विज्ञापन
विज्ञापन


यह हालत तब है, जब अफसर पुलिस महकमे में बड़े बदलाव का दावा करते हैं। बृहस्पतिवार को इलाहाबाद आए डीजीपी जावीद अहमद बोले गए कि प्रदेश की कानून व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त है। हालांकि अफसरों के दावों के विपरीत पुलिस को आधुनिक बनाने के लिए बड़ी रकम खर्च किए जाने के बाद भी खाकी की कार्यशैली में कोई बदलाव नजर नहीं आता। एक बार भर्ती होने और ट्रेनिंग पूरी होने के बाद महकमा अपने सिपाही और दरोगाओं की शारीरिक दक्षता पर कोई ध्यान नहीं देता है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में पुलिस कर्मियों की तोंद निकल आती है। वे बीपी और डायबटीज के मरीज हो जाते हैं। सौ मीटर दौड़ने के बाद ही हांफने लगते हैं। 


पिछले साल जून के महीने में जिले की कमान संभालने के बाद नए कप्तान ने थानेदारों की चुस्ती और फुर्ती ो परखने के लिए मॉक ड्रिल किया था। इसमें ज्यादातर थानेदार फेल हो गए थे। कई दरोगा तो पिस्टल को लोड भी नहीं कर पाए। कुछ पुलिस कर्मियों को पिस्टल लोड करने में इतनी मशक्कत करनी पड़ी कि मैगजीन ही हाथ से छूट कर गिर पड़ी। 


एक बार महकमे में भर्ती होने के बाद पुलिस कर्मियों को तोंद की फिक्र नहीं होती है, क्योंकि उन्हें मालूम है कि अनफिट हो भी गए तो नौकरी र आंच नहीं आने वाली है। ऐसे में पुलिस वाले तोंद निकलने की कोई परवाह नहीं करते हैं। महकमे की ओर से भी उन्हें फिट और स्मार्ट बनाए रखने के लिए कोई ध्यान दिया नहीं जाता है। 

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed