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शमी हत्याकांड में तीन गिफ्तार, ब्लाक प्रमुख ने दी थी सुपारी
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Tue, 01 Aug 2017 02:03 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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एसटीएफ ने मऊआइमा के पूर्व ब्लाक प्रमुख मोहम्मद शमी की हत्या के मुख्य सूत्रधार पांच हजार रुपये के इनामी राजकुमार मौर्या समेत तीन बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया। उनके पास असलहे और चोरी की बाइक भी मिली। अब खुलासा हुआ है कि हत्याकांड में नामजद ब्लाक प्रमुख सुधीर मौर्या और भाजपा से जुड़े अभिषेक यादव ने ही कत्ल की सुपारी दी थी। गिरफ्तार शूटरों से पूछताछ में मालूम हुआ कि उन्होंने गुड़गांव और प्रतापगढ़ में तीन कत्ल की सुपारी ले रखी है।
पूर्व ब्लाक प्रमुख शमी की हत्या 19 मार्च की रात सुल्तानपुर खास स्थित उनके निवास के सामने गोलियां मारकर की गई थी। घटना में मौजूदा ब्लाक प्रमुख सुधीर मौर्या, भाजपा नेता अभिषेक यादव तथा दुबाही गांव के जाबिर के खिलाफ केस लिखा गया। इनसे शमी की अदावत थी। जाबिर समेत कई लोगों को पुलिस ने जेल भेजा। कुछ दिन बाद हत्या में शामिल शूटरों विमल कहार, रोहित सिंह, लवकुश, बलिकरन को गिरफ्तार करने पर पता चला कि इस वारदात की सुपारी प्रतापगढ़ में मलियाना टोला निवासी ठेकेदार राजकुमार मौर्या ने दी थी। उसके पकड़ में आने पर पता चलना था कि उसने क्यों और किसके कहने पर सुपारी दी थी। उसकी गिरफ्तारी पर पांच हजार रुपये का पुरस्कार घोषित कर दिया गया। एसटीएफ इलाहाबाद यूनिट के इंस्पेक्टर अजय सिंह के नेतृत्व में टीम ने रविवार रात प्रतापगढ़ से बाइक पर सोरांव आ रहे राजकुमार को दो अपराधियों समेत दबोच लिया। उसके साथ गिरफ्तार अपराधियों में प्रतापगढ़ के कोतवाली इलाके में संग्रामपुर का अजय मौर्या तथा मऊआइमा में मऊ दोस्तपुर गांव का अनिल कुमार मौर्या उर्फ डब्लू शामिल है। उन तीनों के कब्जे से .32 बोर के दो पिस्टल, एक तमंचा तथा कारतूस मिले। बरामद बाइक के बारे में पता चला कि स्मैक तस्कर दुर्गेश सिंह गोड़े ने चुराकर इन अपराधियों को दी थी।
एसटीएफ के डिप्टी एसपी प्रवीण सिंह चौहान के मुताबिक, राजकुमार ने कुबूला कि सुधीर मौर्या और अभिषेक यादव ने उसे चार लाख रुपये में पूर्व ब्लाक प्रमुख के कत्ल की सुपारी दी थी। उन दोनों से शमी की दुश्मनी थी। अभिषेक को डर था कि शमी उसका कत्ल करा सकते हैं। इसलिए उसने शमी को मरवाने की साजिश रची। अभिषेक के कहने पर अनिल ने राजकुमार को चार लाख रुपये दिए तो उसने प्रतापगढ़ के बदमाशों से संपर्क कर शमी का कत्ल करा दिया। फिर राजकुमार और अनिल चंडीगढ़ चले गए थे। वहां से लौटकर कुछ दिन कौशाम्बी में छिपे रहे।
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एसटीएफ के मुताबिक, पिछले 15 दिन से अनिल उर्फ डब्लू और राजकुमार वाराणसी में तेलियाबाग स्थित एक गेस्टहाउस में ठहरे थे। अनिल का ममेरा भाई आलोक मौर्या सिपाही है। वह वाराणसी में तैनात है। उसने ही अपनी आईडी से कमरा बुक कराकर अनिल और राजकुमार को गेस्टहाउस में ठहराया था। वे दोनों वाराणसी से प्रतापगढ़ में बदमाश अजय मौर्या से मिलने गए थे। उससे मिलने के बाद वापस वाराणसी जाने के लिए सिविल लाइंस बस अड्डा जाते समय पकड़े गए। अब इलाहाबाद पुलिस इस सिपाही की भूमिका के बारे में वाराणसी पुलिस को रिपोर्ट भेजेगी ताकि उस पर कार्रवाई की जा सके।
एसटीएफ ने बताया कि गिरफ्तार अजय मौर्या पेशेवर अपराधी है। करीब साढ़े तीन साल पहले दिल्ली में एक मकान में डकैती के मामले में पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। आठ मार्च को वह तिहाड़ जेल से रिहा हुआ था। राजकुमार ने पहले उसे कत्ल की सुपारी देनी चाही थी लेकिन उसने इनकार कर दिया। अजय ने कुबूला कि उसे गु़ड़गांव जेल में बंद माफिया अनिल राठी ने गुड़गांव के ही ठेकेदार कौसर के कत्ल की सुपारी दी है। राठी से उसकी मुलाकात तिहाड़ जेल में हुई थी। ठेकेदार के कत्ल के लिए असलहे का इंतजाम सुल्तानपुर जेल में बंद अपराधी पंकज सिंह के जरिए होनी थी। इसके अलावा 2014 में मारे गए कल्लू डान के भाई विनय सिंह ने हत्या का बदला लेने के लिए प्रतापगढ़ में अचलपुर के अभय सिंह और गोपालापुर के सर्वेश सिंह के कत्ल का ठेका चार लाख रुपये में अजय को दिया था। दो-तीन दिन में वह दूसरे बदमाशों के साथ मिलकर प्रतापगढ़ में जेल रोड रेलवे क्रासिंग के निकट सर्वेश और अभय का कत्ल करने वाला था।
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पूर्व ब्लाक प्रमुख शमी की हत्या 19 मार्च की रात सुल्तानपुर खास स्थित उनके निवास के सामने गोलियां मारकर की गई थी। घटना में मौजूदा ब्लाक प्रमुख सुधीर मौर्या, भाजपा नेता अभिषेक यादव तथा दुबाही गांव के जाबिर के खिलाफ केस लिखा गया। इनसे शमी की अदावत थी। जाबिर समेत कई लोगों को पुलिस ने जेल भेजा। कुछ दिन बाद हत्या में शामिल शूटरों विमल कहार, रोहित सिंह, लवकुश, बलिकरन को गिरफ्तार करने पर पता चला कि इस वारदात की सुपारी प्रतापगढ़ में मलियाना टोला निवासी ठेकेदार राजकुमार मौर्या ने दी थी। उसके पकड़ में आने पर पता चलना था कि उसने क्यों और किसके कहने पर सुपारी दी थी। उसकी गिरफ्तारी पर पांच हजार रुपये का पुरस्कार घोषित कर दिया गया। एसटीएफ इलाहाबाद यूनिट के इंस्पेक्टर अजय सिंह के नेतृत्व में टीम ने रविवार रात प्रतापगढ़ से बाइक पर सोरांव आ रहे राजकुमार को दो अपराधियों समेत दबोच लिया। उसके साथ गिरफ्तार अपराधियों में प्रतापगढ़ के कोतवाली इलाके में संग्रामपुर का अजय मौर्या तथा मऊआइमा में मऊ दोस्तपुर गांव का अनिल कुमार मौर्या उर्फ डब्लू शामिल है। उन तीनों के कब्जे से .32 बोर के दो पिस्टल, एक तमंचा तथा कारतूस मिले। बरामद बाइक के बारे में पता चला कि स्मैक तस्कर दुर्गेश सिंह गोड़े ने चुराकर इन अपराधियों को दी थी।
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एसटीएफ के डिप्टी एसपी प्रवीण सिंह चौहान के मुताबिक, राजकुमार ने कुबूला कि सुधीर मौर्या और अभिषेक यादव ने उसे चार लाख रुपये में पूर्व ब्लाक प्रमुख के कत्ल की सुपारी दी थी। उन दोनों से शमी की दुश्मनी थी। अभिषेक को डर था कि शमी उसका कत्ल करा सकते हैं। इसलिए उसने शमी को मरवाने की साजिश रची। अभिषेक के कहने पर अनिल ने राजकुमार को चार लाख रुपये दिए तो उसने प्रतापगढ़ के बदमाशों से संपर्क कर शमी का कत्ल करा दिया। फिर राजकुमार और अनिल चंडीगढ़ चले गए थे। वहां से लौटकर कुछ दिन कौशाम्बी में छिपे रहे।
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एसटीएफ के मुताबिक, पिछले 15 दिन से अनिल उर्फ डब्लू और राजकुमार वाराणसी में तेलियाबाग स्थित एक गेस्टहाउस में ठहरे थे। अनिल का ममेरा भाई आलोक मौर्या सिपाही है। वह वाराणसी में तैनात है। उसने ही अपनी आईडी से कमरा बुक कराकर अनिल और राजकुमार को गेस्टहाउस में ठहराया था। वे दोनों वाराणसी से प्रतापगढ़ में बदमाश अजय मौर्या से मिलने गए थे। उससे मिलने के बाद वापस वाराणसी जाने के लिए सिविल लाइंस बस अड्डा जाते समय पकड़े गए। अब इलाहाबाद पुलिस इस सिपाही की भूमिका के बारे में वाराणसी पुलिस को रिपोर्ट भेजेगी ताकि उस पर कार्रवाई की जा सके।
एसटीएफ ने बताया कि गिरफ्तार अजय मौर्या पेशेवर अपराधी है। करीब साढ़े तीन साल पहले दिल्ली में एक मकान में डकैती के मामले में पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। आठ मार्च को वह तिहाड़ जेल से रिहा हुआ था। राजकुमार ने पहले उसे कत्ल की सुपारी देनी चाही थी लेकिन उसने इनकार कर दिया। अजय ने कुबूला कि उसे गु़ड़गांव जेल में बंद माफिया अनिल राठी ने गुड़गांव के ही ठेकेदार कौसर के कत्ल की सुपारी दी है। राठी से उसकी मुलाकात तिहाड़ जेल में हुई थी। ठेकेदार के कत्ल के लिए असलहे का इंतजाम सुल्तानपुर जेल में बंद अपराधी पंकज सिंह के जरिए होनी थी। इसके अलावा 2014 में मारे गए कल्लू डान के भाई विनय सिंह ने हत्या का बदला लेने के लिए प्रतापगढ़ में अचलपुर के अभय सिंह और गोपालापुर के सर्वेश सिंह के कत्ल का ठेका चार लाख रुपये में अजय को दिया था। दो-तीन दिन में वह दूसरे बदमाशों के साथ मिलकर प्रतापगढ़ में जेल रोड रेलवे क्रासिंग के निकट सर्वेश और अभय का कत्ल करने वाला था।