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कमरों की हालत देख कांप गई लोगों की रूह

Sat, 08 Sep 2018 01:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sat, 08 Sep 2018 01:54 AM IST
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The people are shocked to see the condition of the rooms
इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
सोरांव के बिगहिया में एक ही परिवार के चार लोगों की हत्या के दौरान हत्यारे क्रूरता की हदें पार कर गए थे। हालात यह थे कि कमरों की हालत देख लोगों का कलेजा मुंह को आ गया। हत्या के बाद मृतकों के चेहरे बुरी तरह कूंच दिए गए थे। मासूम विराट की तो आंख तक बाहर निकल आई थी। कमरों में हर तरफ बिखरा खून दरिंदगी की दास्तां बयां करने के लिए काफी था।
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प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कमलेश देवी का मकान कमला नगर 40 नंबर गोमती रोड पर स्थित है। यहां सड़क चौड़ीकरण होना है, जिसके लिए रोड के किनारों पर स्थित मकानों का कुछ हिस्सा तोड़ने का आदेश प्रशासन ने जारी किया था। इसी के तहत कमलेश के मकान का अगला हिस्सा भी पिछले दिनों तोड़ा गया था। सुबह घटना की जानकारी मिलने पर सैकड़ों लोगों की भीड़ मौके पर जुट गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि घर से बच्ची के रोने की आवाज सुनकर वह जैसे ही मौके पर पहुंचे, वहां का नजारा देख स्तब्ध रह गए। प्रतापनारायण व रिंकी के शव चारपाई पर खून से लथपथ पड़े थे। चारपाई के नीचे भारी मात्रा में खून भी फैला हुआ था। प्रतापनारायण के गले व पेट में धारदार हथियार से हमला किया गया था।
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उसके चेहरे पर भी वार किए गए थे। उधर रिंकी को माथे व चेहरे पर हमला कर मौत के घाट उतारा गया था। बगल में ही तख्त था, जिसके ठीक सामने मासूम विराट औंधे मुंह पड़ा था। उसके सिर के पिछले हिस्से में गहरा जख्म था और काफी खून भी बहा था। धारदार हथियार से हुए हमले में उसकी आंख तब बाहर आ गई थी। वहीं पास में ही डेढ़ महीने की नवजात पड़ी बिलख रही थी। ग्रामीणों ने बच्ची को उठाया और इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने बताया कि भीतर के कमरे में कमलेश देवी भी चारपाई पर खून से लथपथ पड़ी थीं। उनके भी सिर पर हमला किया गया था। साथ ही चेहरे पर भी चोट के निशान थे। दोनों कमरों में काफी खून भी बहा था जो दरिंदगी की दास्तां बयां कर रहा था।
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घटना की खबर कमलेश की अन्य दोनों बेटियों प्रिया व काजल को मिलीं तो वह भी बिलखते हुए पहुंचीं। दूसरे नंबर की बेटी प्रिया नवाबगंज व सबसे छोटी काजल भदोही से आई थी। मां-बहन व भतीजे के शव पड़े देख दोनों बहनें फूट-फूटकर रोने लगीं। गांव की महिलाएं उन्हें ढांढस बंधाने के लिए आगे बढ़ीं लेकिन, दोनों बहनों की हालत देख उनकी भी आंखें नम हो गईं। उधर बेटे की मौत पर प्रतापनारायण के पिता बालसखा बेसुध से हो गए थे। चाचा राधाकृष्ण मिश्रा व परिवार के अन्य लोग भी गमगीन रहे। एक साथ हुई चार हत्याओं से ग्रामीण भी स्तब्ध दिखे। उनका कहना था कि कमलेश का परिवार बेहद सरल था। बेटी रिंकी और दामाद प्रतापनारायण भी काफी मिलनसार थे।


पूछताछ के दौरान पुलिस को पता चला कि मृतका कमलेश के चार बच्चों में सबसे बड़ा बेटा मोनू था। 20 मई 2000 को वह नौकरी के सिलसिले में मुंबई गया था। इसके बाद से उसका कुछ पता नहीं चला। बहुत खोजबीन की गई लेकिन, कोई जानकारी नहीं मिली। शुक्रवार को थाने पर पहुंचे प्रतापनारायण के घरवालों का आरोप था कि पड़ोस में रहने वाले कमलेश के जेठ रिटायर शिक्षक ओमप्रकाश ने ही मोनू को साजिशन गायब करवाया। उनका कहना था कि उन्होंने नौकरी लगवाने के लिए मोनू को मुंबई भेजा था। जिसके बाद से वह गायब हो गया। बाद में जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने कोई भी जानकारी होने से इंकार कर दिया।
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