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सोशल मीडिया पर एक फोटो ने लगाई आग

Mon, 16 Mar 2015 11:34 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद Updated Mon, 16 Mar 2015 11:34 PM IST
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Social media took a photo of the fire
सोशल मीडिया का उपयोग एंटी सोशल कामों में किया जा रहा है। फेसबुक और वाट्सएप पर भ्रामक फोटो डालकर आग लगाई जा रही है। वकीलों पर लाठीचार्ज की एक फोटो फेसबुक और वाट्सएप पर शेयर की जा रही है, जिसमें एक पुलिस अफसर ने वकील के सिर पर पांव रखा हुआ है। यह फोटो शेयर कर वकीलों से आत्म सम्मान के लिए उठ खड़े होने का आह्वान किया जा रहा है। हालांकि पुलिस की जांच में सामने आया है कि वह फोटो लखनऊ की है और काफी पुरानी भी। एक वकील को पीटने का वीडियो भी वायरल हुआ है।
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 हालांकि यह भी इलाहाबाद का नहीं है। आग लगाने के काम में कांग्रेस नेता हसीब अहमद भी जुटे हैं। उन्होंने एक फोटो शेयर कर दरोगा शैलेंद्र सिंह को फांसी देने की मांग उठाई है। इस फोटो को फेसबुक और वाट्सएप पर शेयर किया गया है। उन्होंने दरोगा को हत्यारा, कातिल और दरिंदे जैसे शब्दों से नवाजा है। यह फोटो सोमवार को ही वरिष्ठ पुलिस अफसरों के पास पहुंचा। एसओ कर्नलगंज विजय प्रताप सिंह ने बताया कि फोटो की जांच की जा रही है। कांग्रेस नेता के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
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पुलिस वालों का दरोगा शैलेंद्र सिंह को हीरो बनाने का अभियान सोशल साइट्स पर जारी है। इसी बीच एक फोटो सोशल साइट्स पर वायरल हुआ है जिसमें पुलिस वाले बांह पर काली पट्टी बांधकर विरोध जताते नजर आ रहे हैं। फोटो में चार सिपाही हैं लेकिन चेहरा सभी का कटा हुआ है। यह फोटो कहां की है, इसको लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म रहा। पुलिस वाले यह बताते रहे कि फोटो इलाहाबाद का ही है लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो सकी। फोटो आईजी समेत कई अफसरों के पास पहुंची और इसकी जांच शुरू हो गई है। यह भी माना जा रहा है कि फोटो को शरारत के लिए वाट्सएप और सोशल साइट्स पर वायरल किया जा रहा है। एक महिला दरोगा का ऑडियो भी चर्चा में बना हुआ है।
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सोशल साइट्स पर चल रहे जहर फैलाने के अभियान के बीच एसएसपी दीपक कुमार का बयान सामने आया है। एसएसपी ने कहा कि वकील और पुलिस क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम के अभिन्न अंग हैं। दोनों अंग अगर एक-दूसरे के खिलाफ आरोप-प्रत्यारोप और भ्रामक बातों का प्रचार करेंगे तो इससे लोकतंत्र कमजोर होगा। कहा कि ‘आग में पानी डालने का काम करें, न कि घी डालने का’। चेतावनी दी कि सोशल साइट्स का इस्तेमाल भ्रामक बातों के लिए प्रचार के लिए न करें। पुलिस कर्मी सर्विस कंडक्ट रूल्स से बंधे हैं। अगर वह इसका पालन नहीं करेंगे तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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