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शुआट्स के खाते से 392 फर्जी भुगतान कर निकाले 25 करोड़
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 04 Aug 2017 02:12 AM IST
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- फोटो : file photo
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शुआट्स के खाते से 392 फर्जी भुगतान कर करीब 25 करोड़ रुपये एक्सिस बैंक से निकाले गए थे। यह जानकारी विशेष जांच टीम (एसआईटी) के सामने बैंक के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट मलप्पा ने दी। यह भी सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि करीब चार करोड़ रुपये के 17 भुगतान तो बिना चेक के हो गए। इसके साक्ष्य में कंप्यूटराइज्ड लेजर, चेक और अन्य प्रपत्र एसआईटी को सौंपे गए हैं। अब दोषी पाए गए 24 बैंक अफसरों के बयान लिए जाएंगे। इनको तलब करने के लिए सीआरपीसी की धारा 160 के तहत नोटिस जारी किया जा चुका है। उसी के बाद अगले सप्ताह बैंक के वाइस प्रेसिडेंट को भी तलब किया गया है।
़िडप्टी वाइस प्रेसिडेंट मलप्पा ने करीब ढाई सौ पेज की जांच रिपोर्ट पुलिस अफसरों को दिखाई है। सूत्रों का कहना है कि इस रिपोर्ट में अधिकांश भुगतान करैली की यूनियन बैंक, इलाहाबाद बैंक और स्टेट बैंक के खातों में हुआ है। ये खाते राजेश कुमार, उसके मित्र और परिजनों के नाम से खुले थे। बैंक को जांच के दौरान कई खाताधारक तो बताए हुए पते पर ही नहीं मिले हैं। डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट ने जांच टीम के सामने स्पष्ट किया कि गबन के खुलासे के बाद तीन बार शुआट्स के अफसरों के साथ कार्रवाई को लेकर बैठक भी हुई थी। उसी के बाद अप्रैल में बैंक की ओर से एफआईआर दर्ज कराई गई है।
एसआईटी को अब शुआट्स के निलंबित लेखाधिकारी राजेश कुमार की तलाश है। एक आरोपी कमाल अहसान के जरिए तो बैंक की स्थिति साफ हो गई। अब शुआट्स के बारे में राजेश से पुलिस जानकारी करेंगी। उसको गिरफ्तार करने के लिए पुलिस की तीन विशेष टीम लगी हुईं हैं। इनकी कोशिश है कि उसे जल्दी ही गिरफ्तार कर लिया जाए।
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‘बैंक के शीर्ष अधिकारी मलप्पा से अहम जानकारियां मिलीं हैं। यह सब जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनके आधार पर शुआट्स के कलपति सहित महत्वपूर्ण अफसरों को जांच में सहयोग के लिए फिर से बुलाया जा सकता है।’ बीके मिश्रा, एसपी क्राइम
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़िडप्टी वाइस प्रेसिडेंट मलप्पा ने करीब ढाई सौ पेज की जांच रिपोर्ट पुलिस अफसरों को दिखाई है। सूत्रों का कहना है कि इस रिपोर्ट में अधिकांश भुगतान करैली की यूनियन बैंक, इलाहाबाद बैंक और स्टेट बैंक के खातों में हुआ है। ये खाते राजेश कुमार, उसके मित्र और परिजनों के नाम से खुले थे। बैंक को जांच के दौरान कई खाताधारक तो बताए हुए पते पर ही नहीं मिले हैं। डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट ने जांच टीम के सामने स्पष्ट किया कि गबन के खुलासे के बाद तीन बार शुआट्स के अफसरों के साथ कार्रवाई को लेकर बैठक भी हुई थी। उसी के बाद अप्रैल में बैंक की ओर से एफआईआर दर्ज कराई गई है।
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एसआईटी को अब शुआट्स के निलंबित लेखाधिकारी राजेश कुमार की तलाश है। एक आरोपी कमाल अहसान के जरिए तो बैंक की स्थिति साफ हो गई। अब शुआट्स के बारे में राजेश से पुलिस जानकारी करेंगी। उसको गिरफ्तार करने के लिए पुलिस की तीन विशेष टीम लगी हुईं हैं। इनकी कोशिश है कि उसे जल्दी ही गिरफ्तार कर लिया जाए।
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‘बैंक के शीर्ष अधिकारी मलप्पा से अहम जानकारियां मिलीं हैं। यह सब जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनके आधार पर शुआट्स के कलपति सहित महत्वपूर्ण अफसरों को जांच में सहयोग के लिए फिर से बुलाया जा सकता है।’ बीके मिश्रा, एसपी क्राइम