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रंजिश में हुई भाइयों की हत्या, लूट का दिया रूप
इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 19 Mar 2018 11:53 PM IST
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crime shimla
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नवाबगंज के पसियापुर गांव में दो भाइयों की हत्या रंजिश में की गई है। पुलिस ने प्रारंभिक जांच के बाद यह जानकारी दी है। कातिलों ने हत्या के बाद आलमारी और बक्से तोड़े ताकि पुलिस को जांच से भटकाया जा सके। शक की सुई गांव में ही रहने वाले मामा पर है । उसी से जमीन का विवाद चल रहा था। एसएसपी का कहना है कि मामा फरार है। उसकी तलाश में दबिश दी जा रही है।
पसियापुर गांव में सुशील कुमार और अनिल कुमार की हत्या के बाद पुलिस ने आलमारी और बक्सों का ताला टूटा देख लूट के एंगल से जांच शुरू की थी लेकिन कुछ ही देर में मामला पलट गया। पूछताछ में दो बड़े मामले सामने आए। सुशील और अनिल के परिवार का जमीन को लेकर उनके ही सगे मामा तीरथ से कई सालों से विवाद चल रहा था। दोनों परिवारों में कई बार लड़ाई झगड़ा भी हो चुका था। इस बात की जानकारी मिलने के बाद क्राइम ब्रांच के सर्विलांस सेल ने कई मोबाइल को सर्विलांस पर लगा दिया। इसके साथ ही कुछ कॉल डीटेल्स भी निकलवाई गई है।
फिलहाल पुलिस ने शक के आधार पर कुछ लोगों को हिरासत में लिया है। उनसे पूछताछ भी की जा रही है। एसपी गंगापार सुनील सिंह ने बताया कि पुलिस जल्द ही मामले का खुलासा कर देगी। एसएसपी आकाश कुलहरि ने बताया कि बहन लक्ष्मी उर्फ प्रियंका के बयान के बाद काफी चीजें साफ हुई हैं। उसने अपने सगे मामा तीरथ पर शक जताया है। पुलिस जब उसके पास पहुंची तो वह फरार था। इस कारण उस पर शक और बढ़ गया है। उसकी तलाश में टीमों को लगाया गया है। अभी अंतिम रूप से कुछ कहा नहीं लेकिन शक उसी पर है। फिलहाल पुलिस शक के दायरे में आए सभी एंगल पर जांच कर रही है।
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मूल रूप से नवाबगंज के मोहम्मदपुर गांव के रहने वाले अशर्फी लाल पुलिस महकमे में सिपाही थे। उन्होंने करीब 15 साल पहले ससुराल पसियापुर में जमीन खरीदी और वहीं बस गए। घर उन्होंने गांव से थोड़ा दूर खेतों में बनवाया था। बताया जाता है कि उनके जमीन खरीदने के बाद ही जमीन विवाद शुरू हो गया था। विवाद में वह बहुत परेशान हो गए थे। गांव वालों के मुताबिक पांच साल पहले अशर्फी लाल कौशांबी में तैनात थे। छुट्टियों पर गांव आए और जमीन विवाद के दबाव में उन्होंने आत्महत्या कर ली। उनकी मौत के बाद सुशीला देवी अपने तीन बच्चों को पाल रही थीं।
सुशील और अनिल की बहन लक्ष्मी के भाग्य ने उसे बचा लिया। वह तीन दिन पहले अपने मौसा दयालाल निवासी दहियावा के घर घूमने गई थी। उसे सोमवार को ही वापस आना था लेकिन मौसी ने जिद कर एक दिन के लिए और रोक लिया। इसी कारण उसकी जान बच गई। सोमवार को जब उसे घटना के बारे में पता चला तो जैसे उस पर पहाड़ टूट पड़ा। वह रोते रोते बेहोश हो गई। गांव की महिलाएं उसे किसी तरह संभाल रही थीं। पुलिस वालों ने उससे बात करने की कोशिश की। उससे बातचीत में पुलिस को कई क्लू मिले थे।
गांव में रहने वाले प्रकाश कुमार के परिवार वालों ने भगवान को चढ़ाने के लिए निशान निकाला था। गांव वालों के मुताबिक सुशीला अपने दोनों बेटों सुशील और अनिल के साथ निशान में आई थी। वहां कुछ देर शरीक होने के बाद तीनों वापस घर लौट गए थे। इसके बाद तकरीबन तीन से चार बजे के बीच हत्यारों ने घटना को अंजाम दिया। दरअसल घर के पीछे प्राइमरी स्कूल है। तीन बजे तक स्कूल खुला था और वहां चहल पहल थी। वहां छुट्टी होने के बाद ही हत्यारे अंदर घुसे होंगे।
सुशील बीए करने के बाद से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। वह नवाबगंज में एक कोचिंग में पढ़ता था। वह रोज शाम को नवाबगंज में पढ़ने जाता था। छोटा अनिल अजीत प्रताप इंटर कालेज में इंटर का छात्र था। बहन लक्ष्मी भी प्राइवेट बीए कर रही है।
कातिलों ने सुशीला के गले और सिर पर रंभे से बेहद गंभीर वार किया है। संभवत: हत्यारे उसे भी मरा हुआ समझे थे, इसी कारण उसे छोड़ दिया। डाक्टरों के मुताबिक सुशीला की हालत बेहद नाजुक है। उसके उपचार के लिए प्रयास किया जा रहा है। पुलिस के मुताबिक सुशीला को होश आ गया तो डबल मर्डर का राज तुरंत खुल जाएगा। अस्पताल में उसकी सुरक्षा में दो सिपाहियों को लगाया गया है।
नवाबगंज के पसियापुर गांव में सोमवार की शाम जैसे ही डबल मर्डर की सूचना मिली, पुलिस मौके पर पहुंची। कमरों का हाल देखकर अंदाजा लगाया जा रहा था कि मामला लूट के लिए हुआ है लेकिन समय बीतने के साथ ही लूट की थ्योरी ध्वस्त हो गई। दस बजे तक साफ हो गया था कि हत्या रंजिशन की गई है। घर वालों ने जब मामा का नाम लिया तब जाकर कुछ साफ हुआ।
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पसियापुर गांव में सुशील कुमार और अनिल कुमार की हत्या के बाद पुलिस ने आलमारी और बक्सों का ताला टूटा देख लूट के एंगल से जांच शुरू की थी लेकिन कुछ ही देर में मामला पलट गया। पूछताछ में दो बड़े मामले सामने आए। सुशील और अनिल के परिवार का जमीन को लेकर उनके ही सगे मामा तीरथ से कई सालों से विवाद चल रहा था। दोनों परिवारों में कई बार लड़ाई झगड़ा भी हो चुका था। इस बात की जानकारी मिलने के बाद क्राइम ब्रांच के सर्विलांस सेल ने कई मोबाइल को सर्विलांस पर लगा दिया। इसके साथ ही कुछ कॉल डीटेल्स भी निकलवाई गई है।
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फिलहाल पुलिस ने शक के आधार पर कुछ लोगों को हिरासत में लिया है। उनसे पूछताछ भी की जा रही है। एसपी गंगापार सुनील सिंह ने बताया कि पुलिस जल्द ही मामले का खुलासा कर देगी। एसएसपी आकाश कुलहरि ने बताया कि बहन लक्ष्मी उर्फ प्रियंका के बयान के बाद काफी चीजें साफ हुई हैं। उसने अपने सगे मामा तीरथ पर शक जताया है। पुलिस जब उसके पास पहुंची तो वह फरार था। इस कारण उस पर शक और बढ़ गया है। उसकी तलाश में टीमों को लगाया गया है। अभी अंतिम रूप से कुछ कहा नहीं लेकिन शक उसी पर है। फिलहाल पुलिस शक के दायरे में आए सभी एंगल पर जांच कर रही है।
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मूल रूप से नवाबगंज के मोहम्मदपुर गांव के रहने वाले अशर्फी लाल पुलिस महकमे में सिपाही थे। उन्होंने करीब 15 साल पहले ससुराल पसियापुर में जमीन खरीदी और वहीं बस गए। घर उन्होंने गांव से थोड़ा दूर खेतों में बनवाया था। बताया जाता है कि उनके जमीन खरीदने के बाद ही जमीन विवाद शुरू हो गया था। विवाद में वह बहुत परेशान हो गए थे। गांव वालों के मुताबिक पांच साल पहले अशर्फी लाल कौशांबी में तैनात थे। छुट्टियों पर गांव आए और जमीन विवाद के दबाव में उन्होंने आत्महत्या कर ली। उनकी मौत के बाद सुशीला देवी अपने तीन बच्चों को पाल रही थीं।
सुशील और अनिल की बहन लक्ष्मी के भाग्य ने उसे बचा लिया। वह तीन दिन पहले अपने मौसा दयालाल निवासी दहियावा के घर घूमने गई थी। उसे सोमवार को ही वापस आना था लेकिन मौसी ने जिद कर एक दिन के लिए और रोक लिया। इसी कारण उसकी जान बच गई। सोमवार को जब उसे घटना के बारे में पता चला तो जैसे उस पर पहाड़ टूट पड़ा। वह रोते रोते बेहोश हो गई। गांव की महिलाएं उसे किसी तरह संभाल रही थीं। पुलिस वालों ने उससे बात करने की कोशिश की। उससे बातचीत में पुलिस को कई क्लू मिले थे।
गांव में रहने वाले प्रकाश कुमार के परिवार वालों ने भगवान को चढ़ाने के लिए निशान निकाला था। गांव वालों के मुताबिक सुशीला अपने दोनों बेटों सुशील और अनिल के साथ निशान में आई थी। वहां कुछ देर शरीक होने के बाद तीनों वापस घर लौट गए थे। इसके बाद तकरीबन तीन से चार बजे के बीच हत्यारों ने घटना को अंजाम दिया। दरअसल घर के पीछे प्राइमरी स्कूल है। तीन बजे तक स्कूल खुला था और वहां चहल पहल थी। वहां छुट्टी होने के बाद ही हत्यारे अंदर घुसे होंगे।
सुशील बीए करने के बाद से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। वह नवाबगंज में एक कोचिंग में पढ़ता था। वह रोज शाम को नवाबगंज में पढ़ने जाता था। छोटा अनिल अजीत प्रताप इंटर कालेज में इंटर का छात्र था। बहन लक्ष्मी भी प्राइवेट बीए कर रही है।
कातिलों ने सुशीला के गले और सिर पर रंभे से बेहद गंभीर वार किया है। संभवत: हत्यारे उसे भी मरा हुआ समझे थे, इसी कारण उसे छोड़ दिया। डाक्टरों के मुताबिक सुशीला की हालत बेहद नाजुक है। उसके उपचार के लिए प्रयास किया जा रहा है। पुलिस के मुताबिक सुशीला को होश आ गया तो डबल मर्डर का राज तुरंत खुल जाएगा। अस्पताल में उसकी सुरक्षा में दो सिपाहियों को लगाया गया है।
नवाबगंज के पसियापुर गांव में सोमवार की शाम जैसे ही डबल मर्डर की सूचना मिली, पुलिस मौके पर पहुंची। कमरों का हाल देखकर अंदाजा लगाया जा रहा था कि मामला लूट के लिए हुआ है लेकिन समय बीतने के साथ ही लूट की थ्योरी ध्वस्त हो गई। दस बजे तक साफ हो गया था कि हत्या रंजिशन की गई है। घर वालों ने जब मामा का नाम लिया तब जाकर कुछ साफ हुआ।