{"_id":"53e1f24fa67914363d1497058d3157db","slug":"mla-explain-ended-jam-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"विधायक के समझाने पर खत्म हुआ जाम","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
विधायक के समझाने पर खत्म हुआ जाम
ब्यूरो/ अमर उजाला इलाहाबाद
Updated Thu, 14 May 2015 02:43 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
करछना (ब्यूरो)। भीरपुर में हुए हादसे के बाद पुलिस के खिलाफ बवाल काट रहे लोग आखिर में करछना के बसपा विधायक दीपक पटेल के समझाने और मनाने पर शांत हुए। पावर प्लांट के लिए भूमि अधिग्रहण मुद्दे पर कचरी में सक्रिय पुनर्वास किसान कल्याण समिति के अध्यक्ष राजबहादुर पटेल भी चक्काजाम कर रहे लोगों का नेतृत्व करने पहुंच गए थे। पुलिस अफसरों के कहने पर दोपहर बाद करछना के ब्लाक प्रमुख के अलावा कुछ सपा नेता लोगों से बात करने पहुंचे तो उन्हें खरी-खोटी सुनाते हुए दौड़ा लिया गया।
सपा नेताओं से लोग बात भी नहीं करना चाह रहे थे। ऐसे में पूर्व सांसद रेवती रमण सिंह के करीबी समेत कई सपा नेता भीरपुर चौकी के पास ही खड़े रहे गए। आखिरकार करछना विधायक दीपक पटेल पहुंचे तो भीड़ में मौजूद लोग उनसे बात करने के लिए राजी हो गए। विधायक से बातचीत में लोगों ने कहा कि उन पर बवाल और रेलवे ट्रैक चक्काजाम का केस नहीं लिखा जाए, फायरिंग करने वाले पुलिसवालों पर कार्रवाई हो साथ ही पीड़ित परिवार को दस लाख रुपये मुआवजा मिले। लोगों ने अफसरों से इस बारे में लिखित आश्वासन मांगा। विधायक ने अफसरों से बात की तो उन्होंने लिखित तो नहीं मगर मौखिक भरोसा दिया कि चक्काजाम का मुकदमा नहीं लिखा जाएगा, पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिलाने की कोशिश होगी और फायरिंग के बारे में जांच होगी। ऐसे में रामबहादु
बवाल के दौरान फायरिंग के बारे में एसपी यमुनापार नीरज पांडेय ने कहा कि भीड़ से घिरने पर उन्होंने पुलिस को रबड़ बुलेट से फायरिंग का आदेश दिया था। और कोई गोली नहीं चली। लेकिन भीड़ में मौजूद लोगों का आरोप है कि पुलिस ने कारबाइन और दूसरे असलहों से फायरिंग की जिसके चलते शेखर (21), विनोद कुमार (22). अनिल कुमार (17), धर्मराज (30), धमेंद्र कुमार (30) जख्मी हो गए। विधायक दीपक पटेल ने बताया कि उन्हें भी लोगों ने कई खोखे उठाकर दिए। उनमें एक खोखा एके-47 का था। पुलिस झूठ बोल रही है कि सिर्फ रबर बुलेट दागी गई।
विज्ञापन
पति के साथ बाइक पर मेजा में घर लौटते वक्त बस की चपेट में आने से हादसे की शिकार रामबहादुर की पत्नी राजपति की लाश से गहने नोंच लिए गए। वह शादी समारोह से लौट रही थी इसलिए कई जेवर पहन रखे थे। परिजन वहां पहुंचे तो उन्होंने कहा कि राजपति के शरीर से गहने नदारद हैं। इस पर लोगों ने आक्रोश जताते हुए अफसरों से शिकायत की। मगर पुलिस ने कहा कि भीड़ में ही किसी ने यह कारस्तानी की होगी।
दुर्घटना के बाद भीड़ के बवाल में औद्योगिक क्षेत्र थाने के बुजुर्ग दरोगा बृजनारायण तिवारी फंस गए। पथराव करती भीड़ से बचने के लिए वह भीरपुर के निकट एक मकान में घुस गए। वह शाम सात बजे तक उसी मकान में छिपे रहे क्योंकि बाहर भीड़ थी और पुलिस फोर्स दूर। मामला शांत होने के बाद वह बाहर निकले तो काफी घबराए नजर आ रहे थे।
भीरपुर में बस की टक्कर से दंपत्ति और उनके दो बच्चों की मौत के बाद हो रहे बवाल को शांत कराने के लिए ग्रामीणों से बात करने के लिए जा रहे एसडीएम राजकुमार द्विवेदी ने अपने साथ मौजूद सिपाहियों से आगे बढ़ने को कहा तो उन्होंने जान की दुहाई देते हुए कहा कि साहब हमें मरना नहीं हैं। सिपाहियों की बात सुनते ही एसडीएम भी आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं जुटा सके।
विज्ञापन
सपा नेताओं से लोग बात भी नहीं करना चाह रहे थे। ऐसे में पूर्व सांसद रेवती रमण सिंह के करीबी समेत कई सपा नेता भीरपुर चौकी के पास ही खड़े रहे गए। आखिरकार करछना विधायक दीपक पटेल पहुंचे तो भीड़ में मौजूद लोग उनसे बात करने के लिए राजी हो गए। विधायक से बातचीत में लोगों ने कहा कि उन पर बवाल और रेलवे ट्रैक चक्काजाम का केस नहीं लिखा जाए, फायरिंग करने वाले पुलिसवालों पर कार्रवाई हो साथ ही पीड़ित परिवार को दस लाख रुपये मुआवजा मिले। लोगों ने अफसरों से इस बारे में लिखित आश्वासन मांगा। विधायक ने अफसरों से बात की तो उन्होंने लिखित तो नहीं मगर मौखिक भरोसा दिया कि चक्काजाम का मुकदमा नहीं लिखा जाएगा, पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिलाने की कोशिश होगी और फायरिंग के बारे में जांच होगी। ऐसे में रामबहादु
विज्ञापन
बवाल के दौरान फायरिंग के बारे में एसपी यमुनापार नीरज पांडेय ने कहा कि भीड़ से घिरने पर उन्होंने पुलिस को रबड़ बुलेट से फायरिंग का आदेश दिया था। और कोई गोली नहीं चली। लेकिन भीड़ में मौजूद लोगों का आरोप है कि पुलिस ने कारबाइन और दूसरे असलहों से फायरिंग की जिसके चलते शेखर (21), विनोद कुमार (22). अनिल कुमार (17), धर्मराज (30), धमेंद्र कुमार (30) जख्मी हो गए। विधायक दीपक पटेल ने बताया कि उन्हें भी लोगों ने कई खोखे उठाकर दिए। उनमें एक खोखा एके-47 का था। पुलिस झूठ बोल रही है कि सिर्फ रबर बुलेट दागी गई।
विज्ञापन
पति के साथ बाइक पर मेजा में घर लौटते वक्त बस की चपेट में आने से हादसे की शिकार रामबहादुर की पत्नी राजपति की लाश से गहने नोंच लिए गए। वह शादी समारोह से लौट रही थी इसलिए कई जेवर पहन रखे थे। परिजन वहां पहुंचे तो उन्होंने कहा कि राजपति के शरीर से गहने नदारद हैं। इस पर लोगों ने आक्रोश जताते हुए अफसरों से शिकायत की। मगर पुलिस ने कहा कि भीड़ में ही किसी ने यह कारस्तानी की होगी।
दुर्घटना के बाद भीड़ के बवाल में औद्योगिक क्षेत्र थाने के बुजुर्ग दरोगा बृजनारायण तिवारी फंस गए। पथराव करती भीड़ से बचने के लिए वह भीरपुर के निकट एक मकान में घुस गए। वह शाम सात बजे तक उसी मकान में छिपे रहे क्योंकि बाहर भीड़ थी और पुलिस फोर्स दूर। मामला शांत होने के बाद वह बाहर निकले तो काफी घबराए नजर आ रहे थे।
भीरपुर में बस की टक्कर से दंपत्ति और उनके दो बच्चों की मौत के बाद हो रहे बवाल को शांत कराने के लिए ग्रामीणों से बात करने के लिए जा रहे एसडीएम राजकुमार द्विवेदी ने अपने साथ मौजूद सिपाहियों से आगे बढ़ने को कहा तो उन्होंने जान की दुहाई देते हुए कहा कि साहब हमें मरना नहीं हैं। सिपाहियों की बात सुनते ही एसडीएम भी आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं जुटा सके।