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‘रैगिंग का सच’ लिखने वाले 16 छात्रों के फाड़ दिए पत्र
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 02 Sep 2018 01:24 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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मेडिकल कॉलेज में रैगिंग के मामले में एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्रों से एक बंद कमरे में जबरन लिखाए उन 16 अनापत्ति पत्रों को कॉलेज प्रशासन ने फाड़कर फेंक दिया, जिसमें सोमवार को हुई घटना में छात्रों के साथ मारपीट के साथ शारीरिक उत्पीड़न का सच लिखा था। सूत्रों के मुताबिक प्रबंधन जुड़े अफसरों ने उन छात्रों को अलग कमरे में बुलाकर कहा, ज्यादा स्मार्ट न बनो। रैगिंग की घटना नहीं हुई, यही लिखकर दो। हुआ वही, जैसा कॉलेज प्रशासन चाहता था, खौफ से परेशान रैगिंग पीड़ित छात्रों मजबूरी में अपने साथ हुई घटना का जिक्र नहीं किया। करीब चार घंटे की इस कवायद में तीन ऐसे भी छात्र थे, जिन्होंने अनापत्ति पत्रों के साथ बिना नाम के रैगिंग की घटना को चश्मदीद गवाह की तरह लिखकर दिया। पत्रों की पड़ताल के दौरान शुक्रवार की रात पकड़ में आए इन तीन पत्रों की लिखावट मिलाकर छात्रों की पहचान करने की कोशिश नाकाम हो गई। बाद में उन तीन पत्रों को भी जला दिया गया। शासन की ओर से गठित समिति के एक सदस्य को कॉलेज प्रबंधन की इस करतूत की सूचना मिली तो छात्रों के पत्रों को देखा तो गया, लेकिन जांच के लिए गए दस्तावेजों में बतौर सुबूत शामिल नहीं किया है।
सोमवार को हुई रैगिंग प्रकरण के तूल पकड़ने और शासन की टीम आने की सूचना से बचाव की मुद्रा में आए मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने बृहस्पतिवार को ही प्रथम वर्ष के छात्रों को मर्जी के मुताबिक कपड़े पहनने और और टाई न लगाने की छूट दे दी थी। कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. वत्सला ने स्वीकार किया था कि मेडिकल छात्रों के लिए ड्रेस कोड नहीं है। शुक्रवार को भी छात्रों के साथ छात्राओं को भी बाल में तेल लगाकर चोटी करने के बाबत मना कर दिया गया। शनिवार को कमेटी सदस्यों से लेक्चर हॉल संख्या एलटी वन में पहुंचे टीम सदस्यों को अधिकांश छात्र रंग बिरंगी पोशाकों में दिखे। कई जींस और टीशर्ट भी पहने थे। टाई लगाने वाले छात्र भी गिनती के थे। छात्राएं भी अन्य दिनों की अपेक्षा बड़े अफसरों को सामने पाकर कुछ राहत में दिखीं। लेक्चर रूम में सभी छात्र-छात्राएं एप्रन पहने थीं। कुछ छात्राओं की हेयर स्टाइल भी अन्य दिनों की अपेक्षा अलग थी।
मेडिकल कॉलेज में हुए रैगिंग प्रकरण की जांच करने शनिवार को आई शासन की ओर से गठित टीम सदस्यों ने पीड़ित छात्रों के लिए बहुत ही कम समय दिया। कॉलेज परिसर में बैठक, पूछताछ, डाक्यूमेंटेशन आदि के काम 11 से शाम छह बजे तक किए गए। इसमें छात्र-छात्राओं के लिए सदस्यों ने सिर्फ 20 मिनट का समय दिया। छात्रों के अभिभावकों ने बताया कि अफसर छात्र-छात्राओं से बंद अलग-अलग बात करते तो रैगिंग के आरोपी बेनकाब हो जाते। समूह में बैठे छात्र सदस्यों के भरोसा दिलाने पर रैगिंग की तरफ इशारा कर अव्यवस्थाओं पर ही बोले। अपर निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. एनसी प्रजापति, प्रिंसिपल कानपुर मेडिकल कॉलेज डॉ. नवनीत और एडीएम सिटी अशोक कुमार ने एक छात्र और एक छात्रा को सामने बुलाकर रैगिंग के बारे में सार्वजनिक जानकारी चाही, लेकिन नाम खुलने और कॅरियर चौपट होने के भय से वे कुछ खास नहीं बोल सके। यह बात और है कि पांच बार छात्र-छात्राओं ने निडर रहने, तुरंत शिकायत करने और बिना नाम बताए मेल भेजने आदि के बारे में जोरदार हामी भरते हुए ‘यस सर’ बोले। कम समय मिलने के मलाल छात्र-छात्राओं के साथ उनके अभिभावकों को भी है। शनिवार को कुछ छात्रों के अभिभावक कॉलेज पहुंचे थे।
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सोमवार को हुई रैगिंग प्रकरण के तूल पकड़ने और शासन की टीम आने की सूचना से बचाव की मुद्रा में आए मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने बृहस्पतिवार को ही प्रथम वर्ष के छात्रों को मर्जी के मुताबिक कपड़े पहनने और और टाई न लगाने की छूट दे दी थी। कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. वत्सला ने स्वीकार किया था कि मेडिकल छात्रों के लिए ड्रेस कोड नहीं है। शुक्रवार को भी छात्रों के साथ छात्राओं को भी बाल में तेल लगाकर चोटी करने के बाबत मना कर दिया गया। शनिवार को कमेटी सदस्यों से लेक्चर हॉल संख्या एलटी वन में पहुंचे टीम सदस्यों को अधिकांश छात्र रंग बिरंगी पोशाकों में दिखे। कई जींस और टीशर्ट भी पहने थे। टाई लगाने वाले छात्र भी गिनती के थे। छात्राएं भी अन्य दिनों की अपेक्षा बड़े अफसरों को सामने पाकर कुछ राहत में दिखीं। लेक्चर रूम में सभी छात्र-छात्राएं एप्रन पहने थीं। कुछ छात्राओं की हेयर स्टाइल भी अन्य दिनों की अपेक्षा अलग थी।
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मेडिकल कॉलेज में हुए रैगिंग प्रकरण की जांच करने शनिवार को आई शासन की ओर से गठित टीम सदस्यों ने पीड़ित छात्रों के लिए बहुत ही कम समय दिया। कॉलेज परिसर में बैठक, पूछताछ, डाक्यूमेंटेशन आदि के काम 11 से शाम छह बजे तक किए गए। इसमें छात्र-छात्राओं के लिए सदस्यों ने सिर्फ 20 मिनट का समय दिया। छात्रों के अभिभावकों ने बताया कि अफसर छात्र-छात्राओं से बंद अलग-अलग बात करते तो रैगिंग के आरोपी बेनकाब हो जाते। समूह में बैठे छात्र सदस्यों के भरोसा दिलाने पर रैगिंग की तरफ इशारा कर अव्यवस्थाओं पर ही बोले। अपर निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. एनसी प्रजापति, प्रिंसिपल कानपुर मेडिकल कॉलेज डॉ. नवनीत और एडीएम सिटी अशोक कुमार ने एक छात्र और एक छात्रा को सामने बुलाकर रैगिंग के बारे में सार्वजनिक जानकारी चाही, लेकिन नाम खुलने और कॅरियर चौपट होने के भय से वे कुछ खास नहीं बोल सके। यह बात और है कि पांच बार छात्र-छात्राओं ने निडर रहने, तुरंत शिकायत करने और बिना नाम बताए मेल भेजने आदि के बारे में जोरदार हामी भरते हुए ‘यस सर’ बोले। कम समय मिलने के मलाल छात्र-छात्राओं के साथ उनके अभिभावकों को भी है। शनिवार को कुछ छात्रों के अभिभावक कॉलेज पहुंचे थे।
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