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चार झोपड़ियां जलीं, मासूम की जलकर मौत
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Sun, 22 Mar 2015 12:01 AM IST
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घूरपुर के पूरे खगन गांव में ईंट भट्ठे के एक मजदूर को झोपड़ी में मच्छर भगाने वाली क्वाइल जलाकर सोना भारी पड़ गया। शुक्रवार रात क्वाइल के कारण झोपड़ी में आग लग गई। आग ने तीन और झोपड़ियों को चपेट में लिया। दुर्घटना में पांच साल की मासूम बच्ची की जलने से मौत हो गई। तीन लोग गंभीर रूप से झुलस गए। आधे घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद मजदूरों ने आग पर काबू पाया, तो चारों झोपड़ियों में रखा सामान खाक हो चुका था।
चंपतपुर के सुरेंद्र सिंह का घर से कुछ दूर पर पूरेखगन गांव में ईंट भट्ठा है। भट्ठे पर मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के मजदूर काम करने के लिए परिवार के साथ आते हैं और झोपड़ी बनाकर रहते हैं। शुक्रवार रात छत्तीसगढ़ के थाना सरायपाली जिला महासमुद्र के जमाहारी गांव का संपत पत्नी कल्पना, छह साल के बेटे मुन्ना, पांच साल की बेटी किरन और एक डेढ़ साल के बच्चे छोटू के साथ झोपड़ी में सो रहा था। अंदर मच्छर भगाने वाली क्वाइल भी जलाकर बिस्तर के नीचे रख दी थी। गहरी नींद में चादर क्वाइल पर गिर गई।
चादर से आग फैल कर पूरी झोपड़ी में फैल गई। आग की लपटे देख कर कल्पना और संपत की नींद खुली तो वे चीखते हुए मुन्ना और छोटू को लेकर बाहर भागे। आग पड़ोस के शेखू, रामनिहोर अैर कल्लू की झोपड़ी तक पहुंच चुकी थी। इसी बीच संपत को बेटी किरन के अंदर ही होने का ख्याल आया। कल्पना और संपत उसे बाहर निकालने के लिए अंदर घुस गए। किरन को बाहर निकाला गया तो वह गंभीर रूप से झुलस चुकी थी और उसकी सांसे थम चुकी थी। किरन को बाहर निकालने के चक्कर कल्पना, संपत और मुन्ना भी झुलसे हैं। कल्पना की हालत गंभीर है। सूचना पर सुबह घूरपुर पुलिस पहुंची।
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चंपतपुर के सुरेंद्र सिंह का घर से कुछ दूर पर पूरेखगन गांव में ईंट भट्ठा है। भट्ठे पर मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के मजदूर काम करने के लिए परिवार के साथ आते हैं और झोपड़ी बनाकर रहते हैं। शुक्रवार रात छत्तीसगढ़ के थाना सरायपाली जिला महासमुद्र के जमाहारी गांव का संपत पत्नी कल्पना, छह साल के बेटे मुन्ना, पांच साल की बेटी किरन और एक डेढ़ साल के बच्चे छोटू के साथ झोपड़ी में सो रहा था। अंदर मच्छर भगाने वाली क्वाइल भी जलाकर बिस्तर के नीचे रख दी थी। गहरी नींद में चादर क्वाइल पर गिर गई।
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चादर से आग फैल कर पूरी झोपड़ी में फैल गई। आग की लपटे देख कर कल्पना और संपत की नींद खुली तो वे चीखते हुए मुन्ना और छोटू को लेकर बाहर भागे। आग पड़ोस के शेखू, रामनिहोर अैर कल्लू की झोपड़ी तक पहुंच चुकी थी। इसी बीच संपत को बेटी किरन के अंदर ही होने का ख्याल आया। कल्पना और संपत उसे बाहर निकालने के लिए अंदर घुस गए। किरन को बाहर निकाला गया तो वह गंभीर रूप से झुलस चुकी थी और उसकी सांसे थम चुकी थी। किरन को बाहर निकालने के चक्कर कल्पना, संपत और मुन्ना भी झुलसे हैं। कल्पना की हालत गंभीर है। सूचना पर सुबह घूरपुर पुलिस पहुंची।
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