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वीसी ने दिए रजिस्ट्रार की सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 28 May 2018 01:07 AM IST
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हत्या की आशंका जताए जाने के बाद रजिस्ट्रार की सुरक्षा बढ़ाए जाने के लिए कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के चीफ प्रॉक्टर प्रो. रामसेवक दुबे और सुरक्षा अधिकारी को रजिस्ट्रार के सुरक्षा को लेकर जरूरी कदम उठाए जाने के निर्देश दिए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए एडीजी एसएन साबत ने भी रविवार सुबह फोन कर इविवि के रजिस्ट्रार कर्नल हितेश लव से पूरे मामले की जानकारी ली।
रजिस्ट्रार कर्नल हितेश लव ने एडीजी, कमिश्नर, एसएसपी, डीएम को पत्र भेजकर अपनी हत्या की आशंका जताई थी। यह भी बताया था कि कुछ लोग उन्हें पद से हटवाना चाहते हैं ताकि उनकी मनमानी जारी रहे। ऐसे साजिशकर्ताओं ने ही कुछ अराजकतत्वों को उनके कार्यालय में भेजा और नौकरी छोड़कर विश्वविद्यालय से जाने की धमकी दिलवाई। फिलहाल मामला सामने आने के बाद कुलपति ने इसे गंभीरता से लेते हुए चीफ प्रॉक्टर को निर्देश दिए हैं कि रजिस्ट्रार की सुरक्षा तत्काल बढ़ाई जाए। चीफ प्रॉक्टर प्रो. रामसेवक दुबे विश्वविद्यालय अध्यापक संघ (ऑटा) के अध्यक्ष भी हैं। रविवार को ही ऑटा एवं ऑक्टा की संयुक्त बैठक हुई और इस दौरान मांग की गई कि कर्नल हितेश लव के सात माह के कार्यकाल की जांच कराई जाए और जांच पूरी होने तक कुलसचिव से उनका कार्य वापस ले लिया जाए।
यह आरोप भी लगाए गए कि 30 अध्यापकों की प्रोन्नति, महाविद्यालय के 75 वरिष्ठ अध्यापकों की अर्हता तिथि का निर्धारण और तकरीबन 200 कर्मचारियों को एमएसीपी का लाभ दिए जाने का मामला रजिस्ट्रार कार्यालय में अटका हुआ है। बैठक में यह भी कहा गया कि ऑटा के पूर्व कोषाध्यक्ष प्रो. डीसी लाल की ओर से लगाए गए आरोप गलत हैं। प्रो. डीसी लाल ने आरोप लगाया था कि इविवि में कर्मचारियों की भर्ती शुरू होने वाली है और कुछ लोग नहीं चाहते कि भर्ती के दौरान कर्नल हितेश लव रजिस्ट्रार के पद पर रहें, क्योंकि वह दूसरों को भर्ती में मनमानी नहीं करने देंगे। बैठक में ऑटा अध्यक्ष प्रो. रामसेवक दुबे, ऑक्टा अध्यक्ष डॉ. सुनील कांत मिश्र, ऑटा महासचिव शिवमोहन प्रसाद, ऑक्टा महासचिव डॉ. उमेश प्रताप सिंह, ऑटा उपाध्यक्ष डॉ. लालसा यादव, ऑक्टा उपाध्यक्ष डॉ. एसपी सिंह आदि मौजूद रहे।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय की बदहाली पर आई यूजीसी कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक होने पर ऑटा और ऑक्टा के पदाधिकारी भड़के हुए हैं। पदाधिकारियों को लगता है कि यह रिपोर्ट कुलपति कार्यालय या विश्वविद्यालय के उपयुक्त निकायों से बाहर आई है। रविवार को हुई दोनों संगठनों की संयुक्त बैठक में कहा गया कि रिपोर्ट को निकायों में न रखना ऑफीशियल सीक्रेट एक्ट का उल्लंघन है। साथ ही अनुशासनहीनता भी है। हालांकि रिपोर्ट सार्वजनिक होने पर कुलपति ने इस पर अपना बयान दिया था और कहा था कि विश्वविद्यालय के हित में सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। साथ ही कहा था कि यूजीसी की ओर से मांगी गई रिपोर्ट का जवाब तैयार करके निर्धारित समय में भेजा जाएगा।
रजिस्ट्रार की सुरक्षा के मामले में इविवि के चीफ प्रॉक्टर प्रो. रामसेवक दुबे ने डीएम को पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र के माध्यम से कहा है कि रजिस्ट्रार हितेश लव सेना में कर्नल रहे हैं और एक जिम्मेदार पद पर हैं। ऐसे में मामला गंभीर हो जाता है। डीएम से मांग की गई है कि रजिस्ट्रार के लिए अतिरिक्त सुरक्षा की व्यवस्था की जाए।
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रजिस्ट्रार कर्नल हितेश लव ने एडीजी, कमिश्नर, एसएसपी, डीएम को पत्र भेजकर अपनी हत्या की आशंका जताई थी। यह भी बताया था कि कुछ लोग उन्हें पद से हटवाना चाहते हैं ताकि उनकी मनमानी जारी रहे। ऐसे साजिशकर्ताओं ने ही कुछ अराजकतत्वों को उनके कार्यालय में भेजा और नौकरी छोड़कर विश्वविद्यालय से जाने की धमकी दिलवाई। फिलहाल मामला सामने आने के बाद कुलपति ने इसे गंभीरता से लेते हुए चीफ प्रॉक्टर को निर्देश दिए हैं कि रजिस्ट्रार की सुरक्षा तत्काल बढ़ाई जाए। चीफ प्रॉक्टर प्रो. रामसेवक दुबे विश्वविद्यालय अध्यापक संघ (ऑटा) के अध्यक्ष भी हैं। रविवार को ही ऑटा एवं ऑक्टा की संयुक्त बैठक हुई और इस दौरान मांग की गई कि कर्नल हितेश लव के सात माह के कार्यकाल की जांच कराई जाए और जांच पूरी होने तक कुलसचिव से उनका कार्य वापस ले लिया जाए।
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यह आरोप भी लगाए गए कि 30 अध्यापकों की प्रोन्नति, महाविद्यालय के 75 वरिष्ठ अध्यापकों की अर्हता तिथि का निर्धारण और तकरीबन 200 कर्मचारियों को एमएसीपी का लाभ दिए जाने का मामला रजिस्ट्रार कार्यालय में अटका हुआ है। बैठक में यह भी कहा गया कि ऑटा के पूर्व कोषाध्यक्ष प्रो. डीसी लाल की ओर से लगाए गए आरोप गलत हैं। प्रो. डीसी लाल ने आरोप लगाया था कि इविवि में कर्मचारियों की भर्ती शुरू होने वाली है और कुछ लोग नहीं चाहते कि भर्ती के दौरान कर्नल हितेश लव रजिस्ट्रार के पद पर रहें, क्योंकि वह दूसरों को भर्ती में मनमानी नहीं करने देंगे। बैठक में ऑटा अध्यक्ष प्रो. रामसेवक दुबे, ऑक्टा अध्यक्ष डॉ. सुनील कांत मिश्र, ऑटा महासचिव शिवमोहन प्रसाद, ऑक्टा महासचिव डॉ. उमेश प्रताप सिंह, ऑटा उपाध्यक्ष डॉ. लालसा यादव, ऑक्टा उपाध्यक्ष डॉ. एसपी सिंह आदि मौजूद रहे।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय की बदहाली पर आई यूजीसी कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक होने पर ऑटा और ऑक्टा के पदाधिकारी भड़के हुए हैं। पदाधिकारियों को लगता है कि यह रिपोर्ट कुलपति कार्यालय या विश्वविद्यालय के उपयुक्त निकायों से बाहर आई है। रविवार को हुई दोनों संगठनों की संयुक्त बैठक में कहा गया कि रिपोर्ट को निकायों में न रखना ऑफीशियल सीक्रेट एक्ट का उल्लंघन है। साथ ही अनुशासनहीनता भी है। हालांकि रिपोर्ट सार्वजनिक होने पर कुलपति ने इस पर अपना बयान दिया था और कहा था कि विश्वविद्यालय के हित में सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। साथ ही कहा था कि यूजीसी की ओर से मांगी गई रिपोर्ट का जवाब तैयार करके निर्धारित समय में भेजा जाएगा।
रजिस्ट्रार की सुरक्षा के मामले में इविवि के चीफ प्रॉक्टर प्रो. रामसेवक दुबे ने डीएम को पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र के माध्यम से कहा है कि रजिस्ट्रार हितेश लव सेना में कर्नल रहे हैं और एक जिम्मेदार पद पर हैं। ऐसे में मामला गंभीर हो जाता है। डीएम से मांग की गई है कि रजिस्ट्रार के लिए अतिरिक्त सुरक्षा की व्यवस्था की जाए।