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खनन माफिया के निशाने पर भी थे डॉ. बंसल
मुनेंद्र बाजपेयी, अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Tue, 17 Jan 2017 01:56 AM IST
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- फोटो : demo pic
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डॉ. एके बंसल के कातिलों तक पहुंचने में नाकाम पुलिस के निशाने पर अब खनन माफिया आ गए हैं। अंधेरे में तीर चला रही पुलिस को पता चला है कि डॉ. बंसल की नैनी और करछना में कीमती जमीन पर बालू माफिया कब्जा करना चाहते थे। इस मसले पर डॉ. बंसल पर दबाव बनाने आए खनन माफिया के गुट से उनकी नोकझोंक भी हुई थी। उस वक्त वहां मौजूद अस्पताल के कर्मचारी ने बीचबचाव किया था। उस कर्मचारी से पुलिस संपर्क नहीं कर सकी है। इस हाई प्रोफाइल मर्डर केस में यह मसला अहम बिंदु बनकर उभरा है।
शूटरों की तलाश में लगी एसटीएफ की एक टीम रविवार रात यमुनापार में छापेमारी कर रही थी। करछना से उठाए गए छह लोगों में एक ने पुलिस को घटना का एक अहम सुराग दे दिया। बताया कि यमुनापार का रहने वाला एक अस्पताल कर्मी डॉ. बंसल के भूमि संबंधी कारोबार का राजदार है। वह अस्पताल में कुछ समय के लिए ही आता जाता है। उसे मोटी पगार भी दी जाती है।
पुलिस को पूछताछ में पता चला कि नैनी-करछना में डॉ. बंसल की सौ बीघा से ज्यादा जमीन है। इस जमीन का एक चौथाई हिस्सा कछारी है। बालू खनन के लिहाज से यह इलाका सोना माना जाता है। खनन पर रोक और फिर इलाकाई पुलिस की सख्ती के कारण माफिया बालू भंडारण के लिए सुरक्षित जगह चाहते थे। इस बारे में डॉ. बंसल से खनन माफिया के एक गुट की मुलाकात उनके इस खास कर्मचारी ने ही कराई थी। कई बार की बातचीत के बाद भी डॉ. बंसल जब अवैध खनन से निकली बालू अपनी जमीन पर डंप कराने को राजी नहीं हुए तो माफिया के गुर्गे उन पर दबाव बनाने लगे।
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बताते हैं कि डॉ. बंसल तब नाराज हो गए, जब उनकी अनुमति के बगैर माफिया ने उनकी जमीन पर भारी मात्रा में बालू डंप करा दी। इसके बाद माफिया गुट और डॉ. बंसल के बीच अस्पताल में ही तीखी बातचीत हुई थी। पूछताछ में पुलिस को पता चला कि नैनी इलाके में डॉ. बंसल ने जमीन की खरीदारी अपने परिवारीजनों के नाम से की थी। खनन माफिया डॉक्टर की जमीन पर बालू डंप कर खुद को पुलिस से बचाना चाह रहे थे।
अब पुलिस करछना तहसील से डॉ. बंसल और उनके परिवारीजनों के नाम खरीदी-बेची गई जमीन का ब्यौरा एकत्र करने पर फोकस कर रही है। अवैध खनन से जुड़े माफिया और उसके गुर्गे पुलिस की हिटलिस्ट में हैं। पुलिस यमुनापार इलाके में रहने वाले उस कर्मचारी को भी तलाश रही है, जिसे डॉ. बंसल के भूमि संबंधी कारोबार का राजदार बताया जा रहा है।
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शूटरों की तलाश में लगी एसटीएफ की एक टीम रविवार रात यमुनापार में छापेमारी कर रही थी। करछना से उठाए गए छह लोगों में एक ने पुलिस को घटना का एक अहम सुराग दे दिया। बताया कि यमुनापार का रहने वाला एक अस्पताल कर्मी डॉ. बंसल के भूमि संबंधी कारोबार का राजदार है। वह अस्पताल में कुछ समय के लिए ही आता जाता है। उसे मोटी पगार भी दी जाती है।
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पुलिस को पूछताछ में पता चला कि नैनी-करछना में डॉ. बंसल की सौ बीघा से ज्यादा जमीन है। इस जमीन का एक चौथाई हिस्सा कछारी है। बालू खनन के लिहाज से यह इलाका सोना माना जाता है। खनन पर रोक और फिर इलाकाई पुलिस की सख्ती के कारण माफिया बालू भंडारण के लिए सुरक्षित जगह चाहते थे। इस बारे में डॉ. बंसल से खनन माफिया के एक गुट की मुलाकात उनके इस खास कर्मचारी ने ही कराई थी। कई बार की बातचीत के बाद भी डॉ. बंसल जब अवैध खनन से निकली बालू अपनी जमीन पर डंप कराने को राजी नहीं हुए तो माफिया के गुर्गे उन पर दबाव बनाने लगे।
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बताते हैं कि डॉ. बंसल तब नाराज हो गए, जब उनकी अनुमति के बगैर माफिया ने उनकी जमीन पर भारी मात्रा में बालू डंप करा दी। इसके बाद माफिया गुट और डॉ. बंसल के बीच अस्पताल में ही तीखी बातचीत हुई थी। पूछताछ में पुलिस को पता चला कि नैनी इलाके में डॉ. बंसल ने जमीन की खरीदारी अपने परिवारीजनों के नाम से की थी। खनन माफिया डॉक्टर की जमीन पर बालू डंप कर खुद को पुलिस से बचाना चाह रहे थे।
अब पुलिस करछना तहसील से डॉ. बंसल और उनके परिवारीजनों के नाम खरीदी-बेची गई जमीन का ब्यौरा एकत्र करने पर फोकस कर रही है। अवैध खनन से जुड़े माफिया और उसके गुर्गे पुलिस की हिटलिस्ट में हैं। पुलिस यमुनापार इलाके में रहने वाले उस कर्मचारी को भी तलाश रही है, जिसे डॉ. बंसल के भूमि संबंधी कारोबार का राजदार बताया जा रहा है।