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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Damaged in the temple sculptures of young amateurs

सिरफिरे युवक ने मंदिर में क्षतिग्रस्त की मूर्तियां

Sun, 08 Feb 2015 12:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद Updated Sun, 08 Feb 2015 12:05 AM IST
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 अरैल गांव क्षेत्र स्थित एक मंदिर में शुक्रवार देर रात एक सिरफिरे युवक ने तोड़फोड़ कर दी। उसने दो मूर्तियों को क्षतिग्रस्त कर दिया। लोगों ने उसे दबोचकर पीटा मगर वह मौका पाकर भाग गया। इस घटना से नाराजगी को देखते हुए शनिवार को सीओ करछना ने खुद प्रतिमाएं मंगाकर मंदिर में स्थापित कराई तो लोग शांत हुए। यह घटना अंजाम देने वाले युवक ने खुद को बिहार का निवासी बताया था। वह भिक्षुक बनने के लिए आया था।
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 अरैल स्थित सम्राट हर्षवर्धन बौद्ध बिहार के सामने एक छोटे मंदिर में शुक्रवार रात घुसे एक युवक ने भगवान हनुमान और शिव की मूर्तियां क्षतिग्रस्त कर दीं। पता चला तो वहां भी़ लग गई। उस युवक को बौद्ध बिहार परिसर में पकड़कर लोगों ने जमकर धुन दिया। आक्रोशित भीड़ के बीच से बचकर किसी तरह युवक भाग निकला। मंदिर में मूर्तियों को क्षतिग्रस्त होने की खबर फैली तो शनिवार सुबह वहां भीड़ लग गई। लोगों में आक्रोश की जानकारी पाकर पुलिस के साथ सीओ करछना समरबहादुर सिंह भी वहां पहुंच गए। उन्होंने समझा-बुझाकर किसी तरह लोगों को शांत कराया। फिर दूसरी प्रतिमा मंगाकर मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा कराकर लोगों को मनाया। सीओ ने बताया कि  आरोपी रतेंद्रनाथ बिहार में आरा जनपद का रहने वाला है।
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उसकी हरकतों के बारे में जानने के बाद पुलिस का अनुमान है कि वह दिमागी संतुलन खो चुका है। वह मंदिर से निकाली मूर्ति को लेकर इधर-उधर दौड़ रह था। इस संबंध में बौद्ध कम्यून इंटरनेशनल के प्रबंध निदेशक जीएस शाक्या ने बताया कि  रतेंद्रनाथ ने 29 जनवरी को उनके पास आकर भिक्षुक बनने की इच्छा जाहिर की थी। उसे किसी ने माघ मेला से उनके पास भेज दिया था। उन्होंने रतेंद्रनाथ को भिक्षुक बनाने से इनकार कर यिा क्योंकि वह उसके बारे में कुछ भी नहीं जानते थे। हालांकि उसे बौद्ध बिहार में ठहरने से नहीं मना किया गया।  फिर वह शहर से बाहर चले गए। शुक्रवार रात ही वह लौटकर। शनिवार सुबह उन्हें इस घटना के बारे में बताया। बौद्ध बिहार में उसने अपना नाम संत रतेंद्रनाथ लिखाया था। खुद के बारे में बताया था कि वह एलएलबी कर चुका है लेकिन अब वह दीन-दुनिया से विरत होकर संत बनना चाहता है। मंदिर में तोड़फोड़ के बाद से वह फरार है।
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