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धांधली की आशंका पर पहले से सुलग रही थी चिंगारी
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 11 Feb 2016 01:52 AM IST
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बहादुरपुर ब्लॉक में चुनावी हिंसा यूं ही नहीं भड़की। एक हफ्ते पहले से चिंगारी सुलग रही थी। चुनाव हारने वाले प्रत्याशी अरुणेंद्र ने वोटरों के सहायक नियुक्त किए जाने में धांधली की आशंका जताते हुए ब्लॉक और जिला स्तर पर अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। साथ ही आरोप लगाया था कि प्रशासन सिर्फ उन्हीं वोटरों के लिए सहायक नियुक्त करने की अनुमति दे रहा है, जिनके लिए सत्ता पक्ष के प्रत्याशी ने सिफारिश की है। इस मामले में जांच की मांग भी की गई थी लेकिन शिकायती पत्र रद्दी की टोकरी में फेंक दिया गया।
बहादुरपुर ब्लॉक में सपा प्रत्याशी राजकुमार सिंह और निर्दल उम्मीदवार अरुणेंद्र के बीच कांटे की टक्कर हुई। महज सात वोटों से जीत-हार तय हुआ। अरुणेंद्र ने चुनाव में धांधली की आशंक जताते हुए हफ्ते भर पहले ब्लॉक और जिला स्तर के अफसरों के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। अरुणेंद्र का आरोप था कि सिर्फ उन्हीं निरीक्षर वोटरों को सहायक दिए जा रहे हैं, जो सपा प्रत्याशी के समर्थक हैं।
बाकी निरक्षर वोटरों को सहायक नहीं दिए जा रहे। आशंका जताई गई थी कि मतदान के दौरान सहायक की आड़ में फर्जीवाड़ा हो सकता है। अरुणेंद्र भी की तरफ से भी निरक्षर वोटरों के नाम और उनके सहायक नियुक्त करने के लिए एक सूची प्रशासन को सौंपी गई थी। उनका आरोप है कि प्रशासन ने इस आवेदन पर कोई विचार नहीं हुआ।
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चुनाव से ठीक पहले अरुणेंद्र के खिलाफ तीन मुकदमे दर्ज करा दिए गए, जिससे तनातनी और बढ़ गई।
बुधवार को मतदान शुरू होते ही फर्जी वोटिंग की आशंका पर अरुणेंद्र और उनके समर्थक मतदान केंद्र के बाहर इकट्ठा हो गए। पुलिस ने उन्हें हटाना चाहा तो उन्होंने विरोध किया और आरोप लगाया कि उन्हें मौके से हटाकर सपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान कराए जाने की कोशिश हो रही है और इसी बात पर बवाल हो गया। साथ ही एक समर्थक को अपनी जान गंवानी पड़ गई। अगर चुनाव से पहले अफसरों ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लिया होता तो यह नौबत न आती।
‘अरुणेंद्र के आवेदन पर भी विचार किया गया था और जितने निरक्षर वोटरों ने सहायक मांगे, सबको सहायक लेने की अनुमति दी गई। किसी तरह का पक्षपात नहीं किया गया।’ संजय कुमार, डीएम
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बहादुरपुर ब्लॉक में सपा प्रत्याशी राजकुमार सिंह और निर्दल उम्मीदवार अरुणेंद्र के बीच कांटे की टक्कर हुई। महज सात वोटों से जीत-हार तय हुआ। अरुणेंद्र ने चुनाव में धांधली की आशंक जताते हुए हफ्ते भर पहले ब्लॉक और जिला स्तर के अफसरों के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। अरुणेंद्र का आरोप था कि सिर्फ उन्हीं निरीक्षर वोटरों को सहायक दिए जा रहे हैं, जो सपा प्रत्याशी के समर्थक हैं।
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बाकी निरक्षर वोटरों को सहायक नहीं दिए जा रहे। आशंका जताई गई थी कि मतदान के दौरान सहायक की आड़ में फर्जीवाड़ा हो सकता है। अरुणेंद्र भी की तरफ से भी निरक्षर वोटरों के नाम और उनके सहायक नियुक्त करने के लिए एक सूची प्रशासन को सौंपी गई थी। उनका आरोप है कि प्रशासन ने इस आवेदन पर कोई विचार नहीं हुआ।
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चुनाव से ठीक पहले अरुणेंद्र के खिलाफ तीन मुकदमे दर्ज करा दिए गए, जिससे तनातनी और बढ़ गई।
बुधवार को मतदान शुरू होते ही फर्जी वोटिंग की आशंका पर अरुणेंद्र और उनके समर्थक मतदान केंद्र के बाहर इकट्ठा हो गए। पुलिस ने उन्हें हटाना चाहा तो उन्होंने विरोध किया और आरोप लगाया कि उन्हें मौके से हटाकर सपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान कराए जाने की कोशिश हो रही है और इसी बात पर बवाल हो गया। साथ ही एक समर्थक को अपनी जान गंवानी पड़ गई। अगर चुनाव से पहले अफसरों ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लिया होता तो यह नौबत न आती।
‘अरुणेंद्र के आवेदन पर भी विचार किया गया था और जितने निरक्षर वोटरों ने सहायक मांगे, सबको सहायक लेने की अनुमति दी गई। किसी तरह का पक्षपात नहीं किया गया।’ संजय कुमार, डीएम