बच्चों के सामने ट्रेन से कटकर पिता की मौत
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बलिया में चितबरा इलाके में गोरवां गांव निवासी सीताराम के छह बेटों में तीसरे नंबर का सुनील कुमार दिल्ली में मजदूरी करता था। पत्नी मुन्नी भी बेटों सात वर्षीय सुमित, ढाई साल के सुजीत और पांच वर्षीय बेटी अंजली समेत उसके साथ दिल्ली में ही थी। पत्नी से किसी बात पर झगड़े के बाद बुधवार शाम तीनों बच्चों को लेकर नार्थ-ईस्ट एक्सप्रेस से बलिया के लिए रवाना हो गया। उसे इलाहाबाद जंक्शन पर उतरकर बलिया के लिए दूसरी ट्रेन पकड़नी थी।
भोर में करीब पौने चार बजे ट्रेन सूबेदारगंज स्टेशन पर रुकी तो वह इलाहाबाद जंक्शन समझकर तीनों बच्चों के साथ उतर गया। प्लेटफार्म पर जाने के लिए उसने सुमित और अंजली को पटरी पार करा दी। फिर वह खुद बेटे सुजीत को गोद में लेकर पटरी पार करने लगा तभी हावड़ा से दिल्ली जा रही राजधानी एक्सप्रेस आ गई। ट्रेन करीब देख उसने बेटे को दूर उछाल दिया लेकिन खुद नहीं बच सका। सुनील की ट्रेन से कटकर मौत हो गई। बच्चे रोने लगे तो जीआरपी और आरपीएफ की टीम के साथ ही रेलवे कर्मचारी पहुंच गए।
रेलवे पुलिस ने तीनों बच्चों को किसी तरह शांत कराने के बाद जीआरपी थाने पहुंचा दिया। सुनील के जेब में मिले कागज पर लिखे मोबाइल नंबर पर भोर में ही बलिया में उसके भाई किशुन देव को खबर दी गई। दोपहर बाद पिता सीताराम और भाई किशुन समेत कई रिश्तेदार इलाहाबाद जीआरपी थानेे आ गए। बाबा को देख बच्चे रोते हुए उनकी गोद में चले गए। इस घटना से परिजन स्तब्ध हैं। उन्होंने सुनील की पत्नी मुन्नी को फोन किया तो उसने कहा कि झगड़ा होने के बाद वह सुमित और अंजली को बलिया के स्कूल में दाखिला कराने और मासूम सुजीत को घुमाने की बात कहकर ले गए थे। उसे साथ ले जाने से मना कर दिया था।